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Tuesday, 21 July 2026
अपराध

सॉफ्टवेयर इंजीनियर का 100 करोड़ का ठगी साम्राज्य

author
Komal
संवाददाता
📅 12 May 2026, 6:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 663 views
सॉफ्टवेयर इंजीनियर का 100 करोड़ का ठगी साम्राज्य
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली पुलिस को साइबर अपराध की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने बेंगलुरु से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है जिसने 100 करोड़ रुपये का विशाल ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाला खड़ा किया था। इस इंजीनियर का नाम रवि राठौर है और उसने एक बड़ी MNC कंपनी में 30 लाख रुपये सालाना वेतन की नौकरी छोड़कर साइबर अपराध की दुनिया में कदम रखा था। यह मामला बताता है कि कैसे तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग करके एक व्यक्ति लाखों लोगों को ठग सकता है।

रवि राठौर का यह साम्राज्य केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। इस ठगी गिरोह का फैलाव कई राज्यों में था। पुलिस की जांच में पता चला कि राठौर ने एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क तैयार किया था जो विभिन्न शहरों में काम कर रहा था। इस गिरोह के सदस्य ठीक-ठाक तरीके से ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाते थे और असली निवेशकों को फंसाते थे।

अपराध का तरीका और तकनीक

रवि राठौर का ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाला बहुत परिश्रम से तैयार किया गया था। उसकी टीम ने नकली वेबसाइट बनाई थीं जो असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की तरह दिखती थीं। इन वेबसाइटों पर लोगों को आकर्षक रिटर्न का लालच दिया जाता था। जब कोई व्यक्ति इन साइटों पर पैसा निवेश करता था, तो शुरुआत में उसे कुछ लाभ दिखाई देते थे। लेकिन जब वह और अधिक पैसा लगाना चाहता था या अपने लाभ को निकालना चाहता था, तब पूरा खेल उजागर हो जाता था।

राठौर अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि का पूरा फायदा उठाता था। वह नकली वेबसाइटों को इतनी पेशेवारी से डिजाइन करता था कि सामान्य लोगों को कोई संदेह नहीं होता था। वेबसाइटों पर असली कंपनियों के लोगो और जानकारी का इस्तेमाल किया जाता था। कस्टमर सपोर्ट टीम को अच्छे तरीके से प्रशिक्षित किया गया था ताकि कोई भी निवेशक को संदेह न हो सके।

100 करोड़ का साम्राज्य कैसे बना?

यह समझना जरूरी है कि राठौर ने मात्र 30 लाख सालाना की नौकरी छोड़कर 100 करोड़ का साम्राज्य कैसे खड़ा किया। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, राठौर ने अपने 50 से अधिक सहयोगियों की एक टीम तैयार की थी। इस टीम में विभिन्न कौशल के लोग थे - कुछ तकनीकी विशेषज्ञ थे, कुछ बिक्री करने वाले थे, और कुछ लोगों का काम सिर्फ निवेशकों को फोन करना और लुभाना था।

राठौर की रणनीति बहुत सरल लेकिन प्रभावी थी। सबसे पहले वह सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में विज्ञापन देता था। ये विज्ञापन उन लोगों को टार्गेट करते थे जो पैसे कमाने का आसान तरीका ढूंढ रहे थे। फिर उसकी टीम इन लोगों से संपर्क करती थी और उन्हें ट्रेडिंग के बारे में सीखने के लिए आमंत्रित करती थी।

पुलिस की तहकीकात और गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल टीम ने महीनों की गहन जांच के बाद राठौर तक पहुंचने में सफलता पाई। कई पीड़ितों की शिकायतें आने के बाद पुलिस ने एक विशेष टास्क फोर्स गठित की। इस टीम ने ऑनलाइन लेन-देन के रिकॉर्ड, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्य का विश्लेषण किया।

तहकीकात में पता चला कि राठौर दिल्ली में रहता था लेकिन अक्सर बेंगलुरु में छुप जाता था। जब पुलिस को पक्का संकेत मिल गया, तो उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया। राठौर के पास से पुलिस को कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड ड्राइव मिली जिनमें हजारों पीड़ितों की जानकारी थी।

राठौर की गिरफ्तारी के बाद उसकी टीम के अन्य सदस्यों को भी पकड़ा जाने लगा। सभी को एक अंतर-राज्यीय ठगी गिरोह के सदस्य के रूप में गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह मामला साइबर अपराध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि यह दिखाता है कि पुलिस किस तरह बड़े साइबर अपराधियों को पकड़ सकती है।

इस मामले ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। शिक्षित और कुशल लोग जब अपनी प्रतिभा का गलत इस्तेमाल करते हैं तो वे बहुत बड़ा नुकसान कर सकते हैं। साथ ही, यह मामला साइबर जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाता है। आम जनता को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश से संबंधित धोखाधड़ी के बारे में अधिक सावधान रहना चाहिए। किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसे सत्यापित करना चाहिए और SEBI या अन्य नियामक निकायों से पूछताछ करनी चाहिए। दिल्ली पुलिस का यह कदम ऑनलाइन ठगों के खिलाफ एक मजबूत संदेश भेजता है।