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Wednesday, 19 August 2026
स्वास्थ्य

पोलियो का खतरा: यूके में बढ़ते मामले, भारत भी सतर्क

author
Komal
संवाददाता
📅 03 April 2026, 7:27 PM ⏱ 1 मिनट 👁 704 views
पोलियो का खतरा: यूके में बढ़ते मामले, भारत भी सतर्क
📷 aarpaarkhabar.com

यूके में पोलियो का बढ़ता खतरा: एक पीढ़ी का सबसे बड़ा जोखिम


कोविड-19 महामारी के बाद अब एक और स्वास्थ्य चुनौती ने दस्तक दी है। यूनाइटेड किंगडम में प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि देश में पोलियो के बड़े पैमाने पर प्रकोप का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति पिछली एक पीढ़ी में सबसे गंभीर है।



मम्प्स और मीजल्स के बाद अब पोलियो जैसी गंभीर बीमारी का खतरा न केवल यूके बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों में भी बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति वैक्सीनेशन की गिरती दरों का सीधा परिणाम है।


वैक्सीनेशन दरों में गिरावट की समस्या


कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया लॉकडाउन में थी, तो नियमित टीकाकरण कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए। यूके में भी बच्चों के नियमित टीकाकरण में भारी गिरावट देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट इतनी चिंताजनक है कि पोलियो जैसी बीमारियों के वापसी का खतरा मंडरा रहा है।



पहले से ही मम्प्स और मीजल्स के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों को चिंता में डाल दिया था। अब पोलियो का बढ़ता जोखिम इस समस्या को और भी गंभीर बना रहा है।


पोलियो: एक जीवनभर का खतरा


पोलियो एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। इस बीमारी की सबसे डरावनी बात यह है कि यह बच्चों को जीवनभर के लिए लकवाग्रस्त बना सकती है।



### पोलियो के मुख्य लक्षण:



| प्रारंभिक लक्षण | गंभीर लक्षण | जटिलताएं |







---------------------------------------
बुखारमांसपेशियों में कमजोरीस्थायी लकवा
सिरदर्दसांस लेने में कठिनाईमांसपेशियों का सिकुड़ना
गले में खराशनिगलने में परेशानीजीवनभर विकलांगता
उल्टीहाथ-पैरों में दर्दसांस संबंधी समस्याएं



यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मल या सलाइवा के माध्यम से फैलता है। एक बार संक्रमित होने पर, व्यक्ति कई दिनों तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है।


विशेषज्ञों की चेतावनी


कोविड-19 महामारी के दौरान जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वैक्सीनेशन कवरेज में आई कमी के कारण community immunity (सामुदायिक प्रतिरक्षा) कमजोर हो गई है।



डॉक्टरों के अनुसार, जब किसी समुदाय में 95% से अधिक बच्चे टीकाकृत होते हैं, तब herd immunity बनती है। लेकिन अब यह दर काफी कम हो गई है, जिससे पोलियो जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।


वैश्विक स्थिति और भारत के लिए चेतावनी


यूके की स्थिति सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कई देशों में इसी तरह की चिंताएं व्यक्त की हैं। भारत के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।



भारत ने 2014 में पोलियो मुक्त का दर्जा हासिल किया था, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते मामले और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के कारण जोखिम बना रहता है। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस स्थिति पर कड़ी निगरानी रखनी होगी।


तत्काल कार्ययोजना की जरूरत


इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कुछ कदम उठाने की जरूरत है:



सरकारी स्तर पर:

- टीकाकरण अभियान तेज करना

- जागरूकता कार्यक्रम चलाना

- स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना

- बॉर्डर पर स्क्रीनिंग बढ़ाना



व्यक्तिगत स्तर पर:

- बच्चों का पूरा टीकाकरण कराना

- स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना

- संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना


निष्कर्ष


पोलियो का बढ़ता खतरा एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूके में देखी जा रही स्थिति पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है। समय रहते उचित कदम उठाकर ही हम इस खतरे से बच सकते हैं।



माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों का पूरा टीकाकरण कराएं और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। सरकारी स्तर पर भी तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है ताकि एक बार फिर इस भयानक बीमारी का प्रकोप न देखना पड़े।