🔴 ब्रेकिंग
DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|DK शिवकुमार CM: IAS अधिकारियों की नई नियुक्ति|पर्स में ये 3 चीजें रखने से खाली होती है जेब|अनुष्का शर्मा होम्योपैथी सपोर्ट विवाद|ट्रंप और नेतन्याहू की तनाव भरी बातचीत का सच|सोने से पहले लगाएं लौंग की क्रीम, बुढ़ापा रहेगा दूर|पीली रोटी का चमत्कार, 43 दिन में बढ़ेगा धन|होटल कारोबारी हत्याकांड: मुख्य आरोपी मारा गया|ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका: संसद से सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव|मालवीय नगर अग्निकांड: क्या 1000 डिग्री तक पहुंचा था तापमान?|ईरान-अमेरिका समझौता: जंग टलेगी, खत्म नहीं होगी|
Saturday, 06 June 2026
राजनीति

ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकारा बेरूत हमलों पर

author
Komal
संवाददाता
📅 02 June 2026, 7:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 590 views
ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकारा बेरूत हमलों पर
📷 aarpaarkhabar.com

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन कॉल के दौरान एक तीव्र मतभेद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री को बेरूत में चल रहे हमलों को तुरंत रोकने के लिए दबाव डाला है। इस बातचीत में ट्रंप ने अपना नाराजगी साफ तरीके से जाहिर किया और कहा कि नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह उन्हीं पर निर्भर है।

ट्रंप ने नेतन्याहू को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह पागल हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वह नेतन्याहू के साथ न होते तो इजरायली नेता आज जेल में होते। यह टिप्पणी निश्चित रूप से काफी विवादास्पद और महत्वपूर्ण है।

ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया और चिंताएं

डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, नेतन्याहू की रणनीति बिना सोच-समझे की गई है और इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ट्रंप का मानना है कि हिज्बुल्लाह को निशाना बनाने के लिए जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, वह बहुत ही आक्रामक हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह संकेत दिया है कि अगर इजरायल आगामी समय में इस नीति को जारी रखता है तो अमेरिका की ओर से समर्थन कम हो सकता है। ट्रंप के लिए यह मामला सिर्फ सैन्य मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और कूटनीतिक निहितार्थ भी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना जरूरी है।

ट्रंप की टिप्पणी में एक दूसरा आयाम भी है। उन्होंने नेतन्याहू को यह याद दिलाया कि अमेरिका के राजनीतिक समर्थन के बिना इजरायल का अंतर्राष्ट्रीय स्थिति कमजोर हो सकता है। यह टिप्पणी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि अमेरिकी नेतृत्व भी इस समय इजरायली रणनीति से पूरी तरह सहमत नहीं है।

नेतन्याहू का जवाबी रुख

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की आलोचना के बावजूद अपना रुख नहीं बदला है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि हिज्बुल्लाह अपने हमलों को बंद नहीं करता है तो इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई को जारी रखेगा। नेतन्याहू के अनुसार, इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए किसी भी कीमत पर कार्रवाई की जा सकती है।

नेतन्याहू का यह रुख काफी कठोर है और वह ट्रंप की चेतावनियों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इजरायली नेता का मानना है कि हिज्बुल्लाह के साथ कोई समझौता संभव नहीं है और केवल सैन्य शक्ति ही इस आतंकवादी संगठन को नियंत्रित कर सकती है। यह立ち场 इजरायली सुरक्षा मंत्रालय के विचारों को प्रतिबिंबित करता है।

नेतन्याहू ने अपने देश की संप्रभुता पर भी जोर दिया है। उनके अनुसार, इजरायल अपने अंदरूनी सुरक्षा मामलों में किसी विदेशी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। यह बयान दर्शाता है कि इजरायली सरकार अपनी सैन्य नीति पर दृढ़ है, चाहे इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय समालोचना का सामना करना पड़े।

क्षेत्रीय स्थिति और भविष्य की संभावनाएं

लेबनान और इजरायल के बीच यह तनाव काफी समय से चल रहा है। हिज्बुल्लाह ने लंबे समय से इजरायल के विरुद्ध हमले किए हैं और इजरायल ने भी बार-बार इस संगठन को निशाना बनाया है। हालांकि, हाल के महीनों में इस संघर्ष की तीव्रता में काफी वृद्धि हुई है।

बेरूत और उसके आसपास के क्षेत्रों में जारी हमलों में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। यह स्थिति काफी गंभीर है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इसको लेकर चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इस स्थिति में सुधार के लिए आवाजें उठाई हैं।

ट्रंप की हस्तक्षेप की कोशिश दर्शाती है कि अमेरिका भी इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहता है। हालांकि, नेतन्याहू की कठोर प्रतिक्रिया से साफ है कि इस समस्या का तत्काल समाधान संभव नहीं दिख रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या ट्रंप की डिप्लोमेसी कोई सकारात्मक नतीजा दे पाती है या फिर इजरायल अपनी मनमानी सैन्य कार्रवाई को जारी रखता है।

इस पूरे प्रसंग में यह स्पष्ट है कि अमेरिका-इजरायल संबंध भी इस समय काफी तनावपूर्ण हैं। ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया से लगता है कि वाशिंगटन का धैर्य अब खत्म हो गया है। हालांकि, इजरायल के लिए अमेरिकी समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है, नेतन्याहू ने फिर भी अपने रास्ते पर चलने का फैसला किया है। यह स्थिति आने वाले समय में कितनी गंभीर हो सकती है, यह देखना अभी बाकी है।