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Friday, 05 June 2026
समाचार

ट्रंप ने नेतन्याहू को अपशब्द कहे, लेबनान संघर्ष से परेशान

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Komal
संवाददाता
📅 04 June 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 618 views
ट्रंप ने नेतन्याहू को अपशब्द कहे, लेबनान संघर्ष से परेशान
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर स्वीकार किया है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी एक तीखी बातचीत हुई थी। यह बातचीत लेबनान में जारी सैन्य हमलों को लेकर थी। ट्रंप ने कहा कि वह इस तरह की लगातार सैन्य कार्रवाई से गहरी चिंता और परेशानी महसूस कर रहे थे। उन्होंने नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश दिया था कि इन सैन्य अभियानों को तुरंत रोका जाए।

यह प्रकरण अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया है जहां अमेरिका ने अपने सहयोगी इजराइल को सीधे सलाह दी है। ट्रंप ने मीडिया के सामने यह बात कही है जो दोनों देशों के बीच बढ़ती तनाव को दर्शाता है। लेबनान में हिंसा और विनाश से लेकर क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। हजारों नागरिकों की जानें जा चुकी हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि वह इजराइल की सैन्य नीति के बारे में सहमत नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार लेबनान की स्थिति खतरनाक हो गई है और इसमें और अधिक हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने नेतन्याहू को यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे लेकर बेहद चिंतित है।

इजराइल-लेबनान संघर्ष की पृष्ठभूमि

लेबनान और इजराइल के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव का इतिहास बहुत पुराना है। इस बार का संघर्ष विभिन्न कारणों से शुरू हुआ था जिसमें आतंकवादी गतिविधियां, सीमा पार हमले और राजनीतिक असहमति शामिल थीं। लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन को इजराइल एक आतंकवादी संगठन मानता है। इसी कारण से इजराइल ने लेबनान में कई बार सैन्य कार्रवाई की है।

इस वर्ष लेबनान में होने वाली हिंसा पिछली कई घटनाओं का परिणाम है। सीमा पार से आने वाले रॉकेटों और ड्रोन हमलों के जवाब में इजराइल ने भारी बमबारी की है। इससे लेबनानी नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है। हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

इस पूरी स्थिति में अमेरिका की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक देश है। अमेरिका इजराइल को हथियार, वित्तीय सहायता और सैन्य तकनीकें प्रदान करता है। लेकिन अब ट्रंप की ओर से आने वाले बयान बताते हैं कि अमेरिका भी लेबनान में जारी हिंसा से खतरे में है।

ट्रंप की चिंताओं का कारण क्या है

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि लेबनान में चल रहे युद्ध से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। इस क्षेत्र में अमेरिकी हित भी हैं और यहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति भी है। अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो पूरे क्षेत्र में बड़ा युद्ध शुरू हो सकता है। इससे न केवल नागरिकों को नुकसान होगा बल्कि अमेरिकी सैन्य जवानों के लिए भी खतरा बढ़ेगा।

ट्रंप की समझ में यह भी है कि इस तरह की हिंसा से आतंकवादी संगठनों को मजबूत होने का मौका मिलता है। जब बेगुनाह नागरिकों को मारा जाता है तो स्थानीय आबादी में गुस्सा बढ़ता है। यह गुस्सा आतंकवादियों को अपनी भर्ती के लिए मदद करता है। इसलिए ट्रंप का मानना है कि सैन्य समाधान के बजाय राजनीतिक समाधान खोजना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि इजराइल अपनी आक्रामक नीति को नरम करे। वह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से इस संकट को हल करना चाहते हैं। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में मध्य पूर्व में शांति के लिए कई कदम उठाए थे। वह फिर से इसी तरह की कोशिश करना चाहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और भविष्य की दिशा

ट्रंप के बयान के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियां विभिन्न रही हैं। कुछ देशों ने इसे सकारात्मक कदम माना है जबकि कुछ को लगता है कि यह कदम अधूरा है। यूरोपीय संघ ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर विभिन्न प्रस्ताव लाए गए हैं।

नेतन्याहू ने ट्रंप के बयान पर अभी सार्वजनिक रूप से कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन इजराइली सरकार के सूत्रों से पता चलता है कि वह अपनी सुरक्षा नीति को बदलने के लिए तैयार नहीं है। इजराइल के अनुसार यह सैन्य कार्रवाई आवश्यक है क्योंकि हिजबुल्लाह के पास परमाणु हथियार जैसे खतरनाक हथियार हो सकते हैं।

भविष्य में इस संकट का समाधान मुश्किल प्रतीत हो रहा है। दोनों पक्ष अपनी सख्त रुख बनाए हुए हैं। लेकिन ट्रंप के हस्तक्षेप से कम से कम यह उम्मीद बनी है कि राजनीतिक समाधान की दिशा में कुछ प्रयास हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह अपना पूरा जोर लगाकर इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए प्रयास करे। लेबनान के लोगों की जानें बचाना हर किसी का दायित्व है।