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Saturday, 06 June 2026
समाचार

ट्विशा मामले में 46 कॉल, CBI जांच की मांग

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Komal
संवाददाता
📅 21 May 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ट्विशा मामले में 46 कॉल, CBI जांच की मांग
📷 aarpaarkhabar.com

इंदौर में ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। बुधवार को इस संवेदनशील मामले में कई अहम घटनाक्रम सामने आए जिसने परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चिंता का माहौल बढ़ा दिया है। अदालत की ओर से दूसरी पोस्टमार्टम याचिका को खारिज किए जाने के बाद परिवार वालों की उम्मीदें अब सीएमओ के पत्र पर टिकी हैं।

यह मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में है और हर दिन नई जानकारियां सामने आ रही हैं। ट्विशा के परिवार ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सच्चाई सामने आने के लिए संपूर्ण जांच की आवश्यकता है। परिवार का मानना है कि मामले की गहराई को समझने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो की भूमिका महत्वपूर्ण है।

अदालत का फैसला और पोस्टमार्टम याचिका

बुधवार के दिन जिला अदालत में ट्विशा शर्मा के मामले पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने दूसरी पोस्टमार्टम की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले से परिवार निराश जरूर है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है। परिवार के वकीलों ने अदालत में यह तर्क दिया था कि मृत्यु के सही कारण का पता लगाने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम की जरूरत है।

पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कुछ संदिग्ध बातें सामने आई थीं जिसके कारण परिवार को संदेह है कि मौत का कारण जो बताया गया है वह सच नहीं हो सकता है। अदालत के इस फैसले के बाद परिवार के वकील ने कहा कि वे इसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। उनका मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

46 मोबाइल नंबरों का कॉल डाटा

ट्विशा के परिवार ने अपने आवेदन में 46 विभिन्न मोबाइल नंबरों का कॉल डाटा और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है। यह मांग इसलिए की गई है क्योंकि परिवार को संदेह है कि ये नंबर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकते हैं। ये नंबर ट्विशा की मृत्यु से संबंधित विभिन्न व्यक्तियों से जुड़े हो सकते हैं।

डिजिटल सबूत आजकल के न्यायिक मामलों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कॉल लॉग, मैसेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से किसी घटना के सच्चे कारण का पता चल सकता है। परिवार का कहना है कि इन 46 नंबरों के कॉल डाटा से ट्विशा की मृत्यु से पहले क्या हुआ था इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है। पुलिस को चाहिए कि ये डाटा सुरक्षित रखे और जांच में इसका उपयोग करे।

सरकारी एजेंसियों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि डिजिटल सबूत का कोई भी हिस्सा खो न जाए। अगर ये डाटा खो गया या नष्ट हो गया तो पूरी जांच में बाधा आ सकती है। इसी वजह से परिवार ने अदालत में आवेदन दायर करके इन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अपील की है।

CBI को जांच सौंपने की मांग

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को ट्विशा शर्मा के परिवार से मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार जांच को सीबीआई को सौंपने के लिए आवश्यक पत्र लिखेगी। यह घोषणा परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। सीएम की यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामले सौंपे जाने से न केवल जांच में पारदर्शिता आएगी बल्कि सच्चाई सामने आने की भी संभावना बढ़ेगी। सीबीआई के पास उन्नत तकनीकें और अनुभवी जांचकर्ता हैं जो ऐसे जटिल मामलों को सुलझाने में सक्षम हैं। परिवार और समाज की नजर अब इसी पर है कि सरकार अपने वचन को कब पूरा करेगी।

सीबीआई को यह काम सौंपे जाने से पहले राज्य पुलिस को भी सभी महत्वपूर्ण कागजात और सबूत तैयार करने होंगे ताकि जांच में कोई बाधा न आए। यह एक संवेदनशील मामला है और इसमें देरी नहीं करनी चाहिए।

ट्विशा शर्मा की मौत अभी भी एक रहस्य बनी हुई है और परिवार को न्याय दिलाना समाज की जिम्मेदारी है। अदालत के फैसलों, डिजिटल साक्ष्यों और सीबीआई की जांच से ही इस मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। परिवार के साहस और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा करनी चाहिए कि वह न्याय पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आशा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और सच्चाई सबके सामने आएगी।