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Sunday, 05 July 2026
राजनीति

अमेरिका ग्रीन कार्ड नए नियम 2024

author
Komal
संवाददाता
📅 23 May 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 791 views
अमेरिका ग्रीन कार्ड नए नियम 2024
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिका ने बदल दिए ग्रीन कार्ड के नियम

अमेरिका की सरकार ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है। इस नए नियम के अनुसार, विदेशी नागरिकों को अब ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले अमेरिका को छोड़ना अनिवार्य होगा। यह निर्णय उन लाखों प्रवासियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है जो वर्तमान में अमेरिका में रह रहे हैं और वहीं से अपने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना चाहते थे।

इस नए नियम का सबसे अधिक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय छात्रों, एच-1बी वीजा धारकों और भारतीय प्रवासियों पर पड़ेगा। भारतीय नागरिकों के लिए तो यह नियम विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि वे अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्राप्त करने वाले दूसरे सबसे बड़े समूह हैं। इसका मतलब यह है कि लाखों भारतीय जो अमेरिका में काम कर रहे हैं, उन्हें अपनी आजीविका, नौकरी और परिवार को छोड़कर अपने देश वापस जाना होगा।

इस नए कानून को लागू करने का उद्देश्य क्या है, इसे लेकर विभिन्न विचार सामने आ रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका में अवैध आप्रवासन को रोकने और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सख्त बनाने के लिए उठाया गया है। दूसरी ओर, अधिकार कार्यकर्ता इसे भेदभावपूर्ण और कठोर कदम बता रहे हैं।

H-1B वीजा धारकों पर असर

एच-1बी वीजा अमेरिका में काम करने वाले विशेषज्ञों और पेशेवरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषकर भारतीय प्रौद्योगिकी पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य कुशल कार्यबल इसी वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं। वर्तमान में, एच-1बी वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना संभव था जबकि वे अमेरिका में रह रहे हों और काम कर रहे हों।

इस नए नियम के तहत, एच-1बी वीजा धारकों को अपनी नौकरी से इस्तीफा देना होगा और अपने देश वापस जाना होगा, फिर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना होगा। इसका मतलब है कि उन्हें आय का नुकसान होगा, और उनकी परिवारिक योजनाओं पर असर पड़ेगा। यह प्रक्रिया महीनों या सालों तक चल सकती है, जिससे उनके कैरियर में बाधा आएगी।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर मेडिकल प्रोफेशनल्स तक, सभी को यह प्रक्रिया से गुजरना होगा। भारतीय आईटी कंपनियों के कर्मचारी भी इससे प्रभावित होंगे क्योंकि भारतीय कंपनियां अपने कर्मचारियों को अमेरिका में परियोजनाओं पर एच-1बी वीजा पर भेजती हैं।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों का भविष्य अनिश्चित

अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र भी इस नए नियम से गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। अब तक, छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में ही रहकर अपनी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी कर सकते थे और फिर ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। यह प्रक्रिया कई छात्रों को अमेरिका में अपना कैरियर शुरू करने में मदद करती थी।

नए नियम के तहत, छात्रों को भी अमेरिका से बाहर जाना होगा, फिर से देश में आने के लिए आवेदन करना होगा और ग्रीन कार्ड के लिए प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इससे हजारों भारतीय छात्रों के सपने टूट सकते हैं जो अमेरिका में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

यह नियम विशेषकर उन छात्रों को प्रभावित करेगा जो एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों में पढ़ रहे हैं। अमेरिकी विश्वविद्यालय और कंपनियां इन क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी की शिकायत करती हैं, और यह नियम उस कमी को और गहरा कर देगा।

भारतीय समुदाय पर गहरा प्रभाव

अमेरिका में भारतीय समुदाय सबसे बड़े और सफल प्रवासी समूहों में से एक है। भारतीय प्रवासी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और व्यवसाय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। हालांकि, भारतीय मूल के लोगों के लिए ग्रीन कार्ड पाना पहले से ही बहुत कठिन है क्योंकि ग्रीन कार्ड कोटा में देशवार सीमा है।

भारतीयों को ग्रीन कार्ड के लिए अक्सर सालों का इंतजार करना पड़ता है। इस नए नियम से यह इंतजार और भी लंबा हो सकता है। अमेरिका लौटना पड़ेगा, फिर प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिससे प्रक्रिया में और भी विलंब होगा।

भारतीय परिवारों के लिए भी यह एक कठिन फैसला है। माता-पिता को अपने बच्चों को छोड़कर भारत वापस जाना होगा, या पूरे परिवार को वापस जाना होगा। इससे पारिवारिक विघटन की समस्या बढ़ेगी।

भविष्य और संभावित समाधान

इस नए नियम के विरुद्ध कई संगठन और अधिकार समूह आवाज उठा रहे हैं। अमेरिकी कंपनियों को भी इस नियम से समस्या है क्योंकि उन्हें प्रतिभा की कमी का सामना करना पड़ेगा। कई राजनेता और व्यावसायिक नेता इस नियम को संशोधित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

यह देखना होगा कि अमेरिकी सरकार इस नियम को कैसे लागू करती है और क्या भविष्य में कोई संशोधन होता है। अभी के लिए, लाखों विदेशी नागरिकों को इस नई स्थिति के साथ तालमेल बैठाना होगा। भारतीय समुदाय, विशेषकर अमेरिका में काम कर रहे और अध्ययन कर रहे युवाओं को अपनी योजनाओं को फिर से बनाना होगा और अमेरिका में अपने भविष्य के बारे में गंभीरता से विचार करना होगा।