CID जांच, अभिषेक पर आंच, TMC में भूचाल
बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से तूफान खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के भीतर जो संकट खड़ा हुआ है वह पार्टी की बुनियाद को ही हिला देने वाला साबित हो सकता है। चुनावी हार के बाद से जो गुस्से और असंतोष की आग लगी थी, वह अब खुले विद्रोह का रूप ले चुकी है। फर्जी हस्ताक्षर के इस मामले ने ममता बनर्जी की पार्टी को झकझोर कर रख दिया है।
सबसे पहले बात करते हैं कि आखिरकार यह फेक साइन केस है क्या। दरअसल, इस मामले में आरोप है कि कुछ विधायकों के हस्ताक्षर की नकल की गई। ये हस्ताक्षर ऐसे दस्तावेजों पर लगाए गए जिनमें कि पार्टी के खिलाफ कदम उठाने की बात कही गई थी। जब इस बात का पता चला तो पूरा मामला CID के हाथों में चला गया। CID की टीम ने जांच शुरू कर दी और जल्द ही अभिषेक बनर्जी को नोटिस दे दिया गया।
फर्जी हस्ताक्षर मामले में CID की जांच
CID की जांच इस बात को लेकर केंद्रित है कि आखिर किन लोगों के हस्ताक्षर की नकल की गई थी और किसने ये काम किया। इस जांच के दौरान यह भी पता चला है कि काफी ऊंचे स्तर पर लोग इस मामले में शामिल हो सकते हैं। अभिषेक बनर्जी को नोटिस दिया गया है ताकि वह अपने बयान दे सकें। हालांकि, अभिषेक बनर्जी के समर्थकों का कहना है कि ये सब कुछ ममता बनर्जी की तरफ से किया जा रहा है और यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है।
CID की जांच में यह भी सामने आया है कि कुल पाँच विधायकों के हस्ताक्षर की नकल की गई थी। ये सभी विधायक पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं। उनके हस्ताक्षर की नकल करके कुछ ऐसे कागजात तैयार किए गए जिनमें कि पार्टी की नीति और ममता बनर्जी के फैसलों के खिलाफ बातें लिखी थीं। इस पूरे मामले में पार्टी के अंदर पहले से चली आ रही नाराजगी का असर साफ दिखाई दे रहा है।
पार्टी में गहरा असंतोष और विधायकों का विद्रोह
बंगाल में चुनावी हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के अंदर खलबली मची हुई है। कई विधायक और नेता ममता बनर्जी की नीतियों से नाखुश हैं। उन्हें लगता है कि पार्टी गलत रास्ते पर चल रही है। अभिषेक बनर्जी को भी कई विधायक अपना नेता मानते हैं और उनका समर्थन करते हैं। इसी कारण से ये झगड़ा अभी तक सीमित है, लेकिन आने वाले समय में यह और भी बड़ा हो सकता है।
इस फर्जी हस्ताक्षर मामले में दो विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। यह कदम बहुत बड़ी बात है क्योंकि इससे पार्टी के अंदर और भी नाराजगी फैल सकती है। कई विधायकों ने ममता बनर्जी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शिरकत नहीं की। यह उनके असंतोष का सीधा संकेत है। पार्टी के अंदर जो विभाजन की स्थिति दिख रही है, वह बहुत चिंताजनक है।
TMC का आंतरिक संकट और भविष्य
तृणमूल कांग्रेस अभी एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। बंगाल में विधानसभा चुनाव में जो हार मिली, उससे पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है। ऐसे में जब पार्टी के भीतर ही संकट खड़ा हो जाए तो यह और भी गंभीर स्थिति बन जाती है। अभिषेक बनर्जी को नोटिस दिया जाना ममता बनर्जी की तरफ से एक मजबूत संदेश है कि वह अपनी पार्टी में किसी भी तरह की बगावत को सहन नहीं करेंगी।
इस पूरे मामले में यह भी साफ है कि पार्टी के भीतर दो खेमे बन गए हैं। एक खेमा ममता बनर्जी का समर्थन करता है और दूसरा अभिषेक बनर्जी का। इस विभाजन को लेकर पार्टी के नेताओं को गंभीर चिंता है। अगर यह स्थिति ऐसे ही चलती रही तो तृणमूल कांग्रेस को भविष्य में और भी बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है।
फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर CID की जांच अभी जारी है। इस जांच के नतीजे आने के बाद पता चल सकेगा कि आखिर कौन लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे। लेकिन एक बात साफ है कि यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। पार्टी को अपने अंदर की खलबली को समाप्त करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे, अन्यथा वह टूटते-बिखरते रहेगी।
आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की राजनीति में और भी नाटकीय मोड़ आने वाले हैं। CID की जांच के साथ-साथ पार्टी के अंदर अलग-अलग खेमों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ममता बनर्जी को एक कुशल नेतृत्व की जरूरत है ताकि वह अपनी पार्टी को बचा सकें। फिलहाल तो यही लग रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के सामने एक बहुत ही कठिन समय आने वाला है।




