पश्चिम एशिया संकट: 11.61 लाख भारतीय लौटे
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किया है। विदेश मामलात मंत्रालय (एमईए) की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने इस संकटपूर्ण समय में 11.61 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से अपने देश वापस लाया है। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जो भारत की संकट प्रबंधन क्षमता को दर्शाती है।
इराक से सीधे संबंधित एक महत्वपूर्ण घटना यह है कि हाल ही में इराकी जल क्षेत्र में फंसे 12 नाविकों को सफलतापूर्वक बचाया गया है। ये सभी नाविक भारतीय हैं और उन्हें मुंबई पहुंचाया गया है। इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार के लिए एक प्राथमिकता थी और इस मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है।
पश्चिम एशिया का क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक और सैन्य तनाव का केंद्र बना हुआ है। इसी कारण इस क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य व्यावसायिकों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई थी। ऐसे में भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और एक व्यापक निकासी अभियान का संचालन किया।
पश्चिम एशिया में भारतीयों की संख्या और उनका महत्व
पश्चिम एशिया एक ऐसा क्षेत्र है जहां लाखों भारतीय अपनी आजीविका के लिए काम करते हैं। तेल और गैस उद्योग, निर्माण क्षेत्र, स्वास्थ्य सेवा और अन्य कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारतीय कार्यबल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये भारतीय प्रवासी न केवल अपने परिवारों के लिए आजीविका अर्जित करते हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
संकट के समय इन प्रवासियों को सुरक्षित निकालना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होती है। विदेश मामलात मंत्रालय के इस निकासी अभियान को "ऑपरेशन संजीवनी" जैसी बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के साथ माना जा सकता है। 11.61 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित रूप से वापस लाना एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य था।
इन प्रवासियों में से कई ऐसे थे जो छोटे बच्चों के साथ थे, बुजुर्ग अपने साथ लाए गए थे, और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। ऐसे में उन्हें वापस लाना केवल एक सामान्य परिवहन का मामला नहीं था, बल्कि एक मानवीय मिशन था जिसे भारत सरकार ने बखूबी संभाला।
इराक से नाविकों की निकासी: एक विशेष अभियान
इराक से 12 नाविकों की सुरक्षित निकासी और उन्हें मुंबई तक पहुंचाना एक विशेष चिंता का विषय था। ये नाविक जहाजों पर काम करते हैं और सागर में फंसे हुए थे। समुद्री मार्ग से संबंधित इस मिशन को संभालना तकनीकी रूप से जटिल था क्योंकि पश्चिम एशिया के समुद्री इलाकों में भी सुरक्षा का खतरा बना हुआ था।
भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक दल ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समुद्र के रास्ते से इन नाविकों को सुरक्षित लाना एक जटिल ऑपरेशन था जिसमें अंतरराष्ट्रीय समन्वय की भी आवश्यकता थी। यह भारत की नौसेना क्षमता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाता है।
मुंबई में इन नाविकों के पहुंचने के बाद उन्हें विधिवत चिकित्सा जांच और परिवार के साथ मिलने की सुविधा दी गई। यह भारत सरकार की अपने नागरिकों के प्रति प्रतिबद्धता का सबूत है।
भारत सरकार की संकट प्रबंधन रणनीति
विदेश मामलात मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक सुविचारित रणनीति अपनाई थी। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
पहला, भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के माध्यम से सभी भारतीयों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया गया। दूसरा, एयरलाइंस और शिपिंग कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। तीसरा, विभिन्न देशों की सरकारों के साथ वार्ता की गई ताकि निकासी प्रक्रिया सुचारू रहे। चौथा, मेडिकल टीम तैयार की गई जो बीमार और घायलों की सहायता करे।
इस रणनीति की सफलता इसी बात से साफ झलकती है कि 11.61 लाख से अधिक लोगों को बिना किसी बड़ी घटना के सुरक्षित रूप से वापस लाया गया। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है जो भारत की राजनयिक और प्रशासनिक क्षमता को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति अभी भी विद्यमान है, लेकिन भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है। आने वाले समय में भी यदि किसी प्रकार की चुनौती उत्पन्न हो, तो भारत सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार है। यह निकासी अभियान भारत की शक्ति और उसके नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी का एक शानदार उदाहरण है।




