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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

चीन के खिलाफ भारत की रणनीति: वियतनाम को ब्रह्मोस

author
Komal
संवाददाता
📅 31 May 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 896 views
चीन के खिलाफ भारत की रणनीति: वियतनाम को ब्रह्मोस
📷 aarpaarkhabar.com

सिंगापुर में आयोजित शांगरी ला डायलॉग के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल समझौता संभवतः पूरा कर लिया है। यह समझौता भारत की क्षेत्रीय रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही, इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस डील अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह विकास भारत के रक्षा राजनीति में एक नया मोड़ लाता है। भारत अब अपने विश्वस्त और मित्र देशों के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने के लिए तैयार है। यह कदम भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करता है।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सबसे उन्नत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे भारत और रूस के सहयोग से विकसित किया गया है। यह मिसाइल लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। इसकी गति सुपरसोनिक है, जिसका मतलब है कि यह आवाज की गति से भी तेज चल सकती है। इसके कारण दुश्मन की रक्षा प्रणाली को इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल को जल, थल और वायु सभी प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। इसकी सटीकता और विनाशकारी क्षमता बेजोड़ है। भारत के लिए यह मिसाइल एक शक्तिशाली हथियार साबित हुई है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शांगरी ला डायलॉग में कहा कि भारत विश्वास और मैत्री के आधार पर अपनी रक्षा तकनीक साझा करता है। भारत के पास ऐसी तकनीकें हैं जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती हैं। वियतनाम और इंडोनेशिया दोनों भारत के महत्वपूर्ण सामरिक साथी हैं। ये देश दक्षिण चीन सागर में स्थित हैं, जहां चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत की ब्रह्मोस मिसाइल इन देशों को चीन के विस्तारवादी नीति के खिलाफ मजबूत बनाएगी।

वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल का महत्व

वियतनाम दक्षिण पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण देश है। इसकी सीमाएं चीन से लगती हैं। 1979 में चीन और वियतनाम के बीच एक युद्ध भी हुआ था। दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के कई द्वीप और तेल के भंडार हैं। चीन इन पर भी अपना दावा करता है। ब्रह्मोस मिसाइल वियतनाम को अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगी। यह मिसाइल वियतनाम को समुद्र और जमीन दोनों जगहों पर मजबूत बनाएगी। वियतनाम अपनी नौसेना को और प्रभावी बना सकेगा। इससे भारत-वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग में भी बढ़ोतरी होगी। दोनों देश एक-दूसरे के विश्वस्त साथी के रूप में उभरेंगे।

इंडोनेशिया के साथ रक्षा साझेदारी

इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है। यह एक द्वीपसमूह है जिसमें हजारों द्वीप हैं। इंडोनेशिया की नौसेना को मजबूत करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। ब्रह्मोस मिसाइल इंडोनेशिया को अपनी समुद्री रक्षा को सशक्त करने में मदद देगी। इंडोनेशिया चीन के साथ समुद्री विवादों का सामना कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल इंडोनेशिया को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम बनाएगी। भारत और इंडोनेशिया के बीच सामरिक साझेदारी और मजबूत होगी। यह क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को और प्रभावी बनाएगा।

भारत की भू-राजनीतिक रणनीति

भारत की चीन के खिलाफ रणनीति मजबूत हो रही है। भारत क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। यह भारत की "संतुलन की नीति" का हिस्सा है। भारत चाहता है कि एशिया में कोई एक देश अत्यधिक शक्तिशाली न बन जाए। ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात भारत की इसी रणनीति को आगे बढ़ाता है। भारत अपने सहयोगी देशों को मजबूत कर रहा है ताकि वे चीन के दबाव को सहन कर सकें। यह कदम भारत की वैश्विक शक्ति और प्रभाव को बढ़ाता है। भारत अब केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए काम कर रहा है। यह भारत की परिपक्व और जिम्मेदार नीति का सबूत है। भारत का यह कदम एशियाई राजनीति में एक नया संतुलन लाएगा। दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।