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Thursday, 16 July 2026
धर्म

शनि त्रयोदशी आज: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

author
Komal
संवाददाता
📅 27 June 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 705 views
शनि त्रयोदशी आज: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
📷 aarpaarkhabar.com

आज 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत का दिन है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक दिन माना जाता है जब भगवान शिव और शनिदेव की पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से मनुष्य को असाधारण लाभ मिलते हैं और जीवन की सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत के बारे में विस्तार से और समझते हैं इसे करने का सही तरीका।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व और इतिहास बहुत पुराना है। पुराणों में इस व्रत का विशेष उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करता है, उसे शनिदेव की सभी बुराइयों से रक्षा मिलती है। इसके अलावा भगवान शिव की कृपा भी इस दिन प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत शास्त्रों में सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना गया है।

शनि प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और समय

27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदोष काल सूर्यास्त के ढाई घंटे बाद से शुरू होता है और लगभग दो घंटे तक रहता है। इस समय व्रत को खोलना और पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। 27 जून को सूर्यास्त का समय शाम के करीब 19:15 बजे होगा। इसके बाद प्रदोष काल शुरू होगा जो रात्रि 21:15 तक रहेगा।

इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्तियों को सुबह जल्दी उठना चाहिए और पवित्र होकर भगवान शिव की मूर्ति को स्नान कराना चाहिए। व्रत को करते समय मन में केवल भगवान का ही ध्यान रखना चाहिए। प्रदोष काल में ही सभी पूजा-पाठ की क्रियाएं संपन्न करनी चाहिए क्योंकि इसी समय भगवान शिव और शनिदेव सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं।

व्रत को खोलते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। व्रत को खोलने से पहले भगवान को नैवेद्य का प्रसाद अर्पित करना चाहिए और फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। व्रत को रखने के दिन हल्के और सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए। नमक, मसाले और तेल-मिर्च युक्त भोजन से बचना चाहिए।

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि और मंत्र

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि अत्यंत सरल है लेकिन इसे पूरी श्रद्धा के साथ करना आवश्यक है। सबसे पहले स्नान करके पवित्र कपड़े पहनने चाहिए। घर के पूजा घर को साफ-सुथरा करके तैयार करना चाहिए। भगवान शिव की मूर्ति या लिंग को स्थापित करना चाहिए और उसके सामने एक दीप जलाना चाहिए।

फिर भगवान को जल, दूध, दही और घी से स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान को फूलों की माला पहनाई जाती है और धूप-अगरबत्ती जलाई जाती है। व्रत के दौरान भगवान शिव का नाम स्मरण करते हुए जप करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र: "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।"

इस मंत्र को कम से कम 108 बार जपना चाहिए। शनिदेव की पूजा के लिए शनि को समर्पित मंत्र का जाप करना चाहिए। शनि देवता को तेल और काले तिल का प्रसाद भी अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान व्रती को मौन रहना चाहिए और किसी से झगड़ा-विवाद नहीं करना चाहिए।

शनि प्रदोष व्रत का पारण और व्रत खोलने का सही समय

व्रत को तोड़ने का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्रत को केवल प्रदोष काल में ही खोलना चाहिए। 27 जून को प्रदोष काल रात 19:15 से 21:15 तक होगा। इसी समय में व्रत को खोलना विशेष फल प्रदायक माना जाता है। व्रत को खोलते समय सबसे पहले भगवान को नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।

नैवेद्य में चावल, दाल, घी और सब्जियों का प्रयोग किया जा सकता है। फिर व्रती को इसी प्रसाद को ग्रहण करना चाहिए। व्रत को खोलते समय मीठा पदार्थ भी खाना चाहिए। कुछ लोग व्रत को खोलते समय खीर, हलवा या फल का सेवन करते हैं।

व्रत को खोलने के बाद घर के सभी सदस्यों को प्रसाद का वितरण करना चाहिए। इस दिन दान-पुण्य करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र देना और दक्षिणा देना इस व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

शनि प्रदोष व्रत को करने से मनुष्य को शनि की साढ़े साती और ढैया से सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। व्रत को निष्ठा और भक्ति के साथ करने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। इसलिए हर भक्त को इस दिन व्रत को करने का प्रयास अवश्य करना चाहिए।