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Tuesday, 19 May 2026
राजनीति

दिल्ली सरकार ने जेट फ्यूल पर VAT 18% घटाया

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Komal
संवाददाता
📅 17 May 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
दिल्ली सरकार ने जेट फ्यूल पर VAT 18% घटाया
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली सरकार ने एविएशन इंडस्ट्री को बड़ी राहत देते हुए जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले वैट में भारी कटौती की है। यह फैसला एयरलाइन कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा क्योंकि इससे उनके परिचालन खर्च में काफी कमी आएगी। सरकार ने वैट की दर को पहले के 25% से घटाकर सिर्फ 7% कर दिया है, जिसका मतलब है कि 18% का सीधा कटौती एयरलाइन्स को मिलेगी।

यह निर्णय महाराष्ट्र सरकार के समान कदम का अनुसरण करते हुए लिया गया है। महाराष्ट्र पहले ही अपने राज्य में ATF पर वैट को 5% से कम रखा हुआ था। दिल्ली सरकार ने अब इसी दिशा में अपना रुख किया है और अपने राज्य में भी समान दर को लागू किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे ATF की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। इस परिस्थिति में दिल्ली सरकार का यह कदम एयरलाइन इंडस्ट्री की चुनौतियों को समझते हुए लिया गया है।

दिल्ली की एयरलाइन इंडस्ट्री को मिलेगा कितना लाभ

जेट फ्यूल एयरलाइन कंपनियों के कुल परिचालन लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, एयरलाइन्स अपने कुल खर्च का 30 से 35 प्रतिशत तक केवल ईंधन पर खर्च करती हैं। इसलिए VAT दर में 18% की कटौती का अर्थ है कि एयरलाइन्स को बड़ी बचत होगी। दिल्ली देश की राजधानी है और यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दक्षिण एशिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। इस हवाई अड्डे से संचालित होने वाली सभी एयरलाइन्स को इस कर कटौती का लाभ मिलेगा।

यह निर्णय न केवल बड़ी एयरलाइन्स बल्कि छोटी और मध्यम श्रेणी की एयरलाइन्स के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। कर में कमी के साथ-साथ एयरलाइन्स अपनी सेवाओं की मूल्य निर्धारण में लचीलापन ला सकती हैं। इससे यात्रियों को भी टिकट के दामों में कमी देखने को मिल सकती है। साथ ही, एयरलाइन्स अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए इस बचत को निवेश कर सकती हैं।

वैश्विक परिस्थितियां और भारतीय एयरलाइन्स की चुनौतियां

पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया है। कोविड-19 महामारी के बाद जब हवाई यातायात फिर से शुरू हुआ, तो तेल की कीमतें काफी बढ़ गईं। यह वृद्धि एयरलाइन्स के लिए एक बड़ी समस्या बन गई। भारतीय एयरलाइन्स, विशेषकर वे जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करती हैं, को ATF की बढ़ती कीमतों के कारण अपनी लागत में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ा है।

भारतीय एयरलाइन्स सेक्टर को कर संबंधी मुद्दों से जूझना पड़ रहा था। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग VAT दरें लागू होने से एयरलाइन्स को जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। दिल्ली सरकार के इस कदम से न केवल एयरलाइन्स को सीधा लाभ मिलेगा बल्कि यह अन्य राज्यों को भी समान कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है। जब अधिक से अधिक राज्य ATF पर कर को कम करेंगे, तो एयरलाइन्स इंडस्ट्री अधिक सुदृढ़ होगी।

भविष्य के लिए संभावनाएं और अपेक्षाएं

दिल्ली सरकार के इस निर्णय से एयरलाइन्स इंडस्ट्री में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। कर कटौती से न केवल बड़ी एयरलाइन्स बल्कि क्षेत्रीय एयरलाइन्स को भी मजबूत आधार मिलेगा। क्षेत्रीय एयरलाइन्स भारत के दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन्हें कर में कमी से प्रोत्साहन मिलेगा और वे अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकेंगी।

इसके अलावा, कर कटौती से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। एयरलाइन्स जब अपनी मजबूत आर्थिक स्थिति में होंगी, तो वे अपने कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं दे सकेंगी और नई भर्तियां भी कर सकेंगी। दिल्ली के हवाई अड्डे पर कई हजार लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं। एयरलाइन्स इंडस्ट्री का विकास इन सभी के लिए अवसर पैदा करेगा।

दिल्ली सरकार का यह कदम एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। यह दर्शाता है कि सरकार एयरलाइन्स इंडस्ट्री की चुनौतियों को समझती है और उन्हें दूर करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। भविष्य में अन्य राज्यें भी यदि समान कदम उठाएं, तो भारतीय एयरलाइन्स सेक्टर और भी मजबूत होगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा क्योंकि शक्तिशाली विमान परिवहन नेटवर्क देश के विकास के लिए जरूरी है।