दिल्ली में महंगे ईंधन से घर का बजट झुलसेगा
दिल्ली में ईंधन के दामों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों की जेब झनझनाने लगी है। महंगे पेट्रोल और डीजल के कारण न केवल वाहन चलाने में खर्च बढ़ रहा है, बल्कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। नौकरीपेशा लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं क्योंकि उनके लिए दैनिक आवागमन महंगा हो गया है। सीएनजी चालकों पर भी अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
महंगाई अब केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रही है। ईंधन की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर ढुलाई लागत को बढ़ाती हैं। जब ढुलाई महंगी होती है तो राशन, फल-सब्जियां, दूध, दही और अन्य दैनिक आवश्यक चीजें भी महंगी हो जाती हैं। इसका सीधा असर आम आदमी की किराना की टोकरी पर दिखता है। रसोई से लेकर सड़क तक महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है।
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में रहने वाले परिवार अपना मासिक बजट पुनः बनाने के लिए मजबूर हो गए हैं। जो लोग पहले महीने में बाहर खाना खाने की योजना बनाते थे, अब वह भी छोड़ देना पड़ रहा है। घर का बजट अब इतना कसा हुआ है कि किसी भी अनावश्यक खर्च की गुंजाइश नहीं बची है।
नौकरीपेशा लोग सबसे अधिक प्रभावित
दिल्ली में काम करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोग इस महंगाई का सबसे बड़ा शिकार बन गए हैं। जो कर्मचारी मेट्रो, ऑटो या अपने दो पहिया वाहन से ऑफिस जाते हैं, उनके परिवहन का खर्च दोगुना हो गया है। पहले जो आदमी महीने में पेट्रोल पर तीन-चार हजार रुपये खर्च करता था, अब वह पांच-छः हजार खर्च करने के लिए मजबूर है।
यह सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं है। ऑफिस जाते समय चाय-नाश्ते का खर्च भी बढ़ गया है। छोटी-मोटी चीजों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि महीने के अंत तक बचत करना मुश्किल हो गया है। नौकरीपेशा लोग अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और भविष्य के लिए बचत करना चाहते हैं, लेकिन महंगाई के इस दौर में यह स्वप्न देखना भी मुश्किल हो रहा है।
ऑफिस जाने वाले युवा कर्मचारी अब कारपूलिंग का विकल्प अपना रहे हैं। कई लोग घर से ऑफिस आने-जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करने लगे हैं। दूसरे शहरों में नौकरी करने का विचार छोड़ देने के लिए मजबूर हो रहे हैं क्योंकि परिवहन का खर्च उनकी तनख्वाह का एक बड़ा हिस्सा निगल जाता है।
सीएनजी चालकों पर बढ़ता दबाव
दिल्ली में ऑटो रिक्शा और कैब चालक दिन-रात परिश्रम करके अपना जीवन चलाते हैं। लेकिन सीएनजी के दामों में लगातार बढ़ोतरी से उनकी आय सीधे प्रभावित हो रही है। पहले जो चालक एक दिन में दस-बारह सौ रुपये की बचत कर लेते थे, अब वह सिर्फ पांच-छः सौ रुपये ही बचा पाते हैं।
सीएनजी के दाम बढ़ने से ऑटो चालकों की किराया वृद्धि की मांग बढ़ी है। लेकिन यातायात विभाग और सरकार इस पर सख्ती बरत रहे हैं। नतीजतन, चालकों को अपनी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता। कई चालक तो इस काम को छोड़कर दूसरी नौकरी तलाश कर रहे हैं। यह स्थिति बहुत ही गंभीर है क्योंकि ये चालक हजारों परिवारों का पालन-पोषण करते हैं।
कैब एग्रीगेटर्स के ड्राइवर भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। सीएनजी की कीमत बढ़ने से उनकी आय घट गई है, जिससे परिवार के खर्च को पूरा करना मुश्किल हो गया है। कई ड्राइवर तो महीने के अंत तक कर्ज लेकर गुजारा कर रहे हैं।
रसोई से सड़क तक महंगाई का असर
ईंधन की कीमतें बढ़ने का सबसे प्रत्यक्ष असर खाद्य पदार्थों पर दिखाई दे रहा है। सब्जियां, फल, दूध, दही, मांस, अंडे और अनाज सभी की कीमतें बढ़ गई हैं। रसोई का बजट हर महीने बढ़ता जा रहा है। परिवार के सदस्यों को पेट भरकर खाना देना भी मुश्किल हो गया है।
बेकरी उत्पाद, तेल, मैदा, चीनी और नमक जैसी जरूरी चीजें भी महंगी हो गई हैं। छोटे-मोटे खर्चों को मिलाकर देखें तो घर का बजट गंभीर संकट में आ गया है। बहुत सारे परिवार अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्कूल में भेजने के लिए विवश हो गए हैं।
दिल्ली के बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवार तो अब दो वक्त का खाना भी मुश्किल से जुटा पाते हैं। राहत कार्यक्रमों की मांग बढ़ी है। खैरात पर निर्भर लोगों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है।
यह हालात दिल्ली के प्रशासन और केंद्र सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं। आम आदमी की जेब में जो बचा है, वह भी अब खत्म हो गया है। सरकार को इस महंगाई से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए। ईंधन पर सब्सिडी बढ़ानी चाहिए और खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण लगाना चाहिए। अन्यथा, आने वाले दिनों में सामाजिक संकट और भी गहरा हो सकता है।




