तुर्की की पाकिस्तान समर्थन नीति से 4300 करोड़ का नुकसान
तुर्की की अपनी विदेश नीति और पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण अब उसे भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। भारत के एक महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्णय के कारण तुर्की की बड़ी एविएशन कंपनी सेलेबी को लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर यानी करीब चार हजार तीन सौ करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यह घटना दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों का एक ठोस उदाहरण है।
सेलेबी कंपनी भारत में दो दशक से भी अधिक समय तक एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं का एक बहुत बड़ा और लाभदायक व्यवसाय संचालित कर रही थी। इस कंपनी ने भारतीय हवाई अड्डों पर अपना एक मजबूत नेटवर्क स्थापित किया था और यह सेवा क्षेत्र में अग्रणी थी। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सेलेबी की सुरक्षा क्लीयरेंस को रद्द करने के निर्णय ने पूरी स्थिति को बदल दिया।
भारत का सुरक्षा निर्णय और इसके कारण
भारतीय सुरक्षा संस्थानों ने सेलेबी की सुरक्षा क्लीयरेंस रद्द करने का फैसला विभिन्न सुरक्षा संबंधी चिंताओं के आधार पर लिया था। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा हित के मद्देनजर ऐसे निर्णय लिए जाते हैं जब किसी विदेशी कंपनी पर संदेह पैदा होता है। एविएशन सेक्टर भारत की महत्वपूर्ण अवसंरचना का हिस्सा है और इसलिए यहां सुरक्षा के मानदंड बहुत कड़े होते हैं।
तुर्की के साथ भारत के संबंधों में तनाव का एक प्रमुख कारण पाकिस्तान के प्रति तुर्की की सहानुभूतिपूर्ण नीति रही है। तुर्की ने कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का समर्थन किया है और इस्लामिक देशों के समूह में पाकिस्तान की ओर से सुर करने में कोई संकोच नहीं दिखाया है। यह भारत के लिए चिंता का विषय रहा है क्योंकि भारत के साथ पाकिस्तान के संबंध काफी जटिल और तनावपूर्ण हैं।
भारतीय नीति निर्माताओं का मानना था कि एविएशन सेक्टर में किसी संदिग्ध विदेशी कंपनी को काम करने देना एक बड़ा सुरक्षा जोखिम हो सकता है। हवाई अड्डों पर होने वाले संवेदनशील कामकाज के दौरान यदि कोई कंपनी भारत के विरोधी शक्तियों के साथ मिली हुई हो तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
सेलेबी कंपनी के लिए आर्थिक प्रभाव
सेलेबी कंपनी के लिए भारतीय बाजार बेहद महत्वपूर्ण था। भारत में इस कंपनी की कुल संपत्ति और व्यवसायिक मूल्यांकन लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर के करीब था। सुरक्षा क्लीयरेंस रद्द होने के बाद कंपनी भारत में अपना कोई भी काम नहीं कर सकती थी। इसका मतलब था कि उसके सभी अनुबंध रद्द हो जाएंगे, कर्मचारियों को निकाला जाएगा और भारत में उसका पूरा संचालन बंद हो जाएगा।
यह निर्णय सेलेबी के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हुआ। कंपनी के शेयरहोल्डर्स को भारी नुकसान हुआ और कंपनी की साख को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। भारत में बंद होने के बाद कंपनी का अंतर्राष्ट्रीय मूल्यांकन भी गिरा क्योंकि भारत जैसे बड़े बाजार में उसकी उपस्थिति महत्वपूर्ण थी।
कंपनी के कर्मचारियों को भी बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। भारत में सेलेबी के हजारों कर्मचारी काम करते थे और उन सभी को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। यह एक मानवीय और आर्थिक त्रासदी थी जो पूरी तरह इस राजनीतिक विवाद का परिणाम था।
तुर्की के लिए सीख और भविष्य के संबंध
यह घटना तुर्की के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि विदेश नीति बनाते समय हर देश को अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए। पाकिस्तान के साथ दोस्ती का मतलब यह नहीं हो सकता कि भारत जैसी बड़ी शक्ति के साथ अपने संबंधों को नुकसान पहुंचे।
भारत के लिए यह एक स्पष्ट संदेश भेजना था कि जो देश भी भारत के विरोधियों का समर्थन करेंगे उन्हें आर्थिक और राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत एक बड़ा बाजार है और यहां के सुरक्षा निर्णय किसी भी विदेशी कंपनी के लिए अंतिम हो सकते हैं।
भविष्य में तुर्की को यह सोचना होगा कि क्या पाकिस्तान के साथ की दोस्ती उसके हजारों करोड़ रुपये के व्यवसायिक नुकसान के लायक है। भारत और तुर्की के बीच संबंधों को सुधारने के लिए तुर्की को अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार करना होगा। आर्थिक विकास और रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना तुर्की के हित में है।
यह पूरी घटना आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जहां राजनीतिक फैसलों के आर्थिक परिणाम होते हैं। भारत ने साफ़ संदेश दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे उसके लिए किसी भी देश की कंपनी को सजा देनी पड़े।




