उत्तर प्रदेश में आंधी बारिश से 96 मौतें
उत्तर प्रदेश में आई भीषण आंधी और बारिश ने पूरे प्रदेश में तबाही का दृश्य पेश किया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 96 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में यह तूफान अलग-अलग समय पर आया, लेकिन हर जगह भारी नुकसान हुआ है। बिजली के खंभे गिरे हैं, घर-मकान टूटे हैं और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। यह स्थिति पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
आंधी और बारिश की शुरुआत कल दोपहर में हुई थी। मौसम विभाग ने पहले ही इसकी चेतावनी दी थी, लेकिन इसकी तीव्रता सभी की उम्मीदों से कहीं अधिक रही। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई है। कहीं-कहीं तो ओले भी गिरे हैं। इस बार की आंधी की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। ऐसी तूफानी हवाओं में बड़े-बड़े पेड़ भी उखड़ गए और बिजली के खंभे धराशायी हो गए।
वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर में सबसे बड़ा नुकसान
प्रदेश में सबसे ज्यादा नुकसान वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर मंडल के क्षेत्रों में हुआ है। वाराणसी जिले में ही 28 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इस जिले में आंधी की गति सर्वाधिक रही। बस्तियों में मकान टूट गए, सड़कें टूट गईं और व्यापार को भारी नुकसान हुआ। प्रयागराज जिले में 24 लोगों की मौत हुई है। यहां भी स्थिति काफी गंभीर है। कानपुर मंडल के क्षेत्रों में भी 19 लोगों की मौत की खबर मिली है।
इसके अलावा मेरठ, आगरा, मथुरा, आजमगढ़, गोरखपुर और लखनऊ जिलों में भी काफी नुकसान हुआ है। लखनऊ शहर में भी कई स्थानों पर पेड़ गिरे और बिजली की समस्या उत्पन्न हुई। प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन नुकसान का आकलन अभी चल रहा है। हर जगह से दर्दनाक घटनाओं की खबरें आ रही हैं।
बुनियादी ढांचे को भारी क्षति
इस आंधी-बारिश में प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है। बिजली विभाग के अनुसार प्रदेश के कई इलाकों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। हजारों बिजली के खंभे गिर गए हैं। विद्युत विभाग के कर्मचारी रातभर मरम्मत में जुटे रहे हैं। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर शहरों में विस्तृत क्षेत्रों में बिजली नहीं है।
सड़कों और राजमार्गों को भी व्यापक नुकसान हुआ है। बड़े-बड़े पेड़ गिरकर रास्ते को रोक गए हैं। कई जगह सड़कों पर दरारें पड़ गई हैं और गड्ढे बन गए हैं। यातायात सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। ट्रेनों की गति कम की गई है और कुछ ट्रेनें रद्द भी की गई हैं। सड़क परिवहन भी बाधित हुआ है। इस कारण आवागमन में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
जन-जीवन भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्कूल-कॉलेज को बंद किया गया है। कई सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जमा हो गई है, जहां लोग सुरक्षा के लिए शरण ले रहे हैं। मलबे के ढेर लग गए हैं। खेत-खलिहान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। किसानों को फसलों का भारी नुकसान हुआ है।
राहत कार्य और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
यूपी सरकार ने इस आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और सभी जिलों में राहत कार्य तेजी से चलाने के आदेश दिए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दल को भी सक्रिय किया गया है। सेना और अर्द्धसैनिक बल भी बचाव कार्य में लगाए गए हैं।
हर जिले में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं जहां घायलों की सूचना दी जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वे सभी संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करें। घायलों को अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी पूरी करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
बचाव दल जमीन पर लगे हैं। वे मलबे के ढेर से लोगों को निकाल रहे हैं। अब तक सैकड़ों लोगों को बचाया जा चुका है। लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं। उनकी तलाश जारी है। खाने-पीने की व्यवस्था भी की जा रही है। दुर्घटना ग्रस्त क्षेत्रों में राहत शिविर लगाए गए हैं।
नुकसान का आकलन अभी जारी है। सरकार ने घोषणा की है कि क्षतिग्रस्त लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। प्रारंभिक मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभिन्न राहत संस्थाएं भी इस काम में मदद के लिए आगे आई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में स्थिति में कुछ सुधार की संभावना है। लेकिन अगले कुछ दिनों में बारिश जारी रह सकती है। इसलिए सावधानी बरती जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे घर में रहें और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलें।
यह आंधी-बारिश उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी प्राकृतिक आपदा साबित हुई है। इससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। सरकार, प्रशासन और जनता मिलकर इस संकट से उबरने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि कुछ समय में हालात सामान्य हो जाएंगे और पुनर्निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।




