होर्मुज खुलने से भारत को 3 बड़ी खुशखबरियां
होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना भारत के लिए बेहद शुभ समाचार साबित हुआ है। इस महत्वपूर्ण खबर के आते ही देश की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। कच्चे तेल की कीमतें जो पिछले कई महीनों से ऊंची रहकर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही थीं, अब गिरने लगी हैं। यह विकास भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था को कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। देश के जीडीपी विकास दर से लेकर महंगाई तक सभी कुछ तेल की कीमतों पर निर्भर करता है। पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब ही रहकर भारत के आयात बिल को बढ़ा रही थीं। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ रहा था। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने के बाद अब परिस्थिति बदलने लगी है।
होर्मुज खुलने का भारत पर पहला सकारात्मक प्रभाव
कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, यह बेहद सकारात्मक संकेत है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से विश्व का लगभग 30 प्रतिशत तेल परिवहन होता है। जब भी इस रास्ते में कोई समस्या आती है तो तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत को जो तेल की जरूरत है उसका एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इसलिए होर्मुज में कोई भी समस्या भारत को सीधे प्रभावित करती है।
इस बार होर्मुज के खुलने से तेल की आपूर्ति चेन सुचारू हो गई है। इससे तेल की कीमतों में कमी आई है। भारत को इससे तीन बड़ी खुशखबरियां मिली हैं जिनका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में दिखाई देगा। पहली खबर तो यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत का आयात बिल कम होगा। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिलेगी।
महंगाई में कमी और पेट्रोल की कीमतों में सुधार
दूसरी खुशखबरी यह है कि महंगाई में कमी आने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतें महंगाई का एक बड़ा कारण होती हैं। जब तेल सस्ता होता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी कम हो जाती हैं। इससे परिवहन का खर्च कम होता है, जिसका असर सभी चीजों की कीमतों पर पड़ता है। भारतीय आम जनता जो पिछले कई महीनों से महंगाई का सामना कर रही थी, उसे अब राहत मिलने की उम्मीद है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी का सीधा असर पाबंदी पर पड़ेगा। इससे मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आम आदमी जिसके लिए हर दिन का खर्च एक चुनौती बन गया था, वह अब बेहतर महसूस करेगा। यातायात के खर्च में कमी आने से व्यापार की लागत भी कम होगी, जिससे अंतत: उपभोक्ताओं को सस्ती चीजें मिलेंगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और भविष्य की संभावनाएं
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण खबर यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारत की जीडीपी विकास दर को सहायता मिलेगी। जब उत्पादन की लागत कम होती है तो व्यापार और उद्योग को बढ़ने का मौका मिलता है। इससे नई नौकरियां बनती हैं और आर्थिक गतिविधि बढ़ती है।
होर्मुज के खुलने से न केवल भारत को फायदा हो रहा है, बल्कि पूरी दुनिया को राहत मिल रही है। वैश्विक आपूर्ति चेन में सुधार हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आ रही है। भारत इसी स्थिर बाजार में अपने व्यापार को बढ़ा सकता है।
वर्तमान परिस्थितियों में भारत सरकार को भी सही दिशा दिख रही है। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो भारत अपने राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल कर सकेगा। सब्सिडी का दबाव कम होगा। सरकार को राजस्व बेहतर दिखेगा। इससे बेहतर बुनियादी ढांचे के विकास पर निवेश किया जा सकेगा।
भारतीय रुपये की कमजोरी भी इससे कुछ हद तक ठीक हो सकेगी। जब विदेशी मुद्रा में आय कम हो रही थी तो रुपये पर दबाव बढ़ रहा था। अब जैसे-जैसे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, रुपये की कीमत भी सुदृढ़ हो सकेगी।
कुल मिलाकर होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना भारत के लिए एक वरदान साबित हुआ है। आने वाले महीनों में जब इसका असर और भी स्पष्ट हो जाएगा तो भारत की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान मिलेगी। यह खबर आम भारतीय को भी आशान्वित करती है कि बेहतर दिन आने वाले हैं।




