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Saturday, 03 October 2026
अपराध

दिल्ली: 128 करोड़ के जीएसटी घोटाले में 6 गिरफ्तार

author
Komal
संवाददाता
📅 17 May 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
दिल्ली: 128 करोड़ के जीएसटी घोटाले में 6 गिरफ्तार
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली की पुलिस ने हाल ही में एक बड़े जीएसटी घोटाले का भांडाफोड़ किया है। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच से सामने आया है कि इन अपराधियों ने पचास फर्जी कंपनियों का एक विशाल सिंडिकेट तैयार किया था। इस सिंडिकेट के माध्यम से 128 करोड़ रुपये का झूठा कारोबार दिखाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया था।

घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक सरगना भी शामिल है, जिसने पूरे अवैध कारोबार का संचालन किया। पुलिस ने विस्तृत जांच के दौरान आरोपियों के पास से 51 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं। यह नकद रकम अवैध कमाई से प्राप्त मानी जा रही है।

पचास फर्जी कंपनियों का विशाल नेटवर्क

पुलिस की खोजबीन में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कम से कम पचास फर्जी कंपनियां पंजीकृत करवाई थीं। ये सभी कंपनियां कागज पर ही मौजूद थीं। इन कंपनियों का कोई वास्तविक कार्यालय, कर्मचारी या व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी। पूरा व्यवसाय केवल कागजों पर चलता था और फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला कि ये अवैध कंपनियां मुख्य रूप से सर्विस सेक्टर में काम करती दिखाई जाती थीं। इन कंपनियों के नाम पर जीएसटी नंबर प्राप्त किए गए और फिर उन नंबरों का दुरुपयोग करके लाखों-करोड़ों रुपये का फर्जी बिल तैयार किए गए। ये फर्जी बिल बड़ी-बड़ी असली कंपनियों को दिए जाते थे, जो उन्हें अपने जीएसटी रिटर्न में दिखाकर सरकारी अनुदान पाते थे।

128 करोड़ रुपये का विशाल घोटाला

शुरुआती जांच के अनुसार, महज एक ही कंपनी के माध्यम से 128 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दिखाया गया। यह रकम केवल एक साल की अवधि में जेनरेट की गई थी। पुलिस को संदेह है कि यह सिंडिकेट कई सालों से इसी तरह का अवैध काम कर रहा था। अगर गत वर्षों के लेन-देन को देखा जाए तो यह घोटाला 128 करोड़ से कहीं अधिक हो सकता है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने इस अवैध नेटवर्क को चलाने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम लोगों को भी काम पर रखा था। ये लोग कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करके नकली इनवॉइस तैयार करते थे और जीएसटी पोर्टल पर उन्हें अपलोड करते थे। पूरा ऑपरेशन बेहद सुव्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था, जिससे काफी समय तक यह अवैध कारोबार पकड़े जाने से बचा रहा।

पुलिस की तेज जांच और गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस ने विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इस मामले में छानबीन शुरू की। साइबर सेल और आर्थिक अपराध विभाग ने मिलकर इस सिंडिकेट पर नज़र रखी। कई महीनों की गहन जांच के बाद पुलिस को पचास फर्जी कंपनियों का यह नेटवर्क मिला। पुलिस ने रणनीतिक रूप से सभी आरोपियों को एक साथ गिरफ्तार किया ताकि कोई अन्य आरोपी फरार न हो सके।

गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी दिल्ली के विभिन्न इलाकों से हैं। सरगना का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पुलिस के अनुसार वह इस पूरे गिरोह का मुखिया था। उसके अलावा गिरफ्तार किए गए अन्य लोग विभिन्न भूमिकाओं में काम कर रहे थे। कुछ लोग फर्जी कंपनियां खोलते थे, कुछ इनवॉइस तैयार करते थे और कुछ असली कंपनियों से संपर्क स्थापित करके उन्हें ये फर्जी बिल देते थे।

इस घोटाले का पूरी तरह खुलासा होने में अभी समय लगेगा। पुलिस अभी और विवरणों की जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों को भी संभाला जा रहा है ताकि पूरी कहानी सामने आ सके। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ जीएसटी कानून, भारतीय दंड संहिता और साइबर अपराध कानून के तहत केस दर्ज किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि सरकार आर्थिक अपराधों के खिलाफ दृढ़ रुख अपना रही है। ऐसे सिंडिकेटों को तोड़ना राष्ट्रीय कोष की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सरकार को हर साल जीएसटी धोखाधड़ी से करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, और इस तरह की कार्रवाई से ऐसे अपराधों में कमी आ सकती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और तकनीकी निगरानी की जरूरत होगी।