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Tuesday, 14 July 2026
राजनीति

असम में UCC लागू करने की तैयारी, CM हिमंता का बड़ा फैसला

author
Komal
संवाददाता
📅 14 May 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
असम में UCC लागू करने की तैयारी, CM हिमंता का बड़ा फैसला
📷 aarpaarkhabar.com

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विधानसभा चुनावों में दूसरी बार जीत दर्ज करते ही समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह एक ऐसा कदम है जिसकी चर्चा सरमा कई सालों से कर रहे हैं। अब जब उन्हें जनता का मजबूत जनादेश मिल गया है, तो वह इस महत्वपूर्ण कानूनी सुधार को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ दिख रहे हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से बाल विवाह और बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ मुखर रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि असमिया संस्कृति में किसी व्यक्ति की तीन या अधिक पत्नियां रखना कहीं भी प्रतिबिंबित नहीं होता है। यह परंपरा न तो असम की है और न ही यह किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य होनी चाहिए। इसी विचारधारा के साथ वह अब एक समान नागरिक संहिता को लागू करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

असम में UCC की आवश्यकता

भारत के संविधान में समान नागरिक संहिता की बात की गई है, लेकिन अभी तक देश के अधिकांश राज्यों में यह लागू नहीं हुई है। असम एक ऐसा राज्य है जहां विभिन्न धार्मिक समुदाय रहते हैं और विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में अलग-अलग कानून लागू होते हैं। यह विविधता कभी-कभी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है।

समान नागरिक संहिता लागू करने से सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामलों में एक समान कानून होगा। इससे महिलाओं को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने में मदद मिलेगी। असम के मुख्यमंत्री का मानना है कि यह कदम राज्य में सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देगा।

बहुविवाह की प्रथा विशेषकर कुछ समुदायों में अभी भी प्रचलित है। इससे न केवल महिलाएं पीड़ित होती हैं बल्कि पूरा परिवार टूट जाता है। जब पहली पत्नी को दूसरी या तीसरी पत्नी के बारे में पता चलता है, तो परिवार में व्यापक कलह होती है। बच्चों की परवरिश भी प्रभावित होती है और उनका मानसिक विकास बाधित होता है। हिमंता सरमा ऐसी परिस्थितियों को रोकना चाहते हैं।

UCC के कार्यान्वयन की चुनौतियां

हालांकि हिमंता बिस्वा सरमा के इरादे नेक हैं, लेकिन असम में UCC को लागू करना एक बेहद जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। राज्य में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समुदाय रहते हैं। हर समुदाय की अपनी परंपराएं और धार्मिक विश्वास हैं। जब भी किसी कानून में धार्मिक मामलों को छेड़ा जाता है, तो विरोध और विवाद पैदा होने की संभावना होती है।

अलगतववादी तत्व और कुछ धार्मिक संगठन UCC के खिलाफ प्रचार कर सकते हैं। उन्हें लग सकता है कि उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला हो रहा है। इसलिए सरकार को बेहद सावधानी के साथ इस कानून को तैयार करना होगा। कानून इस तरह का होना चाहिए कि वह सभी को न्याय दे और किसी के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन न करे।

दूसरा मुद्दा यह है कि UCC को लागू करने के लिए पुलिस, न्यायालय और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत होना चाहिए। कानून केवल कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी लागू होना चाहिए। असम के दूरदराज इलाकों में, विशेषकर गांवों में, महिलाओं को इस कानून के बारे में जागरूकता देनी होगी।

भविष्य की संभावनाएं

अगर हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार असम में UCC को सफलतापूर्वक लागू कर सकती है, तो यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा। यह दिखाएगा कि किसी बहुधार्मिक राज्य में भी समान नागरिक संहिता को लागू किया जा सकता है। इससे अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कानूनों को लागू करने का रास्ता खुल जाएगा।

महिलाओं के अधिकारों की बात करें तो UCC लागू होने से उन्हें वास्तविक समानता मिलेगी। चाहे किसी भी धर्म की महिला हो, विवाह, तलाक और संपत्ति के मामले में उसे समान अधिकार मिलेंगे। बाल विवाह पर कठोर कानूनी प्रतिबंध लगेंगे। बहुविवाह को अवैध घोषित किया जाएगा।

हिमंता बिस्वा सरमा का यह कदम समाज में एक नई सोच लाने का प्रयास है। वह चाहते हैं कि असम एक आधुनिक, प्रगतिशील राज्य बने जहां सभी को बराबर अधिकार मिले। यूनिफॉर्म सिविल कोड इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि इसके लिए बहुत सावधानी, संवेदनशीलता और समाज के विभिन्न वर्गों से सहमति की जरूरत होगी। यदि सरकार इसे सही तरीके से अंजाम दे, तो असम एक उदाहरण बन सकता है।