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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

भारत में 60% महिलाएं पेट के मोटापे की शिकार! जानें जोखिम

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 6:24 PM ⏱ 1 मिनट 👁 236 views
भारत में 60% महिलाएं पेट के मोटापे की शिकार! जानें जोखिम
📷 Aaj Tak

चिंताजनक आंकड़े: भारत की 60% महिलाएं पेट के मोटापे की चपेट में!

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। हाल ही में 'डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम' जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, देश में 30 से 49 वर्ष की हर 10 में से 6 महिलाएं 'पेट के मोटापे' या एब्डोमिनल ओबेसिटी से पीड़ित हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या कहीं अधिक गंभीर रूप ले रही है।

यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की तरफ इशारा करते हैं। पेट की बढ़ती चर्बी महिलाओं को हार्ट अटैक, टाइप-2 डायबिटीज और अन्य जानलेवा बीमारियों के करीब ले जा रही है। आधुनिक जीवनशैली और खान-पान की बदलती आदतों का यह दुष्परिणाम न केवल मध्यम आयु वर्गीय महिलाओं को प्रभावित कर रहा है, बल्कि युवा लड़कियों और टीनएजर्स में भी तेजी से फैल रहा है।

भारत में 60% महिलाएं पेट के मोटापे की शिकार! जानें जोखिम

कमर का साइज बताता है आपका जोखिम

पेट के मोटापे को समझने के लिए कमर का माप सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, भारतीय महिलाओं के लिए कमर का सुरक्षित माप निम्नलिखित है:

| जोखिम स्तर | महिलाओं के लिए कमर का माप | स्वास्थ्य जोखिम |

-----------------------------------------------------
सुरक्षित80 सेमी से कमन्यूनतम जोखिम
चेतावनी80-88 सेमीमध्यम जोखिम
खतरनाक88 सेमी से अधिकउच्च जोखिम

अगर आपकी कमर का माप 80 सेमी से अधिक है, तो यह चेतावनी का संकेत है। 88 सेमी से ज्यादा माप का मतलब है कि आप हृदय रोग, डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के उच्च जोखिम में हैं।

क्यों महिलाएं अधिक प्रभावित हो रही हैं?

महिलाओं में पेट के मोटापे की बढ़ती समस्या के पीछे कई कारण हैं। हार्मोनल बदलाव इसका मुख्य कारण है, खासकर गर्भावस्था के बाद और रजोनिवृत्ति के दौरान। एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने पर महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ने की प्रवृत्ति होती है।

आधुनिक जीवनशैली भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। घंटों तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव का बढ़ता स्तर और अनियमित खान-पान की आदतें इस समस्या को और भी गंभीर बना रही हैं। खासकर शहरी महिलाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

प्रोसेसड फूड, मिठाइयों का अधिक सेवन, देर रात खाना खाने की आदत और पर्याप्त नींद न लेना भी पेट की चर्बी बढ़ने के मुख्य कारण हैं।

स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

पेट का मोटापा सिर्फ दिखावट की समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी विसेरल फैट कहलाती है, जो आंतरिक अंगों को घेर लेती है और उनकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।

इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण है। हृदय रोग का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बिगाड़ता है और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम (PCOS), फर्टिलिटी की समस्याएं और कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम भी बढ़ जाता है।

पेट की चर्बी कम करने के प्रभावी उपाय

पेट की चर्बी कम करना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल वजन कम करना काफी नहीं है, बल्कि खासकर पेट की चर्बी पर ध्यान देना जरूरी है।

नियमित व्यायाम सबसे प्रभावी तरीका है। कार्डियो एक्सरसाइज के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी है। तेज चलना, दौड़ना, साइक्लिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियां पेट की चर्बी कम करने में कारगर हैं।

आहार में फाइबर युक्त भोजन, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स शामिल करें। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, चीनी और प्रोसेसड फूड से बचें। पानी का पर्याप्त सेवन और 7-8 घंटे की नींद भी बेहद जरूरी है।

तनाव को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीकों का अभ्यास करें। तनाव का हार्मोन कॉर्टिसोल पेट की चर्बी बढ़ाने में योगदान देता है।

यह समय की मांग है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और पेट के मोटापे को नजरअंदाज न करें। नियमित चेकअप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बढ़ती समस्या से निपटा जा सकता है।