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Tuesday, 19 May 2026
राजनीति

PM की अपील पर 5 राज्यों में ईंधन बचाने की कार्रवाई

author
Komal
संवाददाता
📅 13 May 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 698 views
PM की अपील पर 5 राज्यों में ईंधन बचाने की कार्रवाई
📷 aarpaarkhabar.com

देश में ऊर्जा संकट की बढ़ती चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव को देखते हुए सभी राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों से ईंधन के संरक्षण और बचत के लिए एक महत्वपूर्ण अपील की थी। इस अपील का असर अब बीजेपी द्वारा शासित पाँच प्रमुख राज्यों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली की सरकारें अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने लगी हैं। इन राज्यों ने अपने सरकारी कार्यक्रमों और दौरों को सीमित करने, काफिलों को छोटा करने और विदेश दौरों को स्थगित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

प्रधानमंत्री की यह अपील केवल एक सामान्य सुझाव नहीं था, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी थी। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में संभावित व्यवधान के कारण भारत को भी ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान देना पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में सभी राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संसाधनों का दुरुपयोग न करें और ईंधन की बचत को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कड़े कदम

उत्तर प्रदेश की सरकार ने अपने मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों को काफी हद तक छोटा कर दिया है। पहले जहाँ काफिलों में आठ से दस गाड़ियाँ होती थीं, वहीं अब इसे चार या पाँच गाड़ियों तक सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अनावश्यक यात्राएँ न करें और जहाँ संभव हो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करें।

राजस्थान सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक परिपत्र जारी किया है जिसमें सभी सरकारी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने आवश्यक कार्यक्रमों को छोड़कर अन्य सभी सरकारी कार्यक्रमों को स्थगित कर दें। इसके साथ ही, विदेश दौरों को भी अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राजस्थान सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित में उठाया जा रहा है।

मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली की पहल

मध्य प्रदेश की सरकार ने भी इसी तर्ज पर कार्रवाई की है। राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय से एक आदेश जारी किया गया है जिसमें सभी सरकारी विभागों और एजेंसियों को ईंधन की बचत के उपायों को अपनाने का निर्देश दिया गया है। सरकारी गाड़ियों के उपयोग को केवल आवश्यक कार्यों तक सीमित किया जाना है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को प्राथमिकता दें।

गुजरात, जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सबसे मजबूत पकड़ है, वहाँ भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों और दौरों को कम खर्चीले तरीकों से संचालित करने का निर्देश दिया है। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देशों में कहा गया है कि विदेश दौरों को केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही अनुमति दी जाएगी।

दिल्ली सरकार भी इसी नीति का अनुसरण कर रही है। राजधानी की सरकार ने अपने सभी विभागों को ईंधन की बचत के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने को कहा है। सरकारी कार्यालयों में पार्किंग की सुविधाएँ कम की जा रही हैं ताकि कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें। दिल्ली की सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी सरकारी आयोजनों में विलासिता को कम किया जाए।

व्यापक असर और भविष्य की चिंताएँ

इन पाँचों राज्यों की ओर से जारी किए गए निर्देशों से यह स्पष्ट हो जाता है कि देश में ऊर्जा संकट की स्थिति कितनी गंभीर है। सरकारें अब यह समझ गई हैं कि ईंधन की बचत केवल एक विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक आवश्यकता है। भारत की अर्थव्यवस्था तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, और वैश्विक बाजार में कीमतों की बढ़ोतरी सीधे देश के राजकोष को प्रभावित करती है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील का सकारात्मक असर यह भी है कि यह सरकारी स्तर पर एक मिसाल स्थापित कर रहा है। जब सरकार स्वयं ईंधन की बचत के लिए कठोर कदम उठाती है, तो आम जनता को भी यह संदेश जाता है कि ऊर्जा संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, यह नीति सरकारी खर्चों को कम करने में भी सहायक साबित होगी।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये कदम पर्याप्त हैं। वे कहते हैं कि केवल काफिलों को छोटा करना और विदेश दौरों को स्थगित करना काफी नहीं है। सरकार को अधिक व्यापक ऊर्जा संरक्षण नीति का निर्माण करना चाहिए। इसमें विकल्प ईंधन की ओर बढ़ना, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना शामिल होना चाहिए।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का असर देश भर में दिखने लगा है। बीजेपी शासित राज्यों ने इस दिशा में पहल दिखाई है, और आशा है कि अन्य राज्यों की सरकारें भी जल्द ही इसी तर्ज पर कदम उठाएँगी। यह संकट मोमेंट है जब देश को एकजुट होकर ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।