होर्मुज में US-Iran तनाव, हेलफायर मिसाइल से जहाज रोका
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक नया अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि उसकी सेना ने गाम्बिया के झंडे तले पंजीकृत मालवाहक जहाज लियान स्टार को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया है। यह घटना तब घटी जब यह जहाज ईरान की ओर जा रहा था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज के मालिकों ने कई चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया था और अपने गंतव्य की ओर बढ़ता रहा।
यह घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहाँ से दैनिक आधार पर लाखों बैरल तेल गुजरता है। अमेरिका ने जो कदम उठाया है वह क्षेत्र में चल रहे समुद्री नाकेबंदी अभियान का सीधा हिस्सा है। अमेरिका की ओर से यह कार्रवाई ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का एक प्रयास दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की आधिकारिक जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक विस्तृत विज्ञप्ति जारी की जिसमें उसने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की यूएसएस प्रेयर ने लियान स्टार नामक जहाज को कई बार संदेश भेजने का प्रयास किया। जहाज को समुद्री रेडियो पर बार-बार चेतावनी दी गई कि वह ईरान की ओर न जाए। लेकिन जहाज के संचालकों ने इन सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और अपना सफर जारी रखा। यह व्यवहार अमेरिकी नजरिए से अत्यंत गंभीर था क्योंकि यह अमेरिकी कानून और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सीधा उल्लंघन था।
जब जहाज चेतावनियों को नहीं मानता है तो अमेरिका के पास सीमित विकल्प रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी सेना ने हेलफायर मिसाइल का प्रयोग किया और जहाज के इंजन को निष्क्रिय कर दिया। यह एक सर्जिकल स्ट्राइक का उदाहरण था जहाँ अमेरिका ने जहाज को पूरी तरह नष्ट किए बिना उसे रोकने का प्रयास किया। हेलफायर मिसाइलें अत्यधिक सटीक होती हैं और इनका प्रयोग करते समय कम नुकसान होता है। इस बार भी अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने अत्यंत सावधानी से अपना काम किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और तनाव की पृष्ठभूमि
होर्मुज जलडमरूमध्य सारे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यहाँ से विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग एक तिहाई भाग गुजरता है। इसका मतलब है कि यदि इस जलमार्ग में कोई व्यवधान आता है तो वह विश्व की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस जलमार्ग की सुरक्षा को अत्यंत गंभीरता से लेते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पिछले कई दशकों से चल रहा है। वर्तमान अमेरिकी प्रशासन ने ईरान पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के अंतर्गत ईरान को तेल निर्यात नहीं करने दिया जा रहा है। लेकिन ईरान और उससे जुड़े देश विभिन्न तरीकों से इन प्रतिबंधों को दरकिनार करने का प्रयास कर रहे हैं। कई जहाज तीसरे देशों के झंडे लगाकर ईरान को तेल और अन्य सामान पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
लियान स्टार जहाज भी ऐसा ही एक जहाज था। भले ही इसके पास गाम्बिया का झंडा था, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास सशक्त सबूत थे कि यह जहाज वास्तव में ईरान को ही सामान पहुंचाने जा रहा था। इसलिए अमेरिका ने इस जहाज को रोकने का निर्णय लिया।
अंतरराष्ट्रीय कानून और इस कार्रवाई की वैधता
यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या अमेरिका को किसी दूसरे देश के झंडे वाले जहाज को ऐसे तरीके से रोकने का अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार, प्रत्येक देश के अपने समुद्री इलाकों में कुछ अधिकार होते हैं। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है जहाँ सभी देशों के जहाज आ-जा सकते हैं। अमेरिका का दावा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के भीतर रहते हुए ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करने का अधिकार रखता है।
लेकिन ईरान और कई अन्य देश इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानते हैं। वे कहते हैं कि यदि अमेरिका किसी जहाज को रोकना चाहता है तो उसे पहले उसे एक बंदरगाह में लाना चाहिए और फिर उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। बीच में समुद्र में किसी जहाज को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय करना, उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
इस घटना के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और भी बढ़ गया है। व्यापारी जहाजों के मालिकों को अब इस इलाके में अपने जहाज भेजने में संकोच हो रहा है। बीमा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में जहाजों के लिए प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। यह सब कुछ इस बात का संकेत है कि होर्मुज में स्थिति कितनी गंभीर हो गई है।
आने वाले समय में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन यह निश्चित है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही रहेगा। दोनों पक्ष अपनी-अपनी नीतियों पर दृढ़ नजर आ रहे हैं। विश्व समुदाय को आशा है कि दोनों देश सुलह के रास्ते तलाशेंगे और इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आशा कम ही दिखाई दे रही है।




