तमिलनाडु चुनाव: DMK, AIADMK और TVK की टक्कर
तमिलनाडु में इतिहास बनने वाला है। आज 234 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में यह राज्य अपना राजनीतिक भविष्य तय करेगा। इस बार मुकाबला सिर्फ दो पार्टियों के बीच नहीं है। बल्कि यह एक त्रिमुखी जंग है जिसमें 75 साल पुरानी DMK, 50 साल की AIADMK और महज दो साल पुरानी TVK आमने-सामने हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव कितना महत्वपूर्ण है इसे समझने के लिए हमें राज्य के राजनीतिक इतिहास को देखना होगा। पिछले कई दशकों से तमिलनाडु में द्विध्रुवीय राजनीति चलती आई है। DMK और AIADMK के बीच की टक्कर ही राज्य का केंद्रीय मुद्दा रही है। लेकिन इस बार का चुनाव उस परंपरा को तोड़ देगा।
DMK की विरासत और वर्तमान ताकत
डीएमके की स्थापना सन् 1949 में हुई थी। इस पार्टी ने तमिल भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। करुणानिधि जैसे महापुरुषों ने इस पार्टी को शक्तिशाली बनाया। आज DMK को अपने पास केंद्रीय सत्ता का समर्थन भी है। पिछले चुनावों में DMK की जीत हुई थी और वह सत्ता में है।
डीएमके के पास राजनीतिक अनुभव की भरपूर जमीन है। इस पार्टी का संगठन तमिलनाडु के हर कोने तक फैला हुआ है। DMK के नेता एम.के. स्टालिन वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। वह पिछली बार के चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी। इस बार भी DMK अपनी जीत को दोहराना चाहता है।
लेकिन DMK को यह चुनाव आसान नहीं लगता। राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे हैं जो DMK सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं। साथ ही एक नई ताकत TVK का उदय भी DMK के लिए चिंता का विषय बन गया है।
AIADMK: अतीत की जड़ें और वर्तमान संकट
एआईएडीएमके की स्थापना 1972 में एम.जी. रामचंद्रन ने की थी। यह पार्टी तमिलनाडु में लोकप्रिय सिनेमा के साथ राजनीति को जोड़ने के लिए जानी जाती है। एमजीआर स्वयं एक बड़े फिल्म स्टार थे और उन्होंने सिनेमा की दुनिया से राजनीति में आकर राज्य पर राज किया।
जयललिता ने AIADMK को और मजबूत किया। उन्होंने भी एक अभिनेत्री के रूप में अपना कैरियर शुरू किया था। जयललिता के दौर में AIADMK अपने चरम पर पहुंची थी। लेकिन जयललिता की मृत्यु के बाद से ही AIADMK में विभाजन देखा गया। आंतरिक कलह और नेतृत्व को लेकर संघर्ष ने पार्टी को कमजोर किया।
वर्तमान समय में AIADMK का नेतृत्व एडप्पादी पलानीसामी के हाथों में है। पार्टी भीतर से बंटी हुई है। कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। AIADMK अब अपने पुराने दिनों का जलवा नहीं दिखा रही। यह इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। लेकिन फिर भी AIADMK के पास एक मजबूत जनाधार है जो उसे पूरी तरह खत्म होने से बचाता है।
TVK: नई शक्ति, नई आशा
तमिलनाडु विक्रम कज़ागम यानी TVK एक बिल्कुल नई पार्टी है। इसकी स्थापना मात्र दो साल पहले हुई थी। लेकिन TVK की नेतृत्व एक ऐसे व्यक्ति को कर रही है जो तमिलनाडु में बेहद लोकप्रिय है। विजय एक प्रसिद्ध फिल्म स्टार हैं। उन्होंने सिनेमा की दुनिया में अपने अभिनय से लोगों के दिलों में जगह बनाई है।
विजय ने जब राजनीति में आने की घोषणा की तो तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मच गई। उनकी पार्टी TVK को युवाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है। विजय की अपील राज्य के विभिन्न हिस्सों में दिखाई दे रही है। खासकर युवा वर्ग TVK की ओर आकर्षित हो रहा है।
TVK नई सोच और नई ऊर्जा लेकर आई है। इस पार्टी के पास भीतरी कलह नहीं है क्योंकि यह बिल्कुल नई है। TVK की राजनीति में 'तमिल फर्स्ट' और विकास जैसे मुद्दे हैं। विजय जन कल्याण और सामाजिक न्याय को लेकर भी मुखर हैं। यह सब मिलाकर TVK को एक गंभीर राजनीतिक ताकत बना गया है।
मुकाबले का असली मैदान
इस चुनाव में तीनों पार्टियां अलग-अलग किस्म की ताकतें लेकर मैदान में उतरी हैं। DMK के पास संगठन और सत्ता की ताकत है। AIADMK के पास अतीत की विरासत और परंपरागत मतदाता हैं। TVK के पास युवा ऊर्जा और फिल्म स्टार की लोकप्रियता है।
234 सीटों का यह चुनाव राज्य के भविष्य को तय करेगा। मतदाताओं को यह फैसला करना है कि वह किस दिशा में जाना चाहते हैं। क्या वह DMK की परंपरा को जारी रखना चाहते हैं? क्या AIADMK को दोबारा मौका देना चाहते हैं? या फिर TVK जैसी नई शक्ति को आजमाना चाहते हैं?
तमिलनाडु के मतदाताओं का यह निर्णय न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि तमिलनाडु दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। यहां का चुनाव परिणाम पूरे देश की राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करता है।
आज जब मतदान होगा तो तमिलनाडु की जनता अपनी पसंद दिखाएगी। डीएमके की दशकों की परंपरा हो, एआईएडीएमके की विरासत हो या फिर टीवीके की नई सोच हो, जनता का फैसला ही अंतिम होगा। तमिलनाडु के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आस्था ही इसे सबसे मजबूत राज्य बनाती है।




