असम चुनाव: PM मोदी की दो रैलियां, प्रियंका का असमिया वादा
असम चुनाव: तेज हुई सियासी जंग, PM मोदी बोले हमला, प्रियंका ने किया असमिया पहचान का वादा
असम विधानसभा चुनावों में राजनीतिक गर्माहट अपने चरम पर पहुंच गई है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन में दो अलग-अलग रैलियों को संबोधित करके भाजपा के चुनावी अभियान को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया। वहीं कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा ने नाजिरा में आयोजित जनसभा में असमिया संस्कृति और पहचान को बचाने का वादा करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की नीतियों पर जमकर हमला बोला।
राज्य की राजनीतिक फिजा इस बात से समझी जा सकती है कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता मैदान में उतर आए हैं और वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
PM मोदी का दोहरा हमला, कांग्रेस पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्वनाथ में आयोजित पहली रैली में कांग्रेस की नीतियों पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने असम की विकास यात्रा को रोकने का हर संभव प्रयास किया है। "जब भी असम आगे बढ़ने की कोशिश करता है, कांग्रेस उसके रास्ते में रोड़े अटकाने का काम करती है," PM मोदी ने कहा।
दूसरी रैली में उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में असम ने विकास के हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की वापसी ही असम के उज्जवल भविष्य की गारंटी है।
PM मोदी ने खासतौर पर कांग्रेस के "घुसपैठ" के मुद्दे पर रुख को लेकर सवाल उठाए और कहा कि केवल भाजपा ही असम की सुरक्षा और अस्मिता की रक्षा कर सकती है।
प्रियंका गांधी का असमिया पहचान वाला दांव
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नाजिरा की जनसभा में भावुक अंदाज में असमिया संस्कृति और पहचान को बचाने का वादा किया। उन्होंने कहा, "असम की माटी, यहां की भाषा, संस्कृति और पहचान हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। कांग्रेस इन सबकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
प्रियंका ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की नीतियों को असफल करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने केवल वादे किए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं दिखाया है। उन्होंने युवाओं के बेरोजगारी के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता देगी।
चुनावी रणनीति में दिखी नई चाल
दोनों पार्टियों की चुनावी रणनीति में स्पष्ट अंतर दिख रहा है। भाजपा विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय मुद्दों को अपना हथियार बना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव पहले से कहीं अधिक दिलचस्प होगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की लोकप्रियता बनाम कांग्रेस की पारंपरिक पकड़ के बीच असली मुकाबला होगा।
आने वाले दिनों की रणनीति
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी कई बड़े नेताओं के असम आने की संभावना है। भाजपा की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे की योजना है, वहीं कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी के भी जल्द आने की उम्मीद है।
स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव भी इस चुनाव में दिखाई देगा। असमिया अस्मिता, विकास, रोजगार और सुरक्षा जैसे मुद्दे मतदाताओं के मन में मुख्य सवाल हैं, जिनका जवाब दोनों पार्टियां अपने-अपने तरीके से देने की कोशिश कर रही हैं।
यह चुनाव न केवल असम के भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि पूर्वोत्तर की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। मतदाता अब अपना निर्णय लेने की दिशा में हैं।




