के-ब्यूटी का काला सच: मृतकों की त्वचा से बने इंजेक्शन
दक्षिण कोरिया की के-ब्यूटी इंडस्ट्री में मृतकों की त्वचा से बने इंजेक्शन का इस्तेमाल। एलएंडसी बायो का खतरनाक सच जानें।
दक्षिण कोरिया की सौंदर्य इंडस्ट्री का काला सच
दक्षिण कोरिया की सौंदर्य इंडस्ट्री को के-ब्यूटी के नाम से दुनिया जानती है। यह इंडस्ट्री पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है और अब यह एक अरब डॉलर का बाजार बन गई है। लेकिन इसके पीछे एक काला सच छिपा है जो हाल ही में सामने आया है। दक्षिण कोरिया की कुछ कंपनियां मानव ऊतकों से बने इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। ये इंजेक्शन मृत लोगों की दान की गई त्वचा से बनाए जाते हैं। यह बात सुनने में जितनी डरावनी है, वास्तविकता उससे कहीं ज्यादा गंभीर है।
एलएंडसी बायो नामक एक कंपनी ने इस तरह के उत्पाद विकसित किए हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका में मृत्यु के बाद दान की गई त्वचा को इकट्ठा करती है। फिर इसे प्रोसेस करके इंजेक्शन के रूप में तैयार किया जाता है। ये इंजेक्शन चेहरे की झुर्रियों को कम करने, त्वचा को चमकदार बनाने और उम्र के निशान मिटाने के लिए बेचे जाते हैं। सौंदर्य को लेकर लोगों का जुनून इतना है कि वे यह नहीं सोचते कि वह सामग्री कहां से आ रही है।
मृतकों की त्वचा का व्यापार
दक्षिण कोरिया ने पिछले दशक में अपनी सौंदर्य इंडस्ट्री को बहुत तेजी से आगे बढ़ाया है। इस इंडस्ट्री में करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है। लेकिन इस सफलता के पीछे एक अनैतिक कारोबार चल रहा है। मृतकों की त्वचा का व्यापार एक ऐसा विषय है जिस पर किसी ने गंभीरता से बात नहीं की। एलएंडसी बायो ने अमेरिका के विभिन्न स्थानों से मृत्यु के बाद दान की गई त्वचा को इकट्ठा किया है।
यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है, लेकिन नैतिक रूप से प्रश्नचिह्न के घेरे में है। दान देने वाले व्यक्तियों के परिवारों को पूरी जानकारी नहीं दी जाती कि उनके प्रिय जन की त्वचा का इस्तेमाल किस तरह से किया जाएगा। कई बार तो परिवार के सदस्यों को यह भी नहीं पता होता कि उनके परिजन की त्वचा किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा रही है। यह एक तरह की आर्थिक हिंसा है जहां गरीब और अशिक्षित परिवारों का फायदा उठाया जा रहा है।
जब दक्षिण कोरिया में इन उत्पादों की मांग बढ़ी तो एलएंडसी बायो ने अपना कारोबार बढ़ाया। कंपनी ने न केवल अमेरिका में बल्कि अन्य देशों में भी ये उत्पाद बेचे हैं। भारत समेत कई एशियाई देशों में इन इंजेक्शन की खुली मांग है। महिलाएं कम उम्र में ही अपने चेहरे पर इन इंजेक्शन लगवाने लगी हैं। इसके स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों के बारे में कोई भी सोचता नहीं है।
अमेरिका के बाजार में फिर से प्रवेश
हाल ही में एलएंडसी बायो ने अमेरिकी बाजार में दोबारा अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी की है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार वे अपने उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पेश करने के लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं। यह एक चिंताजनक बात है क्योंकि अमेरिका में भी उपभोक्ताओं को सही जानकारी दिए बिना इन उत्पादों को बेचने की संभावना है।
अमेरिकी नियामक संस्थाओं ने अभी तक इन उत्पादों के संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं। यह एक बहुत बड़ी कमजोरी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं। लेकिन तब तक हजारों लोग इन खतरनाक उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि इन इंजेक्शन के दुष्प्रभाव बहुत गंभीर हो सकते हैं।
नैतिक मुद्दों को अलग रखें तो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी ये उत्पाद खतरनाक हैं। मृत व्यक्ति की त्वचा से बनाए गए उत्पाद संक्रमण का कारण बन सकते हैं। कई बार तो एलर्जी भी देखी गई है। कुछ महिलाओं को इन इंजेक्शन के बाद गंभीर स्किन इन्फेक्शन हुआ है। कुछ को तो अपने चेहरे की सर्जरी भी करवानी पड़ी है।
दक्षिण कोरिया की सरकार को भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाना चाहिए। मानव ऊतकों का व्यापार एक अंतरराष्ट्रीय अपराध है। यूनेस्को और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मानव ऊतकों के व्यापार को रोकने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए हैं। लेकिन कई देशों में इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। अमेरिका में भी इस मामले में लापरवाही बरती जा रही है।
उपभोक्ताओं को भी इस बारे में जागरूक होना चाहिए कि वे जो सौंदर्य उत्पाद खरीद रहे हैं वह कहां से आ रहे हैं। एक सुंदर चेहरे के लिए किसी के मृत शरीर की कीमत चुकाना नैतिक नहीं है। सौंदर्य का मतलब सिर्फ बाहरी चमक नहीं होता। असली सौंदर्य तो भीतर से आता है। लेकिन जब तक समाज में सौंदर्य को लेकर यह अंधी चाह बनी रहेगी तब तक मानव ऊतकों का व्यापार बंद नहीं होगा। सरकारें, चिकित्सा संस्थाएं और समाज को मिलकर इस समस्या से लड़ना होगा। अन्यथा यह बीमारी सारी दुनिया में फैल जाएगी।




