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Tuesday, 18 August 2026
समाचार

राघव चड्ढा की पैटरनिटी लीव मांग पर परिणीति का रिएक्शन

author
Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 9:27 AM ⏱ 1 मिनट 👁 486 views
राघव चड्ढा की पैटरनिटी लीव मांग पर परिणीति का रिएक्शन
📷 Aaj Tak

संसद में गूंजी राघव चड्ढा की आवाज, पैटरनिटी लीव की मांग पर परिणीति बोलीं- 'गर्व है'

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने संसद में एक अहम मुद्दा उठाया है जो आज के समय की मांग है। राघव ने पिताओं के लिए पैटरनिटी लीव की मांग को लेकर सदन में अपनी बात रखी है। उनकी इस सोच और पहल की व्यापक सराहना हो रही है। सबसे पहले उनकी पत्नी और बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने अपने पति की इस पहल पर गर्व जताया है।

राघव चड्ढा हमेशा से ही जनता के मुद्दों को संसद तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उनका यह कदम भारतीय समाज में पिता की भूमिका को लेकर एक नई सोच का परिचायक है। आज के दौर में जब महिला सशक्तिकरण की बात हो रही है, तो पुरुषों को भी अपने पारिवारिक दायित्वों के लिए समय मिलना चाहिए।

राघव चड्ढा की पैटरनिटी लीव मांग पर परिणीति का रिएक्शन

परिणीति चोपड़ा का भावुक रिएक्शन

परिणीति चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, "राघव चड्ढा जितने बेहतरीन पिता और पति हैं उतने ही अच्छे नेता भी हैं। राघव हमेशा करोड़ों देशवासियों की आवाज बनकर उनके मुद्दे संसद में उठाते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इस बार उनके पति ने पिताओं के लिए पैटरनिटी लीव की मांग की है जो एक सराहनीय कदम है।

परिणीति का यह बयान दिखाता है कि वह अपने पति के राजनीतिक करियर और उनकी सामाजिक सोच से कितनी प्रभावित हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राघव की इस सोच और पहल पर उन्हें गर्व है।

पैटरनिटी लीव की जरूरत क्यों?

आज के समय में पैटरनिटी लीव की मांग केवल एक नीतिगत फैसला नहीं बल्कि सामाजिक जरूरत बन गई है। जब कोई बच्चा पैदा होता है तो केवल मां को ही नहीं बल्कि पिता को भी अपनी जिम्मेदारियों के लिए समय चाहिए। नवजात शिशु की देखभाल, मां का साथ देना और परिवारिक व्यवस्था को संभालना - ये सभी काम पिता की उपस्थिति मांगते हैं।

कई विकसित देशों में पैटरनिटी लीव की व्यवस्था पहले से मौजूद है। स्वीडन, नॉर्वे, आइसलैंड जैसे देशों में पिताओं को कई महीनों की छुट्टी मिलती है। भारत में भी यह व्यवस्था लागू करना समय की मांग है।

वर्तमान में भारत के कुछ कॉर्पोरेट सेक्टर में पैटरनिटी लीव की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन यह अभी भी बहुत सीमित है। अधिकांश संगठनों में पिताओं को केवल 5-15 दिन की छुट्टी मिलती है जो पर्याप्त नहीं है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

राघव चड्ढा की इस मांग का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। AAP हमेशा से ही प्रगतिशील नीतियों के लिए जानी जाती है। दिल्ली में मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बाद अब पैटरनिटी लीव का मुद्दा उठाना पार्टी की दूरदर्शिता को दिखाता है।

यह मुद्दा केवल नीतिगत नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक है। भारतीय समाज में पारंपरिक रूप से बच्चों की देखभाल को महिलाओं की जिम्मेदारी माना जाता रहा है। लेकिन आज के दौर में यह सोच बदल रही है। पैटरनिटी लीव की मांग इसी बदलाव का हिस्सा है।

राघव चड्ढा का यह कदम न केवल नए पिताओं के लिए फायदेमंद होगा बल्कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में भी योगदान देगा। जब पिता भी बच्चों की देखभाल में बराबर की भागीदारी करेंगे तो महिलाओं पर से इस जिम्मेदारी का एकतरफा बोझ कम होगा।

राघव चड्ढा की इस पहल से उम्मीद की जा सकती है कि अन्य राजनीतिक दल और नेता भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे। परिणीति चोपड़ा का साथ मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।