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Tuesday, 19 May 2026
अपराध

31 साल जेल के बाद वकील बनी नई कहानी

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Komal
संवाददाता
📅 29 April 2026, 7:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 837 views
31 साल जेल के बाद वकील बनी नई कहानी
📷 aarpaarkhabar.com

भारतीय न्याय व्यवस्था में कई बार ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो मानवीय संघर्ष और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती हैं। एक ऐसी ही अद्भुत कहानी है ए.जी. पेरारिवलन की, जिन्होंने 31 साल जेल में रहने के बाद अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे दृढ़ संकल्प और सही दिशा कोई भी मुश्किल को आसान बना सकते हैं।

पेरारिवलन को 1991 की राजीव गांधी हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित अपराधों में से एक इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। तमिलनाडु के इस निवासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। लेकिन पेरारिवलन ने अपनी सजा को अपनी मंजिल बनाने के बजाय एक नई शुरुआत का अवसर माना।

जेल की दीवारों के अंदर नई सीख

जेल में लंबे समय तक कैद रहने के दौरान पेरारिवलन ने अपने समय का सदुपयोग किया। उन्होंने महसूस किया कि शिक्षा ही वह एकमात्र माध्यम है जो उन्हें अपनी गलतियों को सुधारने और समाज में योगदान देने का रास्ता दिखा सकता है। जेल की सीमित सुविधाओं के बावजूद, पेरारिवलन ने कानून की पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया।

जेल प्रशासन ने उनके अध्ययन के प्रयासों में सहायता की। पेरारिवलन ने विभिन्न कानूनी ग्रंथों को पढ़ा, न्याय व्यवस्था को समझा और कानूनी प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन किया। 31 साल की लंबी अवधि में उन्होंने न केवल अपनी शिक्षा पूरी की, बल्कि कानून के विभिन्न पहलुओं में विशेषज्ञता भी हासिल की। उनका यह संकल्प और लगन किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है।

पेरारिवलन की यह यात्रा सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी। जेल में रहते हुए उन्होंने अन्य कैदियों को कानूनी सलाह देनी शुरू कर दी। वे जेल के लोगों के लिए एक अनौपचारिक सलाहकार बन गए। यह काम उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी देता रहा और साथ ही उनके कौशल को निखारता रहा। जेल की सीमाबद्ध दुनिया में भी उन्होंने अपने ज्ञान को साझा करने का काम किया।

वकील बनने का सफर और चुनौतियाँ

जेल से रिहाई के बाद पेरारिवलन को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। एक दोषी व्यक्ति के रूप में वकालत के पेशे में प्रवेश करना आसान नहीं था। कानूनी समुदाय में उनके प्रवेश को लेकर कई प्रश्नचिह्न थे। लेकिन पेरारिवलन के दृढ़ निश्चय के सामने ये सभी बाधाएँ कम पड़ गईं।

मद्रास हाई कोर्ट में उनकी वकालत की स्वीकृति एक ऐतिहासिक निर्णय साबित हुई। यह केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं थी, बल्कि यह साबित करता है कि भारतीय न्याय व्यवस्था सुधार और पुनर्वास में विश्वास रखती है। पेरारिवलन अब वकील के रूप में काम करते हुए वंचितों और गरीबों को कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हैं।

उनके वकालत कार्यालय का दृश्य ही कुछ अलग है। यहाँ आने वाले लोगों को पेरारिवलन की कहानी जानने के बाद विशेष प्रकार का विश्वास और आशा मिलती है। वे जानते हैं कि उनका वकील एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने जीवन की सबसे कठोर परिस्थितियों से जूझ कर अपने सपनों को पंख लगाए हैं।

समाज में नई प्रेरणा और संदेश

पेरारिवलन की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह एक सामाजिक संदेश देते हैं। वे दिखाते हैं कि गलतियों से इंकार करना समाज में वापसी का पहला कदम है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय जेल प्रणाली में सुधार की संभावना है और कैदियों को पुनः समाज में शामिल करने की क्षमता है।

जेल सुधार के क्षेत्र में पेरारिवलन की सफलता नीति निर्माताओं के लिए भी एक संदेश है। यह दर्शाता है कि यदि सही माहौल और शिक्षा के अवसर दिए जाएं तो कोई भी व्यक्ति अपने आप को सुधार सकता है। पेरारिवलन जैसे लोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।

आज पेरारिवलन मद्रास हाई कोर्ट में अपनी वकालत का अभ्यास करते हुए उन लोगों की मदद करते हैं जिन्हें न्याय की जरूरत है। वे विचारधीन कैदियों के लिए भी काम करते हैं और जेल सुधार में अपना योगदान देते हैं। उनकी यह भूमिका केवल कानूनी सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक प्रेरक और सामाजिक कार्यकर्ता भी बन गए हैं।

पेरारिवलन की कहानी आधुनिक भारत की न्याय व्यवस्था में एक चमकता हुआ उदाहरण है। यह बताती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका अतीत कितना भी गहरा हो, अपनी मेहनत और लगन से एक सम्मानजनक भविष्य बना सकता है। उनकी यह यात्रा प्रत्येक उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो अपनी परिस्थितियों से लड़ना चाहता है और जीवन में कुछ महत्वपूर्ण करना चाहता है।