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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

हनुमान जयंती 2026: देवताओं के भी संकटमोचक बजरंगबली

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 10:09 AM ⏱ 1 मिनट 👁 907 views
हनुमान जयंती 2026: देवताओं के भी संकटमोचक बजरंगबली
📷 Aaj Tak

देवताओं के भी रक्षक हैं बजरंगबली - हनुमान जयंती 2026

कल यानी 2 अप्रैल को देशभर में हनुमान जयंती का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। लाखों भक्त अपने प्रिय बजरंगबली के मंदिरों में पहुंचकर उनसे अपने कष्टों का निवारण मांगेंगे। हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे सिर्फ इंसानों के ही नहीं, बल्कि देवताओं के भी संकटमोचक हैं? आज हम आपको बताएंगे कि कैसे अंजनि पुत्र हनुमान ने न सिर्फ मनुष्यों की, बल्कि कई महान योद्धाओं और देवताओं की भी मदद की है।

लक्ष्मण के प्राणदाता बने बजरंगबली

रामायण में वर्णित सबसे प्रसिद्ध घटना है जब लक्ष्मण जी मेघनाद के शक्ति बाण से मूर्छित हो गए थे। उस समय वैद्य सुषेण ने बताया कि केवल संजीवनी बूटी से ही लक्ष्मण का इलाज संभव है। रात भर का समय था और हिमालय से संजीवनी लाना असंभव लग रहा था। तब हनुमान जी ने अपना विशाल रूप धारण किया और पूरे द्रोणागिरि पर्वत को उठाकर ले आए।

हनुमान जयंती 2026: देवताओं के भी संकटमोचक बजरंगबली

इस घटना से स्पष्ट होता है कि हनुमान जी का बल और भक्ति इतनी महान है कि वे असंभव को भी संभव बना देते हैं। लक्ष्मण जैसे महान योद्धा के प्राण बचाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे केवल साधारण भक्तों के ही नहीं, बल्कि श्री राम के परिवार के भी रक्षक हैं।

सुग्रीव की मदद और मित्रता

जब श्री राम वन में सीता माता की खोज कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई। सुग्रीव के भाई बाली ने उसका राज्य छीन लिया था और उसकी पत्नी को भी अपने पास रख लिया था। सुग्रीव के इस संकट को देखकर हनुमान जी ने ही श्री राम से उसकी मित्रता कराई थी।

हनुमान जी की बुद्धिमत्ता और कूटनीति से ही राम-सुग्रीव मित्रता संभव हुई। उन्होंने न केवल सुग्रीव की समस्या का समाधान कराया, बल्कि श्री राम को एक विश्वसनीय सहायक भी दिलाया। यह घटना दिखाती है कि हनुमान जी कैसे दूरदर्शी सोच के साथ हर समस्या का हल निकालते हैं।

शनि देव को भी मिली मुक्ति

एक कम प्रचलित लेकिन महत्वपूर्ण कथा के अनुसार, जब हनुमान जी लंका जा रहे थे तो रास्ते में उनकी मुलाकात शनि देव से हुई। शनि देव रावण की कैद में थे और बहुत कष्ट झेल रहे थे। हनुमान जी ने शनि देव को उस कैद से मुक्त कराया।

कृतज्ञता के भाव में शनि देव ने हनुमान जी को वरदान दिया कि उनके भक्तों पर शनि की दशा का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यही कारण है कि आज भी लोग शनि की साढ़ेसाती या दशा से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा करते हैं। यह घटना बताती है कि हनुमान जी की दया केवल मनुष्यों पर ही नहीं, बल्कि देवताओं पर भी है।

महाभारत में अर्जुन के रक्षक

महाभारत काल में भी हनुमान जी का महत्वपूर्ण योगदान था। जब अर्जुन को अपने पराक्रम पर अहंकार हो गया था, तब हनुमान जी ने एक साधारण बंदर का रूप धारण करके उसे सबक सिखाया था। उन्होंने अर्जुन को दिखाया कि श्री राम के समय का कोई भी योद्धा द्वापर युग के योद्धाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली था।

इसके अलावा, कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान हनुमान जी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान रहे। उनकी उपस्थिति से ही अर्जुन का रथ सुरक्षित रहा और युद्ध में विजय मिली। युद्ध समाप्ति के बाद जब श्री कृष्ण ने हनुमान जी से रथ छोड़ने को कहा, तब रथ जलकर राख हो गया, जो दिखाता था कि वह कितने आक्रमणों को झेल चुका था।

संकटमोचक के रूप में आज भी प्रासंगिक

आज के युग में भी हनुमान जी की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। चाहे व्यक्तिगत समस्याएं हों, व्यावसायिक चुनौतियां हों या पारिवारिक कलह, लाखों लोग अपने संकटमोचक से मदद मांगते हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिरों में भारी भीड़ देखी जा सकती है।

हनुमान जयंती का यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि जिस तरह उन्होंने अतीत में कई महान व्यक्तित्वों की मदद की, वैसे ही आज भी वे अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते रहते हैं। उनकी भक्ति, बल, और बुद्धि का संयोजन ही उन्हें सच्चा संकटमोचक बनाता है।

इस हनुमान जयंती पर जब आप बजरंगबली के दर्शन करें, तो यह जरूर याद रखें कि आप किसी साधारण देवता के सामने नहीं, बल्कि ऐसे महावीर के सामने खड़े हैं जिन्होंने देवताओं से लेकर मनुष्यों तक, सभी के संकट हरे हैं। जय बजरंगबली!