मानसून 26 मई तक केरल में, सूखा और बाढ़ का खतरा
भारतीय मौसम विभाग ने देश के विभिन्न हिस्सों के लिए चिंताजनक मौसम की स्थिति के बारे में जानकारी दी है। आने वाले दिनों में दक्षिण भारत में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा रहेगा, वहीं उत्तर और मध्य भारत में भीषण सूखे की आशंका व्यक्त की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून 26 मई तक केरल के तटों तक पहुंच जाएगा। यह जानकारी कृषि और आम जनता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून से ही भारतीय कृषि व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती है।
वर्तमान समय में विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा अल नीनो की घोषणा की गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार अल नीनो के कारण बारिश का स्वरूप असामान्य होगा। कहीं भीषण बारिश होगी तो कहीं लंबे समय तक सूखा बना रहेगा। भारतीय मौसम विभाग ने सभी राज्यों को इस बारे में सतर्क किया है कि वे अपनी आपातकालीन तैयारी को मजबूत करें। सूखा और बाढ़ दोनों ही आपदाएं हैं जो जनजीवन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
दक्षिण भारत में बाढ़ का खतरा
दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मानसून की शुरुआत के साथ ही भारी बारिश की संभावना है। केरल पश्चिमी घाट की श्रृंखला से घिरा है और यहां मानसून की बारिश से बाढ़ का खतरा हमेशा रहता है। इस बार मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 26 मई के आसपास केरल में तेज बारिश हो सकती है। इससे नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में भी भारी बारिश होने की संभावना है। अरब सागर से आने वाली बारिश की नमी से दक्षिण भारत के राज्यों में बहुत अधिक वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार हफ्तों में दक्षिण भारत में सामान्य से 120 प्रतिशत तक अधिक बारिश हो सकती है। यह स्थिति बाढ़ की आशंका को और बढ़ा देती है। सरकारें पहले से ही आपदा प्रबंधन दल को सतर्क कर चुकी हैं।
दक्षिण भारत की नदियां जैसे कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और तापी आदि तेज बहाव से प्रभावित हो सकती हैं। इन नदियों के किनारे बसे गांव और शहरों में बाढ़ की संभावना है। किसानों को भी अपनी फसलों को लेकर चिंता रहेगी। मौसम विभाग ने सभी को सलाह दी है कि वे आवश्यक सामग्री का भंडार बनाएं और आपातकालीन योजना तैयार करें।
उत्तर और मध्य भारत में सूखे की गंभीर चिंता
जहां दक्षिण में बाढ़ का खतरा है, वहीं उत्तर और मध्य भारत में भीषण सूखे की आशंका की गई है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में इस बार मानसून कमजोर हो सकता है। अल नीनो की वजह से इस बार मानसून की बारिश में कमी की प्रबल संभावना है। ये क्षेत्र भारतीय कृषि का मुख्य केंद्र हैं और सूखा यहां की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो के कारण जेट स्ट्रीम की स्थिति बदल जाती है, जिससे मानसून का मार्ग विचलित हो जाता है। इससे उत्तर भारत में मानसून कमजोर पड़ता है। राजस्थान, जो पहले से ही सूखा प्रवण क्षेत्र है, इस बार और भी गंभीर सूखे का सामना कर सकता है। पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों में भी पानी की कमी एक बड़ी समस्या बन सकती है।
सरकारें और कृषि विभाग पहले से ही जल संरक्षण के बारे में सोच रहे हैं। वर्षा जल संचयन परियोजनाओं को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। किसानों को भी ऐसी फसलें लगानी चाहिए जिन्हें कम पानी की जरूरत हो। ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।
मौसम विभाग और वैज्ञानिकों की सलाह
भारतीय मौसम विभाग ने सभी राज्य सरकारों को विस्तृत मार्गदर्शन दिया है। दक्षिण भारत के राज्यों को बाढ़ से निपटने की तैयारी करनी चाहिए, जबकि उत्तर और मध्य भारत को सूखे की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। मेट विभाग ने प्रतिदिन आधिकारिक अपडेट जारी करने की घोषणा की है।
वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें अपनी कृषि पद्धति और जल प्रबंधन को बदलना होगा। भूजल का दोहन कम करना होगा और वर्षा जल को संरक्षित करना होगा। पेड़ों की कटाई को रोकना होगा क्योंकि पेड़ ही बारिश को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। सरकारें, किसान और आम जनता सभी को मिलकर इस संकट का सामना करना होगा। 26 मई तक के लिए सभी को तैयार रहना चाहिए।




