ईरान संकट: राष्ट्रपति पेजेशकियन का इस्तीफा
ईरान में एक बार फिर से राजनीतिक तूफान मचा है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सैन्य कमांडरों के बढ़ते हस्तक्षेप और सरकार की बेबसी का हवाला देते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी है। यह कदम ईरान के आंतरिक राजनीतिक संकट को एक नई गहराई तक ले गया है। पेजेशकियन के इस फैसले ने देश के सर्वोच्च नेतृत्व में गहरी खाई को उजागर कर दिया है, जिससे ईरान का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अपने इस्तीफे के बयान में कहा कि वह अब सरकार को प्रभावी ढंग से चला नहीं सकते क्योंकि सभी महत्वपूर्ण निर्णय सैन्य कमांडरों के हाथ में चले गए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार पूरी तरह से बेबस हो गई है और उसके पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं रह गई है। यह बयान ईरान के राजनीतिक ढांचे में एक गंभीर दरार को दर्शाता है।
ईरान का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है
ईरान में राजनीतिक संकट बिल्कुल नई स्थिति नहीं है, लेकिन पेजेशकियन का इस्तीफा इसे एक नए आयाम पर ले गया है। देश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति सर्वोच्च नेता के अधीन काम करता है, लेकिन सेना के कमांडरों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पेजेशकियन के इस्तीफे से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार का असली अधिकार सेना के पास चला गया है।
तेहरान में लोगों की प्रतिक्रिया विविध है। कुछ लोगों को लगता है कि पेजेशकियन ने सही कदम उठाया है, क्योंकि वह ईरान को सही दिशा में ले जा सकते थे, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप के कारण असफल हो गए। दूसरी ओर, कुछ लोग मानते हैं कि यह केवल राजनीतिक खेल है और राष्ट्रपति को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति के इस्तीफे की पुष्टि की है, लेकिन सर्वोच्च नेता अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इस्तीफे की स्वीकृति संसद में विचार करने की आवश्यकता है, जहां यह एक गरम विषय बन गया है।
सैन्य कमांडरों का बढ़ता प्रभाव और सरकार की बेबसी
ईरान में पिछले कुछ महीनों से सैन्य कमांडरों का प्रभाव लगातार बढ़ता गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और अन्य सैन्य संगठन अब कई महत्वपूर्ण निर्णयों में सीधे भूमिका निभा रहे हैं। पेजेशकियन के मुताबिक, आर्थिक नीति, विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी मामलों में सेना की राय ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
सरकार की इस बेबसी का असर ईरान की आर्थिक नीति पर भी दिख रहा है। महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी का दर ऊंचा है, और विदेशी निवेश कम हो रहा है। पेजेशकियन इन समस्याओं को हल करना चाहते थे, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप के कारण वह कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सके। उन्होंने कहा कि जब तक सेना सरकार के फैसलों में सीधा दखल देती रहेगी, तब तक कोई भी सुधार संभव नहीं है।
ईरान में सेना का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। आईआरजीसी और अन्य सैन्य संगठन देश की बड़ी कंपनियों के मालिक हैं और महत्वपूर्ण व्यावसायिक निर्णयों को नियंत्रित करते हैं। इससे पारदर्शिता की कमी हुई है और भ्रष्टाचार बढ़ा है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति
राष्ट्रपति पेजेशकियन के इस्तीफे का असर ईरान की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर भी पड़ने वाला है। अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देश इस स्थिति को सावधानी से देख रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह राजनीतिक अस्थिरता ईरान को कमजोर कर सकती है, जबकि अन्य मानते हैं कि यह पेजेशकियन का सेना के विरुद्ध एक साहसिक कदम है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी इस राजनीतिक संकट से प्रभावित हो सकता है। पेजेशकियन परमाणु समझौते में रुचि रखते थे, लेकिन सेना इसका विरोधी है। इस्तीफे के बाद, परमाणु नीति पर नए सिरे से विचार हो सकता है।
एशिया और अफ्रीका के कई देश ईरान की स्थिति पर टिप्पणी कर चुके हैं। रूस और चीन ने तटस्थता बनाए रखी है, लेकिन इस संकट में ईरान की कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं। संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश इस घटनाक्रम को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
ईरान के राष्ट्रपति का इस्तीफा एक ऐतिहासिक घटना है जो देश की राजनीतिक संरचना को बदल सकती है। आने वाले समय में संसद के फैसले और नए नेतृत्व की नीतियों पर निर्भर करेगा कि ईरान किस दिशा की ओर बढ़ेगा। फिलहाल, अनिश्चितता का माहौल है और सभी लोग देखना चाहते हैं कि इस संकट का समाधान कैसे होगा।




