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Saturday, 04 July 2026
समाचार

दारा सिंह हनुमान रोल बलिदान कहानी पूरी जानकारी

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Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 9:50 AM ⏱ 1 मिनट 👁 608 views
दारा सिंह हनुमान रोल बलिदान कहानी पूरी जानकारी
📷 Aaj Tak

जब दारा सिंह ने हनुमान बनने के लिए किया अविश्वसनीय बलिदान

भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे यादगार कहानियों में से एक है दारा सिंह का हनुमान बनना। लेजेंडरी एक्टर, राजनेता और पहलवान दारा सिंह ने 1986 में बीआर चोपड़ा की रामायण में हनुमान का किरदार निभाकर टेलीविजन इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में लिख दिया। लेकिन इस महान चरित्र को जीवंत बनाने के लिए उन्होंने जो त्याग और बलिदान किया, वह आज भी प्रेरणादायक है।

घंटों भूख सहना पड़ा दारा सिंह को

हनुमान का किरदार निभाना दारा सिंह के लिए कोई आसान काम नहीं था। उस जमाने में आज की तरह एडवांस मेकअप तकनीक नहीं थी, इसलिए हर दिन घंटों मेकअप में बिताना पड़ता था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मेकअप के दौरान और शूटिंग के बीच वे कुछ भी खा-पी नहीं सकते थे। मुंह पर लगे भारी मेकअप की वजह से खाना-पीना असंभव था, जिससे उन्हें घंटों भूखे-प्यासे रहना पड़ता था।

दारा सिंह हनुमान रोल बलिदान कहानी पूरी जानकारी

इस चुनौती से निपटने के लिए दारा सिंह ने अपनी दिनचर्या ही बदल दी। वे सुबह जल्दी उठकर खाना खा लेते थे और फिर शूटिंग खत्म होने तक कुछ नहीं खाते थे। यह सिलसिला कई महीनों तक चला।

नॉनवेज छोड़कर बने पूर्ण शाकाहारी

हनुमान जैसे पवित्र चरित्र को निभाने के लिए दारा सिंह ने अपनी जीवनशैली में मौलिक बदलाव किए। सबसे बड़ा बदलाव यह था कि उन्होंने नॉनवेज खाना पूरी तरह छोड़ दिया। एक पहलवान के रूप में दारा सिंह की डाइट में मांस-मछली शामिल था, लेकिन हनुमान की भूमिका के दौरान वे पूर्ण शाकाहारी बन गए।

यह बदलाव केवल शूटिंग के दिनों तक सीमित नहीं था। दारा सिंह ने इसे अपनी पूरी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। उनका मानना था कि हनुमान जैसे दिव्य चरित्र को निभाने के लिए शुद्ध आचार-विचार जरूरी है।

पूंछ की वजह से बैठना था मुश्किल

शारीरिक चुनौतियां भी कम नहीं थीं। हनुमान की पूंछ का वजन कई किलो था, जिससे दारा सिंह को चलने-फिरने में बहुत परेशानी होती थी। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वे आराम से बैठ नहीं सकते थे। पूंछ के कारण उन्हें खड़े रहना पड़ता था या फिर बहुत सावधानी से बैठना पड़ता था।

शूटिंग के लंबे घंटों के दौरान यह एक बड़ी परेशानी थी। कई बार तो उन्हें दर्द भी होता था, लेकिन वे कभी शिकायत नहीं करते थे। उनकी प्रोफेशनलिज्म और डेडिकेशन देखकर पूरी टीम हैरान रह जाती थी।

दर्शकों का प्रेम और सम्मान

दारा सिंह की मेहनत व्यर्थ नहीं गई। रामायण प्रसारित होने के बाद वे घर-घर में हनुमान के रूप में पूजे जाने लगे। लोग उन्हें सड़कों पर देखकर हनुमान समझकर माथे पर तिलक लगाते थे और आशीर्वाद मांगते थे। यह दृश्य आम था जब दर्शक उनके चरणों में सिर झुकाते थे।

दारा सिंह हमेशा कहते थे कि हनुमान का किरदार उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण अनुभव था। उन्होंने इस भूमिका को सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि भक्ति के रूप में लिया था।

एक युग का अंत

दारा सिंह का हनुमान आज भी टेलीविजन इतिहास में अमर है। उनके बाद कई एक्टरों ने हनुमान का किरदार निभाया, लेकिन दारा सिंह की छवि ही लोगों के दिमाग में बसी हुई है। उनका यह किरदार दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपनी कला के लिए हर तरह का बलिदान देने को तैयार रहता है।

आज के समय में जब एक्टर्स को थोड़ी सी भी परेशानी होती है तो वे शिकायत करने लगते हैं, ऐसे में दारा सिंह का उदाहरण प्रेरणादायक है। उन्होंने दिखाया कि असली कलाकार वो होता है जो अपने किरदार के साथ पूरी तरह जी जाता है।