🔴 ब्रेकिंग
G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|
Tuesday, 19 May 2026
समाचार

चंबा में निर्माणाधीन सिंयुर पुल ध्वस्त, भूस्खलन की वजह से हुआ हादसा

author
Komal
संवाददाता
📅 07 April 2026, 11:12 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
चंबा में निर्माणाधीन सिंयुर पुल ध्वस्त, भूस्खलन की वजह से हुआ हादसा
📷 aarpaarkhabar.com

चंबा में प्राकृतिक आपदा: निर्माणाधीन सियुर पुल का ध्वस्त होना रावी तट पर बड़ा झटका

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक दुखद घटना सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। भरमौर क्षेत्र के रावी तट पर निर्माणाधीन सियुर पुल भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। यह घटना मंगलवार सुबह हुई और इससे होली से भरमौर तक के महत्वपूर्ण मार्ग की कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हुई है।यह पुल स्थानीय लोगों के लिए एक अहम कड़ी का काम करता था और इसके गिरने से न केवल यातायात बाधित हुआ है बल्कि विकास कार्यों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की है।

भूस्खलन की वजह से हुआ हादसा

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, भारी भूस्खलन के कारण निर्माणाधीन सियुर पुल की नींव कमजोर हो गई थी। रावी नदी के तेज बहाव और मिट्टी के कटाव ने स्थिति को और भी खराब बना दिया। पुल का निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा था और यह लगभग पूरा होने वाला था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने महीनों की मेहनत को मिनटों में तबाह कर दिया।स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी थीं। हालांकि अभी तक इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति काफी चिंताजनक है। निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था।

यातायात व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव

सियुर पुल के ध्वस्त होने से भरमौर-होली मार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। यह मार्ग न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भरमौर चौरासी मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है और यहां साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, वैकल्पिक मार्गों की तलाश की जा रही है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह काम आसान नहीं है। स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि दैनिक जरूरतों का सामान लाना-ले जाना भी मुश्किल हो गया है।

प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य

घटना की जानकारी मिलते ही चंबा जिला प्रशासन ने एक टीम घटनास्थल पर भेजी है। जिला कलेक्टर और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं। प्राथमिकता के आधार पर एक अस्थायी पुल या वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने बताया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नए पुल का निर्माण एक चुनौतीपूर्ण काम होगा। भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इस आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

स्थानीय विधायक ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि आपातकालीन स्थिति में हेलीकॉप्टर सेवा का भी उपयोग किया जा सकता है।

भविष्य की चुनौतियां और समाधान

यह घटना हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को दर्शाती है। जलवायु परिवर्तन के कारण भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे पहाड़ी राज्यों के इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परियोजनाओं के लिए अधिक मजबूत और आपदा प्रतिरोधी डिजाइन की जरूरत होगी।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पुल के पुनर्निर्माण में देरी न की जाए क्योंकि यह उनकी जीविका और दैनिक गतिविधियों से सीधे जुड़ा हुआ है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस परियोजना को प्राथमिकता दी जाएगी।

वर्तमान में राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह घटना एक बार फिर हिमाचल की भौगोलिक चुनौतियों और विकास कार्यों की कठिनाइयों को सामने लाती है।