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Thursday, 21 May 2026
टेक

क्वांटम कंप्यूटर से इंटरनेट सुरक्षा को खतरा

author
Komal
संवाददाता
📅 21 May 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 746 views
क्वांटम कंप्यूटर से इंटरनेट सुरक्षा को खतरा
📷 aarpaarkhabar.com

इंटरनेट की दुनिया में एक नया और भयावह खतरा मंडरा रहा है। क्वांटम कंप्यूटर की तकनीक हमारी सभी डिजिटल सुरक्षा को धराशायी कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में यह खतरा अपने चरम पर पहुंच सकता है। कनाडा स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी इवोल्यूशनक्यू के सह-संस्थापक और सीईओ मिशेल मोस्का के अनुसार क्यू-डे वह समय होगा जब किसी देश, संगठन या विरोधी समूह के पास ऐसा क्वांटम कंप्यूटर होगा जो वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे क्रिप्टोग्राफिक कोड को तोड़ सकेगा। क्रिप्टोग्राफी वह तकनीक है जो इंटरनेट पर भेजी जाने वाली जानकारी को एन्क्रिप्ट यानी कूटबद्ध करके सुरक्षित बनाती है।

यह खतरा केवल एक दूर की बात नहीं है। विश्व के शीर्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2029 तक यह स्थिति आ सकती है। इसका मतलब यह है कि हमारे पास मात्र तीन से चार साल का समय है इस विशाल संकट से निपटने के लिए। बैंकिंग सिस्टम, सरकारी डेटा, व्यक्तिगत जानकारी और क्रिप्टोकरेंसी सभी कुछ इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं।

क्वांटम कंप्यूटर की शक्ति और खतरा

क्वांटम कंप्यूटर एक अलग ही किस्म की तकनीक है। यह पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में लाखों गुना तेजी से गणना कर सकता है। जहां सामान्य कंप्यूटर बाइनरी सिस्टम यानी शून्य और एक के माध्यम से काम करता है, वहीं क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम बिट्स या क्यूबिट्स का उपयोग करता है। ये क्यूबिट्स एक साथ कई अवस्थाओं में रह सकते हैं।

इस अद्भुत शक्ति के कारण क्वांटम कंप्यूटर ऐसे जटिल गणितीय समस्याओं को हल कर सकते हैं जिन्हें सामान्य कंप्यूटर हजारों साल में भी नहीं सुलझा सकते। वर्तमान में जो एन्क्रिप्शन तकनीकें बैंक, सरकार और निजी संस्थाएं उपयोग कर रही हैं, वे इन विशाल संख्याओं की कठिनता पर निर्भर हैं। क्वांटम कंप्यूटर इन संख्याओं को तेजी से तोड़ सकते हैं, जिससे समस्त डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।

इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, ईमेल, मेसेजिंग एप्स और सोशल मीडिया सभी इसी एन्क्रिप्शन पर निर्भर हैं। जब यह सुरक्षा टूट जाएगी तो किसी के भी व्यक्तिगत डेटा को चोरी करना आसान हो जाएगा। आपके बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड के नंबर, आधार नंबर, पासपोर्ट विवरण सभी कुछ असुरक्षित हो सकता है।

विश्व भर में बढ़ता जा रहा चिंता

यह समस्या केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। अमेरिका, यूरोप, एशिया सभी क्षेत्रों की सरकारें और निजी कंपनियां इसी समस्या को हल करने में लगी हुई हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (एनआईएसटी) अमेरिका में पहले से ही पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के मानकों को तैयार कर रहा है।

क्वांटम कंप्यूटिंग का विकास भी तेजी से हो रहा है। गूगल, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य बड़ी टेक कंपनियां इसमें भारी निवेश कर रही हैं। चीन भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में सभी को तैयारी करनी होगी। क्या होगा अगर कोई शत्रु देश पहले क्वांटम कंप्यूटर विकसित कर ले? उस स्थिति में वह दूसरे देशों के सभी डिजिटल रहस्यों को उजागर कर सकेगा।

समाधान और तैयारी

इस समस्या का समाधान भी उपलब्ध है। वैज्ञानिकों ने नई पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी तकनीकें विकसित की हैं जो क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों का सामना कर सकती हैं। ये नई तकनीकें गणितीय समस्याओं पर आधारित हैं जिन्हें क्वांटम कंप्यूटर भी आसानी से हल नहीं कर सकते।

लेकिन समस्या यह है कि इन नई तकनीकों को लागू करने में समय, पैसा और संसाधन लगेंगे। विश्व के लाखों सर्वर, कंप्यूटर और उपकरणों को अपग्रेड करना होगा। सभी सॉफ्टवेयर और सिस्टम को नए मानकों के अनुसार फिर से लिखना होगा। यह एक बहुत बड़ी चुनौती है।

भारत भी इसके लिए तैयारी कर रहा है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और साइबर सुरक्षा एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। सरकार, निजी क्षेत्र और शिक्षा संस्थानों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।

क्वांटम कंप्यूटर से होने वाले साइबर खतरे को लेकर जागरूकता बहुत जरूरी है। सामान्य लोगों को समझना चाहिए कि यह समस्या कितनी गंभीर है। वे अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड, दो-फैक्टर प्रमाणीकरण और नियमित अपडेट का उपयोग करें। कंपनियों को भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपग्रेड करते रहना चाहिए।

2029 का वह साल आएगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन हमें इसके लिए अभी से तैयार हो जाना चाहिए। क्वांटम कंप्यूटर की शक्ति को सही दिशा में लगाया जाए तो यह मानवता के लिए वरदान साबित हो सकता है। लेकिन अगर गलत हाथों में चली गई तो यह विनाश का कारण भी बन सकती है। इसलिए सभी को इस दिशा में सचेष्ट रहना होगा और एक दूसरे के साथ काम करना होगा। डिजिटल दुनिया की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है।