रूस ने यूक्रेन पर 800 ड्रोन अटैक, 6 की मौत
शांति की मेज पर दावों की बिसात बिछी है, लेकिन जमीन पर रूस के 800 ड्रोन मौत का तांडव मचा रहे हैं। जब तक कूटनीति और जमीनी हकीकत एक धरातल पर नहीं आते, तब तक शांति केवल एक भ्रम बनी रहेगी। रूस ने एक बार फिर यूक्रेन के कई इलाकों में भीषण ड्रोन हमले किए हैं जिससे आम नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। इस हमले में कम से कम छह लोगों की जान चली गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है।
कीव में बैठे यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूसी सेना ने रात भर के समय आठ सौ ड्रोन की बमबारी की। यह हमला पूरी तरह से असंगठित और बेरहम तरीके से किया गया। राजधानी कीव के अलावा खार्किव, ओडेसा और डोनेत्स्क जैसे प्रमुख शहरों में भी ड्रोन से हमले के निशान देखने को मिले हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि आवासीय इलाकों, बाजारों और सार्वजनिक सेवाओं के केंद्रों को निशाना बनाया गया है।
रूस के ड्रोन हमलों की बढ़ती संख्या
पिछले कुछ महीनों में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जाने वाले ड्रोन हमलों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि रूस अपनी सेना को मजबूत करने के लिए ड्रोन तकनीक पर अधिक निर्भर हो गया है। इन ड्रोन हमलों से यूक्रेन की बुनियादी ढांचा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। बिजली की आपूर्ति, पानी की सुविधा और सड़कों का जाल तबाह हो चुका है।
यूक्रेनी सेना के प्रवक्ता ने बताया कि इस बार के हमले में 800 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था जो अब तक का सबसे बड़ा हमला है। रूस ने ईरान से प्राप्त ड्रोन और अपने स्वदेशी ड्रोन दोनों का इस्तेमाल किया है। यह हमला सुबह के चार बजे शुरू हुआ और लगभग पांच घंटे तक चलता रहा। इस दौरान लोग अपने घरों में छिपे रहे और सुरक्षा अलर्ट लगातार बजता रहा।
शांति वार्ता और जमीनी हकीकत में खाई
मॉस्को में शांति वार्ता के समय यह हमला एक बड़ा झटका है। विश्व के कई देश यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को समाप्त करने की कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन रूस का यह कदम दिखाता है कि वह सैन्य कार्रवाई को बंद करने के लिए तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस हमले की कड़ी निंदा कर रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इस हमले को युद्ध अपराध करार दिया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध के सभी नियमों का उल्लंघन है। अमेरिका, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने भी रूस के इस कार्य की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा है कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
बर्बादी का दृश्य और नागरिकों की पीड़ा
कीव के कई इलाकों में आवासीय इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं। अस्पतालों में घायलों की भीड़ है। डॉक्टर दिन रात मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं। कई लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं और बचाव दल उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं। बिजली कट जाने से अंधकार में पूरा शहर डूब गया है। लोगों को पानी और खाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
यूक्रेन के पश्चिमी भागों में तो स्थिति अभी भी नियंत्रण में है लेकिन पूर्वी हिस्सों में जहां सीधी लड़ाई चल रही है, वहां की हालत बहुत गंभीर है। लोगों ने अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की ओर जाना शुरू कर दिया है। शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यूरोप के कई देश यूक्रेनी शरणार्थियों को अपने यहां शरण दे रहे हैं।
यह हमला साफ करता है कि रूस अभी भी आक्रामक मुद्रा में है। हालांकि मॉस्को शांति की बातें कर रहा है, लेकिन उसके सैन्य कार्रवाई से पता चलता है कि वह अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। यूक्रेन के लिए यह स्थिति बहुत गंभीर है। देश के संसाधन समाप्त हो रहे हैं और जनता मानसिक और शारीरिक रूप से थक गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और शांति स्थापित करने के लिए दबाव डालना चाहिए। केवल सैन्य समाधान से यह समस्या हल नहीं होगी। दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लौटना होगा और एक स्थायी समझौते पर पहुंचना होगा जिससे आम जनता को राहत मिल सके।




