🔴 ब्रेकिंग
DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|
Friday, 05 June 2026
विश्व

ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर लगाई फटकार

author
Komal
संवाददाता
📅 02 June 2026, 7:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 785 views
ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर लगाई फटकार
📷 aarpaarkhabar.com

लेबनान पर इस्राइली हमलों और ईरान की चेतावनी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। उन्होंने पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर बेहद नाराज होकर कड़ी फटकार लगाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कदम दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश है। ट्रंप के भारी दबाव के बाद इस्राइल को बेरूत पर बड़े हमले की योजना को अभी के लिए स्थगित करना पड़ा है। इस निर्णय से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता फिलहाल सुरक्षित और खुला रहा है।

ट्रंप की फोन कॉल और कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइली पीएम नेतन्याहू को फोन करके साफ-साफ कहा कि वह अपनी आक्रामक नीति को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, 'क्या बकवास कर रहे हो?' यह कथन ट्रंप की नाराजगी को स्पष्ट करता है। उन्होंने नेतन्याहू को समझाया कि लेबनान में किये जाने वाले बड़े सैन्य अभियान से पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बन सकती है। ट्रंप का मानना है कि इस समय सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनयिक समाधान ही बेहतर है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्राइल को यह भी चेतावनी दी कि यदि वह लेबनान पर बड़ा हमला करता है, तो इससे ईरान भी सीधे तौर पर शामिल हो सकता है। इससे न केवल मध्य पूर्व में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में शांति बनी रहे और सभी पक्ष संवाद के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाएँ।

लेबनान में इस्राइली कार्रवाई और ईरान की प्रतिक्रिया

पिछले कुछ दिनों में लेबनान में इस्राइली सेना द्वारा किये गए हमलों ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है। इन हमलों में कई लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इस्राइल का कहना है कि ये हमले हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट करने के लिए किये जा रहे हैं, जिन्हें वह एक आतंकवादी संगठन मानता है।

दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इस्राइल को सीधी चेतावनी दी है। ईरान के नेताओं ने कहा कि यदि इस्राइल लेबनान पर अपनी कार्रवाई जारी रखता है, तो वह अपने हित में ऐसा नहीं मानेंगे। ईरान के इस रवैये से लगता है कि वह हिजबुल्लाह के साथ खड़ा है और इस मुद्दे पर अपना समर्थन दे सकता है।

इस स्थिति में, ट्रंप का हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति को न केवल अपने सहयोगी इस्राइल को नियंत्रित करना है, बल्कि ईरान के साथ भी संवाद बनाए रखना है। यह एक नाजुक संतुलन है, जिसे ट्रंप सावधानीपूर्वक संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

बेरूत पर बड़े हमले की योजना स्थगित

ट्रंप के दबाव और फटकार के बाद, इस्राइली सरकार को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा है। बेरूत पर किये जाने वाले बड़े सैन्य अभियान को अभी के लिए टाल दिया गया है। इस निर्णय से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस्राइल पर काफी प्रभाव है और नेतन्याहू उनकी सलाह को गंभीरता से लेते हैं।

इस कदम को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक माना है। शांति के लिए काम करने वाली संस्थाएं और कई देशों ने ट्रंप के इस हस्तक्षेप की सराहना की है। लेबनान के नागरिकों के लिए भी यह खबर कुछ राहत की है, क्योंकि इससे अधिक जनहानि नहीं होगी।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि यह समाधान अस्थायी है। असली समस्या का समाधान तभी होगा जब सभी पक्ष आपस में बातचीत करें और एक-दूसरे की चिंताओं को समझें। ट्रंप प्रशासन इसी दिशा में काम कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य पूर्व में एक दीर्घकालीन शांति की स्थापना करना चाहते हैं। इसके लिए, इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच एक समझौता जरूरी है, साथ ही ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ भी बातचीत की आवश्यकता है। ट्रंप की यह कार्रवाई इसी बड़े लक्ष्य का एक हिस्सा है।

वर्तमान परिस्थितियों में, सभी को आशा है कि राजनयिक समाधान सफल होगा और क्षेत्र में शांति स्थापित होगी। लेकिन यह भी सच है कि मध्य पूर्व की समस्याएं बेहद पुरानी और जटिल हैं। इन समस्याओं का समाधान रातों-रात नहीं हो सकता। लंबी अवधि के लिए धैर्य और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी।