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Monday, 15 June 2026
धर्म

सोमवती अमावस्या 2026: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 750 views
सोमवती अमावस्या 2026: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व

आज 15 जून को सोमवती अमावस्या का पावन योग बन रहा है। यह एक बहुत ही दुर्लभ और शुभ संयोग है जो साल में केवल एक बार आता है। सोमवती अमावस्या का अर्थ है जब अमावस्या को सोमवार का दिन मिले तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव यानी महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हिंदू धर्म के अनुसार इस दिन किए गए सभी कार्य और पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी होती है।

पौराणिक कथाओं में सोमवती अमावस्या के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। मान्यता है कि इसी दिन को भगवान शिव ने अपने भक्तों को सर्वोत्तम आशीर्वाद देने का संकल्प लिया था। जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से महादेव की पूजा करता है, उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है। कहा जाता है कि सोमवती अमावस्या को किए गए दान और पुण्य के कार्य सौ गुना फल देते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की आराधना से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और आर्थिक समृद्धि भी बढ़ती है। विशेषकर वह लोग जो अपने जीवन में किसी कष्ट या समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें इस दिन महादेव की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इस दिन का महत्व हजारों वर्षों से हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित है।

सोमवती अमावस्या पर पूजा की विधि

सोमवती अमावस्या पर महादेव की सही तरीके से पूजा करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। सबसे पहले घर के किसी शुद्ध स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को रखें। इसके बाद शिवलिंग को गंगाजल से शुद्ध करें और फिर दूध से धोएं।

पूजा की शुरुआत में गणेश जी का आह्वान करना बहुत महत्वपूर्ण है। फिर क्रमश: शिव परिवार की पूजा करें। महादेव को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य का भोग लगाएं। विशेषकर सफेद फूल जैसे कि सफेद गुलाब, जैस्मिन आदि का उपयोग करें क्योंकि सफेद रंग भगवान शिव का प्रिय है।

शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि एक बिल्वपत्र भी महादेव को समर्पित करने से सभी पाप धुल जाते हैं। इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। यह मंत्र भगवान शिव का सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

पूजा के अंत में आरती करें और भगवान शिव से अपनी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखें। व्रत रखने से आपकी निष्ठा बढ़ती है और पूजा अधिक फलदायी होती है। व्रत खोलने से पहले महादेव को भोग लगाएं और फिर प्रसाद को घर के सदस्यों में बांटें।

शुभ मुहूर्त और दान का महत्व

सोमवती अमावस्या पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का चयन अत्यंत आवश्यक है। इस दिन अमावस्या का समय प्रातःकाल से शाम तक रहता है। कहा जाता है कि अमावस्या की तिथि में किया गया कार्य अधिक प्रभावी होता है। सूर्यास्त के बाद का समय पूजा के लिए विशेषकर शुभ माना जाता है।

इस दिन दान का विशेष महत्व है। सोमवती अमावस्या को किया गया दान साधारण दिनों के दान से सौ गुना अधिक फलदायी माना जाता है। काले तिल, गुड़, खिचड़ी, कपड़े, अनाज आदि का दान करना चाहिए। विशेषकर ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना बहुत लाभकारी माना गया है।

गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन देना इस दिन का मुख्य कर्तव्य है। इसके अलावा किसी अनाथालय या मंदिर को दान देना भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या को किया गया दान सीधे महादेव को समर्पित होता है। इसलिए इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करें।

इस पावन दिन पर परिवार के साथ मंदिर जाएं और महादेव का आशीर्वाद लें। आपके सभी कष्ट दूर हों और जीवन में सुख-शांति बनी रहे, यही कामना है। सोमवती अमावस्या की महिमा अपरंपार है और इसका पालन करने से निश्चित रूप से आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभ मिलते हैं।