कुवैत से केरल आईं 20 भारतीयों की डेड बॉडीज, जानें पूरा मामला
कुवैत में जान गंवाने वाले 20 भारतीयों के शव वतन लौटे, युद्ध की वजह से हुई देरी
कुवैत में अलग-अलग घटनाओं में अपनी जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर मंगलवार को केरल के कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण विमान सेवाओं में आए व्यवधान की वजह से इन शवों को भारत लाने में काफी देरी हुई थी। यह घटना एक बार फिर विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की समस्याओं को उजागर करती है।
विशेष रूप से तैयार किए गए विमान से लाए गए ये शव केरल और तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों के रहने वाले लोगों के हैं। एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन सभी पार्थिव शरीरों को उनके संबंधित पैतृक गांवों के लिए रवाना कर दिया है।

मिडिल ईस्ट युद्ध का प्रभाव
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव हवाई परिवहन सेवाओं पर पड़ा है। इस वजह से न केवल नियमित यात्री उड़ानें बल्कि आपातकालीन और विशेष उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। कुवैत से भारत आने वाली उड़ानों में भी काफी व्यवधान देखा गया है, जिसका सीधा असर इन शवों की वापसी में देरी के रूप में दिखा।
युद्ध की स्थिति के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों का मार्ग बदला है या फिर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। इससे न केवल जीवित यात्रियों को परेशानी हो रही है बल्कि इमरजेंसी रिपैट्रिएशन जैसे संवेदनशील मामलों में भी समस्या आ रही है।
भारतीय दूतावास की भूमिका
कुवैत में भारतीय दूतावास ने इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूतावास के अधिकारियों ने न केवल मृतकों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया बल्कि सभी आवश्यक औपचारिकताओं को भी पूरा किया। विशेष विमान की व्यवस्था करना और सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना एक चुनौतीपूर्ण काम था।
भारतीय अधिकारियों ने कुवैती सरकार के साथ मिलकर इस संवेदनशील मामले को संभाला है। दोनों देशों के बीच राजनयिक सहयोग के कारण ही यह प्रक्रिया संभव हो पाई है, हालांकि युद्ध की स्थिति के कारण इसमें अपेक्षित समय से अधिक वक्त लगा।
परिवारों का दुख और राहत
मृतकों के परिवारों के लिए यह समय अत्यंत कष्टकारी रहा है। एक तरफ अपने प्रियजनों को खोने का गम था, दूसरी तरफ उनके शवों की वापसी में हो रही देरी से और भी परेशानी बढ़ रही थी। कई परिवारों ने सरकार से अपील की थी कि जल्द से जल्द उनके मृत रिश्तेदारों को वतन वापस लाया जाए।
कोच्चि एयरपोर्ट पर शवों के पहुंचने की खबर से परिवारों को काफी राहत मिली है। अब वे अपने धर्म और परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार कर सकेंगे। केरल और तमिलनाडु सरकार ने भी इन परिवारों की मदद के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं।
विदेशी मजदूरों की सुरक्षा का सवाल
यह घटना एक बार फिर विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर करती है। खाड़ी के देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और वे अक्सर कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन व्यतीत करते हैं। सरकार को इनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए और मजबूत तंत्र विकसित करना चाहिए।
भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है ताकि युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी भारतीय नागरिकों की मदद तुरंत की जा सके।




