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Thursday, 05 November 2026
धर्म

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय का इस्तीफा तय

author
Komal
संवाददाता
📅 27 June 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 495 views
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय का इस्तीफा तय
📷 aarpaarkhabar.com

अयोध्या के राम मंदिर को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अपना इस्तीफा देने वाले हैं। इस पूरे मामले में बैंक के अधिकारी भी संलिप्त माने जा रहे हैं। वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री नृपेंद्र सिंह चौहान इस समय इस विवाद पर चुप हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला काफी संवेदनशील साबित हुआ है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिया जाने वाला चढ़ावा मंदिर के विकास कार्यों में लगाया जाता है। लेकिन इस बार चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं का पता चला है। आंतरिक जांच में यह बात सामने आई है कि चढ़ावे के बंधन में गड़बड़ी हुई है।

चंपत राय के इस्तीफे की संभावना बढ़ी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबरें लगातार आ रही हैं। पिछले कई दिनों से यह चर्चा थी कि चंपत राय इस विवाद के बाद अपना पद छोड़ सकते हैं। अब यह माना जा रहा है कि उनका इस्तीफा लगभग तय हो गया है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

चंपत राय का ट्रस्ट में दीर्घ इतिहास रहा है। वे राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। लेकिन इस चढ़ावा चोरी प्रकरण ने उनकी छवि को धूमिल कर दिया है। उनके साथ ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा भी इस विवाद में फंसे हैं।

डॉ. अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी का आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि वे भी अपना पद त्यागने के लिए तैयार हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में दोनों को जवाबदेही करनी होगी। अभी तक ट्रस्ट ने इस बारे में स्पष्ट बयान नहीं दिया है कि वे कब तक आधिकारिक घोषणा करेंगे।

बैंक अधिकारी भी फंसेंगे

चढ़ावा चोरी के इस प्रकरण में केवल ट्रस्ट के अधिकारी ही नहीं, बल्कि बैंक के अधिकारी भी संलिप्त पाए गए हैं। जिस बैंक में राम मंदिर का खाता है, वहां के कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। आंतरिक जांच में पता चला है कि बैंक के अधिकारियों ने लेनदेन में कुछ अनियमितताओं को नजरअंदाज किया था।

बैंक की ओर से चढ़ावे की राशि से जुड़े लेनदेन पर सख्त नजर रखनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जांच में यह बात पता चली है कि कुछ संदिग्ध लेनदेन बैंक में दर्ज हुए, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बैंक के अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण अब उन पर भी कार्रवाई की संभावना है।

बैंक प्रबंधन से यह अपेक्षा की जाती है कि वह तुरंत आंतरिक जांच करे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे। इसके साथ ही बैंक को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त निर्देश जारी करने चाहिए। राम मंदिर जैसे संवेदनशील संस्थान के खाते पर विशेष निगरानी होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री नृपेंद्र अभी चुप हैं

राज्य के मुख्यमंत्री नृपेंद्र सिंह चौहान इस पूरे विवाद पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिए हैं। यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। राम मंदिर राज्य की गौरव की बात है और इससे जुड़े किसी भी विवाद पर मुख्यमंत्री को तुरंत स्पष्ट बयान देना चाहिए। लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

नृपेंद्र को चाहिए कि वे इस प्रकरण में जवाबदेही सुनिश्चित करें। राम मंदिर की छवि को बचाने के लिए तुरंत पारदर्शी जांच की जानी चाहिए। जनता को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर मुख्यमंत्री चुप रहेंगे, तो इससे यही संदेश जाता है कि सरकार इस मामले को हल्के में ले रही है।

आर्टिकल का निष्कर्ष यह है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का प्रकरण बेहद गंभीर है। चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा केवल पहला कदम होना चाहिए। पूरी जांच पारदर्शी होनी चाहिए और सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रणाली को और मजबूत बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री को भी इस विषय पर स्पष्ट बयान देते हुए जनता को आश्वस्त करना चाहिए।