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Tuesday, 18 August 2026
राजनीति

स्पीकर ओम बिरला ने पप्पू यादव को दी फटकार

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 11:18 PM ⏱ 1 मिनट 👁 365 views
स्पीकर ओम बिरला ने पप्पू यादव को दी फटकार
📷 Aaj Tak

स्पीकर ओम बिरला का तेवर: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को मिली फटकार

भारतीय संसद में एक बार फिर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का चिर-परिचित अंदाज देखने को मिला। गुरुवार को हुई लोकसभा की कार्यवाही में स्पीकर बिरला ने अपनी मिली-जुली भावनाओं का प्रदर्शन किया। एक तरफ जहां वे मुस्कान के साथ कुछ सदस्यों की तारीफ करते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को जमकर फटकार भी लगाई। स्पीकर ने अपने तीखे शब्दों में पप्पू यादव से कहा, "पप्पू यादव जी, बहुत सीनियर बनते हो और..." यह वाकया संसद की गर्मागर्म बहस के दौरान हुआ।

संसदीय शिष्टाचार पर स्पीकर का जोर

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस दिन सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए कई बार हस्तक्षेप किया। उन्होंने न केवल सदस्यों को रोका-टोका, बल्कि सदन में मर्यादा का पालन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। स्पीकर बिरला का यह व्यवहार दिखाता है कि वे संसदीय परंपराओं और शिष्टाचार को लेकर कितने संजीदा हैं। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि चाहे कोई भी सदस्य हो, अगर वह सदन की मर्यादा का उल्लंघन करेगा तो उसे इसका जवाब देना होगा।

स्पीकर ओम बिरला ने पप्पू यादव को दी फटकार

पप्पू यादव, जो पूर्णिया से निर्दलीय सांसद के रूप में चुने गए हैं, को स्पीकर की इस फटकार का सामना करना पड़ा जब वे संभवतः सदन की कार्यवाही में अनुचित हस्तक्षेप कर रहे थे। स्पीकर ने उन्हें "बहुत सीनियर बनने" की बात कहकर स्पष्ट रूप से समझाया कि सदन में हर सदस्य को अपनी सीमाओं में रहना चाहिए।

तारीफ और तनकीद का संतुलन

दिलचस्प बात यह रही कि स्पीकर ओम बिरला ने केवल फटकार ही नहीं लगाई, बल्कि जहां जरूरी लगा वहां सदस्यों की तारीफ भी की। समाजवादी पार्टी के एक सांसद के प्रदर्शन से प्रभावित होकर उन्होंने कहा, "आप भी एक्सपर्ट हो एमपी साहब।" यह टिप्पणी दिखाती है कि स्पीकर बिरला निष्पक्ष रूप से सदस्यों के योगदान को पहचानते हैं और जहां सराहना की जरूरत होती है, वहां वे पीछे नहीं हटते।

स्पीकर का यह व्यवहार संसदीय लोकतंत्र की एक स्वस्थ परंपरा को दर्शाता है। जहां अनुशासनहीनता को सख्ती से रोका जाता है, वहीं अच्छे योगदान की सराहना भी की जाती है। यह संतुलन बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान की सफलता के लिए जरूरी होता है।

मंत्रियों पर भी नाराजगी

स्पीकर ओम बिरला ने केवल विपक्षी सदस्यों को ही नहीं, बल्कि मंत्रियों पर भी अपनी नाराजगी जताने में संकोच नहीं दिखाया। यह दिखाता है कि वे सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में किसी भी पक्षीय भावना से ऊपर उठकर काम करते हैं। उनका यह रुख संसदीय प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संसद के कामकाज में स्पीकर की भूमिका अत्यंत नाजुक और जिम्मेदारी से भरी होती है। उन्हें न केवल सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना होता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होता है कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का उचित मौका मिले। इस संदर्भ में स्पीकर बिरला का व्यवहार काफी संतुलित और व्यावसायिक लगता है।

संसदीय लोकतंत्र की मजबूती

आज की घटना यह दिखाती है कि भारतीय संसद में अनुशासन और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्पीकर कितने प्रतिबद्ध हैं। पप्पू यादव जैसे अनुभवी राजनेता को फटकार लगाना आसान काम नहीं है, लेकिन स्पीकर बिरला ने यह साबित कर दिया कि वे संसदीय मर्यादा के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यह घटना यह भी दर्शाती है कि हमारे लोकतंत्र में संस्थागत अनुशासन कितना मजबूत है। जहां एक तरफ सदस्यों को अपनी बात रखने की पूरी आजादी है, वहीं दूसरी तरफ इस बात की भी सख्त निगरानी रहती है कि कोई भी व्यक्ति संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचाए।

स्पीकर ओम बिरला का आज का व्यवहार निश्चित रूप से संसदीय इतिहास में दर्ज हो जाएगा। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे न केवल एक कुशल संसदीय अध्यक्ष हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के सच्चे रक्षक भी हैं। उनका चिर-परिचित अंदाज और संतुलित दृष्टिकोण भारतीय संसद की गरिमा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।