🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Saturday, 04 July 2026
समाचार

62 साल पहले रफी साहब का अप्रैल फूल गाना, फिल्म की कहानी

author
Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 11:43 AM ⏱ 1 मिनट 👁 890 views

62 साल बाद भी गूंजता है रफी साहब का 'अप्रैल फूल बनाया' गाना

जब भी 1 अप्रैल आता है, तो हर किसी के मन में एक खास धुन गूंजने लगती है - 'अप्रैल फूल बनाया तो उनको गुस्सा आया'। यह गीत आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना 62 साल पहले था। मोहम्मद रफी साहब की जादुई आवाज में गाया गया यह गाना 1964 की फिल्म 'अप्रैल फूल' का हिस्सा था, जो आज भी अप्रैल फूल डे के दिन सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

यह गाना केवल एक फिल्मी गीत नहीं था, बल्कि इसने भारत में अप्रैल फूल डे की परंपरा को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आइए जानते हैं इस क्लासिक फिल्म की पूरी कहानी।

62 साल पहले रफी साहब का अप्रैल फूल गाना, फिल्म की कहानी

फिल्म 'अप्रैल फूल' की कहानी

1964 में रिलीज हुई फिल्म 'अप्रैल फूल' एक हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म थी। इस फिल्म की कहानी उस दौर के सामाजिक माहौल को दर्शाती थी जब भारत में पश्चिमी त्योहारों का प्रचलन बढ़ रहा था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे अप्रैल फूल डे के दिन लोग एक-दूसरे को मूर्ख बनाने की कोशिश करते हैं।

कहानी में कई मोड़ थे जहां पात्र एक-दूसरे के साथ मजाक करते हैं, लेकिन अंततः सभी समस्याओं का हल हो जाता है। फिल्म का संदेश यह था कि हंसी-मजाक जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।

फिल्म की कास्ट और क्रू

यह फिल्म उस दौर के कुछ प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ बनी थी। हालांकि मुख्य स्टार कास्ट में कोई बड़े सुपरस्टार नहीं थे, फिर भी इसके गाने खासकर मोहम्मद रफी का गाया 'अप्रैल फूल बनाया' इतना लोकप्रिय हुआ कि आज तक लोग इसे याद करते हैं।

| विभाग | नाम |

--------------
संगीत निर्देशकशंकर जयकिशन
गायकमोहम्मद रफी
गीतकारहसरत जयपुरी
रिलीज वर्ष1964

गीत की लोकप्रियता का राज

मोहम्मद रफी की आवाज में गाया गया 'अप्रैल फूल बनाया तो उनको गुस्सा आया' गीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता थी। गीत के बोल इतने सहज और याद रखने लायक थे कि बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी इसे आसानी से गुनगुना सकते थे।

इस गीत की धुन भी बेहद कैची थी। शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने ऐसी धुन बनाई जो कानों में बसकर रह जाती थी। हसरत जयपुरी के लिखे गए बोलों में मासूमियत और चंचलता दोनों थी।

बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन

हालांकि 'अप्रैल फूल' कोई बड़ी बजट की फिल्म नहीं थी, फिर भी इसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। उस दौर में छोटी फिल्में भी अपने अच्छे संगीत और कहानी के दम पर सफल हो जाती थीं। इस फिल्म का गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग सिर्फ गाना सुनने के लिए सिनेमा हॉल जाते थे।

आज भी जिंदा है यह परंपरा

62 साल बाद भी जब 1 अप्रैल आता है, तो रेडियो स्टेशन, टीवी चैनल और अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह गाना बजाया जाता है। यूट्यूब पर इस गाने के लाखों व्यूज हैं और हर साल अप्रैल फूल डे पर इसके व्यूज में तेजी से बढ़ोतरी होती है।

आज के दौर में जब हिंदी सिनेमा की कई फिल्में भुला दी गई हैं, तब भी यह छोटी सी फिल्म और इसका गाना लोगों के दिलों में जिंदा है। यही है सच्ची कला की ताकत - समय के साथ इसकी चमक कम नहीं होती, बल्कि और भी निखरती जाती है।