मार्को रुबियो का भारत दौरा: जयशंकर की तारीफ
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के दौरे में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बेहद सकारात्मक बातें कहीं हैं। दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में रुबियो ने भारत को 21वीं सदी के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच के संबंध न केवल द्विपक्षीय स्तर पर महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी बेहद जरूरी हैं।
रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की गहरी प्रशंसा की है। उन्होंने जयशंकर को बेहद बुद्धिमान, दूरदर्शी और अनुभवी नेता बताया। रुबियो ने कहा कि जयशंकर ने भारत की विदेश नीति को एक नई दिशा दी है और वे भारत को विश्व मंच पर शक्तिशाली स्थिति तक ले गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जयशंकर जैसे दूरदर्शी नेताओं के साथ काम करना अमेरिका के लिए सौभाग्य की बात है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र
मार्को रुबियो ने अपने भाषण में कहा कि भारत और अमेरिका कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साथ मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने तकनीकी विकास, साइबर सुरक्षा, रक्षा सहयोग और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों को सबसे महत्वपूर्ण बताया। रुबियो का मानना है कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और अमेरिका का विकसित ढांचा एक दूसरे को पूरक बना सकते हैं।
रुबियो ने कहा कि भारत के डिजिटल क्षेत्र में हो रहे विकास को देखते हुए, दोनों देश साइबर सुरक्षा में एक मजबूत साझेदारी बना सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका भारत की सुरक्षा चुनौतियों को समझता है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है। रुबियो ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर होने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में विश्वास रखता है।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं है, बल्कि आज का भारत एक वैश्विक शक्ति बन गया है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि भारत ने अपनी विदेश नीति के माध्यम से वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। रुबियो ने कहा कि भारत की आर्थिक शक्ति और सामाजिक विविधता इसे एक अनोखा राष्ट्र बनाती है।
रुबियो ने भारत के गरीबी उन्मूलन और विकास के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों को सुधारते हुए करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की यह उपलब्धि विश्व के विकासशील देशों के लिए एक प्रेरणा है।
रुबियो ने भारत की बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक परंपरा की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान एक बेहतरीन दस्तावेज है जो सभी धर्मों और समुदायों को बराबर अधिकार देता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की यह परंपरा पश्चिमी देशों के लिए भी सीखने का विषय है।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
मार्को रुबियो ने अपने भाषण के अंत में भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य के बारे में कहा कि दोनों देशों के बीच अभूतपूर्व सहयोग की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में एशिया-प्रशांत क्षेत्र का बेहद महत्व होगा और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका केंद्रीय होगी। रुबियो का मानना है कि अमेरिका और भारत को एक साथ इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करना चाहिए।
रुबियो ने चीन की बढ़ती शक्ति को भी स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका की साझेदारी इस क्षेत्र को संतुलित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए एक साथ काम करना चाहिए। रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और क्षेत्रीय अखंडता में पूरी तरह से समर्थन देता है।
अंत में, रुबियो ने एस. जयशंकर के साथ अपनी बातचीत को लेकर अत्यंत संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जयशंकर के साथ उनकी चर्चा से यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच सांझी सोच है। उन्होंने कहा कि जयशंकर एक ऐसे नेता हैं जो भारत के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और साथ ही वैश्विक परिस्थितियों को भी समझते हैं।
कुल मिलाकर, मार्को रुबियो का भारत दौरा और उनके भाषण से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत को अपने लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की वैश्विक मंच पर बढ़ती साख के इस दौर में, भारत-अमेरिका संबंध और भी मजबूत होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बढ़ता यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।




