खाने का तेल जहर बन रहा, WHO मानक फेल
देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। विदेशों से आयात किए जा रहे खाने के तेलों में WHO के मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री की ओर से भी अपील जारी की गई है कि देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए जाएं। सरकार के डेटा और चिकित्सकों की रिपोर्ट दोनों ही यह संकेत दे रहे हैं कि भारतीय बाजार में जहर बन चुका है खाने का तेल।
विदेशी तेलों के भारी आयात के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने पूरे देश में स्वास्थ्य को लेकर एक गहरी चिंता पैदा कर दी है। इन आयातित तेलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी पाम ऑयल की है। यह पाम ऑयल जिसे विशेषज्ञ एक 'टाइम बम' से कम नहीं मानते हैं। भारतीय चिकित्सकों ने इस तेल को बेहद नुकसानदायक बताया है और यह कहा है कि इसके नियमित सेवन से हृदय रोग, मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
विदेशी तेलों का बढ़ता आयात और सेहत का संकट
पिछले पांच सालों में भारत में विदेशी तेलों का आयात अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। सोयाबीन ऑयल, पाम ऑयल और अन्य सस्ते तेलों की खपत में लगातार इजाफा हुआ है। ये तेल भारतीय बाजार में इसलिए अधिक आ रहे हैं क्योंकि ये सस्ते होते हैं और खाद्य उद्योग इन्हें बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है। लेकिन इस सस्ताई की कीमत हमारा स्वास्थ्य दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन WHO ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि खाने के तेल में ट्रांस फैट की मात्रा सर्वनिम्न होनी चाहिए। लेकिन भारत में आयात किए जा रहे अधिकांश तेल इन मानकों को पूरा नहीं करते। पाम ऑयल के मामले में यह स्थिति और भी गंभीर है। यह तेल जो मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है, प्राकृतिक रूप से संतृप्त वसा से भरपूर होता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण की ओर से जो नमूने लिए गए हैं, उनमें से कई में ट्रांस फैट की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। यह एक ऐसी खोज है जिसके बाद हर नागरिक को अपने रसोई घर में रखे तेल के बारे में सोचने पर मजबूर होना चाहिए। लाखों परिवार प्रतिदिन इसी तेल का इस्तेमाल करते हैं, बिना जाने कि वे अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं।
डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी और स्वास्थ्य के खतरे
देश के प्रमुख चिकित्सकों ने पाम ऑयल और इसी तरह के सस्ते विदेशी तेलों के सेवन को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कार्डियोलॉजिस्ट और पोषण विशेषज्ञ एक स्वर से कह रहे हैं कि इन तेलों का नियमित सेवन हृदय रोगों का प्रमुख कारण बन रहा है। भारत में हृदय रोगों की घटनाओं में पिछले दस सालों में जो खतरनाक तरीके से वृद्धि हुई है, उसमें खाने के तेलों की गुणवत्ता में गिरावट की बड़ी भूमिका है।
एक अनुसंधान में यह पाया गया है कि जो परिवार नियमित रूप से पाम ऑयल का इस्तेमाल करते हैं, उनमें बुजुर्गों में स्ट्रोक का खतरा 35 प्रतिशत तक अधिक होता है। बच्चों में मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं, और विशेषज्ञ इसके पीछे खाने के तेलों की खराब गुणवत्ता को एक प्रमुख कारण मान रहे हैं। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन क्षमता में कमी के मामलों में भी ऐसे तेलों का असर देखा जा रहा है।
चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से पाम ऑयल में LDL कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे 'बुरा कोलेस्ट्रॉल' माना जाता है। यह धमनियों में जमा होकर उन्हें कठोर बना देता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा आती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चलती है, लेकिन कुछ सालों बाद गंभीर हृदय रोग का कारण बन सकती है।
प्रधानमंत्री की अपील और सरकार की जिम्मेदारी
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री ने खाद्य सुरक्षा और पोषण को लेकर एक व्यापक अपील जारी की है। उन्होंने कहा है कि खाद्य उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना होगा और भारतीय उपभोक्ताओं को केवल उच्च गुणवत्ता के तेल ही उपलब्ध कराने होंगे। सरकार के स्वास्थ्य और खाद्य मंत्रालय को भी कड़े नियम बनाने हैं और आयातित तेलों की कड़ी जांच करनी होगी।
सरकार की ओर से एक नई नीति तैयार की जा रही है जिसमें विदेशी तेलों के आयात पर प्रतिबंध और घरेलू तेल उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। सरसों, मूंगफली, नारियल जैसे भारतीय स्रोतों से तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही, खाद्य सुरक्षा एजेंसी को अधिक सख्त होना होगा और बाजार में मिलने वाले हर तेल की गुणवत्ता की जांच करनी होगी।
यह अपील केवल सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योग और आम नागरिकों के लिए भी है। उद्योग को अपनी लालच पर नियंत्रण करना होगा और जनता के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। आम नागरिकों को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत होना चाहिए और खाने के तेल की गुणवत्ता के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
भारत में खाने का तेल एक ऐसी चीज है जो हर रसोई में रोज इस्तेमाल होती है। इसकी गुणवत्ता में कोई भी समझौता राष्ट्र के भविष्य के साथ समझौता है। अगर आज सही कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसलिए जरूरी है कि सरकार, उद्योग और नागरिक सब मिलकर इस समस्या का समाधान करें और भारत को जहर मुक्त तेल का देश बनाएं।




