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Monday, 15 June 2026
धर्म

महाकुंभ में चंदा चोरी: रोज 10-15 लाख रुपये का धोखाधड़ी

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 821 views
महाकुंभ में चंदा चोरी: रोज 10-15 लाख रुपये का धोखाधड़ी
📷 aarpaarkhabar.com

राम मंदिर में आयोजित महाकुंभ के दौरान एक बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। चंदा चोरों का एक संगठित गिरोह महाकुंभ के भीड़ भरे माहौल का फायदा उठाकर प्रतिदिन 10 से 15 लाख रुपये तक की चंदे की राशि हड़प रहा था। यह मामला तब सामने आया जब मंदिर प्रशासन को अपने खातों में विसंगतियां दिखीं। अब विशेष जांच दल यानी एसआईटी को इस मामले की गहन तहकीकात करने का दायित्व सौंपा गया है।

महाकुंभ का यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण था, लेकिन इसी आवधिक में अपराधियों को एक सुनहरा अवसर मिल गया। भीड़ के बीच में अपनी गतिविधियां छिपाना और खातों में हेरा-फेरी करना उनके लिए काफी आसान साबित हुआ। जो लोग चंदे की गिनती करते थे, उन्हें इस धोखाधड़ी की पूरी जानकारी थी। उन्होंने व्यवस्थित तरीके से रोजाना लाखों रुपये को गायब कर दिया।

महाकुंभ के दौरान बड़ी राशि का संग्रह

राम मंदिर में महाकुंभ के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और वे चंदे के रूप में अपनी भक्ति भावना का प्रदर्शन करते हैं। इस बार भी लाखों श्रद्धालु महाकुंभ में शामिल हुए और उन्होंने काफी बड़ी राशि दान की। लेकिन यह राशि पूरी तरह मंदिर के खजाने तक नहीं पहुंची। रास्ते में ही इसका एक बड़ा हिस्सा अपराधियों की जेबों में समा गया। प्रतिदिन 10 से 15 लाख रुपये की राशि चोरी होना कोई छोटी बात नहीं है।

जब मंदिर के अधिकारियों ने अपने रिकॉर्ड की जांच की तो उन्हें पता चला कि चंदे की राशि में भारी अंतर है। श्रद्धालुओं की ओर से जितनी राशि आनी चाहिए थी, खजाने में उससे कहीं कम पैसे पहुंचे हैं। इस विसंगति ने आखिरकार इस बड़े घोटाले को उजागर कर दिया। मंदिर प्रशासन तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचित किया और पुलिस को इस मामले की जांच सौंपी।

संगठित गिरोह की कार्यप्रणाली

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह एक संगठित तरीके से किया जा रहा था। यह कोई आकस्मिक चोरी नहीं थी, बल्कि एक सुसंगठित गिरोह की योजनाबद्ध कार्रवाई थी। जो लोग चंदे की गिनती के लिए नियुक्त थे, उन्होंने इस काम को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। वे रोजाना जानबूझकर गलत आंकड़े दर्ज करते थे और राशि को गायब कर देते थे।

महाकुंभ जैसे धार्मिक अनुष्ठान में भीड़ का माहौल सामान्य से कहीं अधिक होता है। इसी भीड़ का फायदा उठाकर ये अपराधी अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे। किसी को इस बात का पूर्वाभास नहीं था कि मंदिर के अपने कर्मचारी ही इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं। विश्वास के साथ यह हिंसा पारंपरिक धार्मिक संस्थाओं को कलंकित करती है।

एसआईटी की जांच और भविष्य की दिशा

अब विशेष जांच दल को इस मामले में सभी पहलुओं की गहन तहकीकात करनी है। उन्हें यह पता लगाना होगा कि कितने लोग इस धोखाधड़ी में शामिल थे और उन्होंने कुल कितनी राशि हड़पी। साथ ही, यह भी पता लगाना होगा कि खातों में हेरा-फेरी कैसे और कितने समय से हो रही थी। इसके अलावा, यह भी जांच होगी कि क्या किसी उच्च अधिकारी को इसकी जानकारी थी।

पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों की पहचान की है और उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। मंदिर प्रशासन ने भी अपनी ओर से आंतरिक जांच शुरू कर दी है। उन्होंने सभी कर्मचारियों की पृष्ठभूमि को दोबारा जांचने का फैसला किया है।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि धार्मिक संस्थाओं में भी अपराधी हो सकते हैं। इसलिए मंदिर प्रशासन को अपनी आंतरिक निगरानी प्रणाली को मजबूत करना चाहिए। नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और आधुनिक लेखा प्रणाली का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। श्रद्धालुओं का विश्वास ही इन संस्थाओं की असली संपदा है और इसे हर कीमत पर बचाया जाना चाहिए।