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Tuesday, 19 May 2026
टेक

हाईवे दुर्घटनाओं में जान बचाने की योजना: 10 मिनट में एंबुलेंस

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Komal
संवाददाता
📅 13 May 2026, 6:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 368 views
हाईवे दुर्घटनाओं में जान बचाने की योजना: 10 मिनट में एंबुलेंस
📷 aarpaarkhabar.com

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश के हाईवे पर होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के समय एंबुलेंस को यथाशीघ्र मरीजों तक पहुंचाना है। वर्तमान में कई इलाकों में एंबुलेंस 20 से 30 मिनट में दुर्घटनास्थल तक पहुंचता है, जो जानलेवा साबित हो रहा है। एनएचएआई इस रिस्पांस टाइम को घटाकर मात्र 10 मिनट करने का लक्ष्य रख रहा है।

यह एक ऐतिहासिक कदम है जो भारतीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्घटना के बाद पहले 10 मिनट गोल्डन आवर कहलाते हैं। इस अवधि में यदि मरीज को सही समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। एनएचएआई की यह योजना इसी सिद्धांत पर आधारित है।

एनएचएआई ने की विस्तृत पहचान

एनएचएआई के अधीन 80 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में से लगभग 16 हजार किलोमीटर ऐसे हिस्से हैं जहां दुर्घटनाओं की आशंका सबसे अधिक है। इन क्षेत्रों की पहचान के लिए एनएचएआई ने वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। इसमें पिछले कई वर्षों के दुर्घटना डेटा, सड़क की भौगोलिक स्थिति, यातायात घनत्व और मौसमी कारकों का विश्लेषण शामिल है।

खतरनाक क्षेत्रों की इस पहचान में 278 ऐसे स्थान भी शामिल हैं जहां एंबुलेंस सेवा की स्थिति बेहद दयनीय है। इन जगहों पर दुर्घटना के बाद निकटतम अस्पताल तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट का समय लग जाता है। कुछ दूरदराज के इलाकों में तो यह समय एक घंटे तक भी जा सकता है। ऐसे में बहुत से मरीज सड़क पर ही दम तोड़ देते हैं।

10 मिनट का लक्ष्य: कैसे होगा संभव?

एंबुलेंस रिस्पांस टाइम को 10 मिनट में लाने के लिए एनएचएआई ने एक बहु-आयामी योजना तैयार की है। इस योजना में राजमार्ग के किनारे स्ट्रैटेजिक पॉइंट्स पर एंबुलेंस स्टेशन स्थापित करना शामिल है। इन स्टेशन्स को इस तरह से रखा जाएगा कि कोई भी दुर्घटना स्थल 10 किलोमीटर की परिधि में आए।

यह योजना तकनीकी उन्नति पर भी केंद्रित है। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, स्वचालित एलर्ट सिस्टम और बेहतर संचार नेटवर्क को लागू किया जाएगा। दुर्घटना होते ही यह सिस्टम स्वचालित रूप से निकटतम एंबुलेंस को अवगत करेगा। इसके अलावा, पुलिस, फायर सर्विस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के बीच समन्वय बेहतर किया जाएगा।

एनएचएआई ने राज्य सरकारों और स्वास्थ्य विभागों के साथ भागीदारी करने की भी योजना बनाई है। स्थानीय स्तर पर छोटे हेल्थ पोस्ट्स और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी होंगे जो दुर्घटनाग्रस्तों को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा दे सकें।

ड्राइवरों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण

एनएचएआई की योजना केवल एंबुलेंस तक सीमित नहीं है। इसमें ड्राइवरों को सुरक्षा प्रशिक्षण देना भी शामिल है। राजमार्ग पर तेज गति, ओवरटेकिंग, और सही ड्राइविंग तकनीकों के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। हाईवे पर पहली बार एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली लागू की जाएगी।

ड्राइवरों को सड़क सुरक्षा के मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बेल्ट पहनना, हेलमेट का प्रयोग, और सही गति सीमा का पालन करना ये सभी बातें जोर दी जाएंगी। एनएचएआई द्वारा राजमार्ग के विभिन्न बिंदुओं पर सड़क सुरक्षा शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्यान्वयन अगले कुछ महीनों में शुरू हो जाएगा। सबसे पहले सबसे दुर्घटना-प्रवण 278 स्थानों पर काम किया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे यह व्यवस्था पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लागू की जाएगी। एनएचएआई अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से हर साल हजारों जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। भारतीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।