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Friday, 17 July 2026
राजनीति

UAE पर ईरान का दूसरा दिन ड्रोन मिसाइल अटैक

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Komal
संवाददाता
📅 06 May 2026, 7:17 AM ⏱ 1 मिनट 👁 641 views
UAE पर ईरान का दूसरा दिन ड्रोन मिसाइल अटैक
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया की भूराजनीतिक स्थिति एक बार फिर से संकटपूर्ण हो गई है। युद्धविराम के दौरान भी ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर लगातार दूसरे दिन ड्रोन और मिसाइलों से जानलेवा हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में तनाव को नए ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। सोमवार को जहां UAE ने दावा किया था कि उसने ईरान की ओर से दागी गई सभी मिसाइलों और ड्रोनों को सफलतापूर्वक रोक दिया है, वहीं अब मंगलवार को ईरान ने फिर से अपने हमले का सिलसिला जारी रखा है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयास कर रहा है। लेकिन ईरान के लगातार हमलों से यह स्पष्ट है कि वह किसी भी युद्धविराम समझौते को मानने के लिए तैयार नहीं है। पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में जो तनाव की स्थिति बनी थी, उससे बचने के लिए कई देश प्रयास कर रहे थे। लेकिन ईरान के इन हमलों ने सभी प्रयासों को व्यर्थ कर दिया है।

सोमवार को UAE पर हुए हमले में ईरान ने 15 मिसाइलें और 4 ड्रोन दागे थे। UAE की सेना ने इन सभी को रोकने का दावा किया था। UAE के रक्षा अधिकारियों के अनुसार, उनके एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से सक्रिय थे और उन्होंने प्रत्येक आने वाली मिसाइल और ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। लेकिन अब मंगलवार को फिर से ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए हमला किया है।

ईरान के हमलों का कारण और पृष्ठभूमि

ईरान और इसराइल के बीच चल रहे विवाद के कारण ही पूरा क्षेत्र एक युद्ध क्षेत्र बन गया है। गाजा पर इसराइल के सैन्य अभियान से पूरे पश्चिम एशिया में क्रोध की लहर दौड़ गई है। ईरान, जो इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति है, ने इसराइल के खिलाफ अपनी नीति को आक्रामक बना दिया है। UAE चूंकि इसराइल के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए जाना जाता है, इसलिए ईरान UAE को भी अपने हमलों का निशाना बना रहा है।

इसराइल-हमास युद्ध के दौरान ईरान ने कई बार अपने इरादे स्पष्ट किए हैं कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई के लिए तैयार है। पिछले महीनों में ईरान ने अपनी क्षेत्रीय शक्तियों जैसे हूती आंदोलन और हेजबुल्ला को सशक्त किया है। ये सभी ताकतें अब ईरान के निर्देश के तहत काम कर रही हैं। UAE पर होने वाले इन हमलों को इसी बड़े संदर्भ में देखा जा सकता है।

एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता और चुनौतियां

UAE की सेना के पास अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इसमें पैट्रियट सिस्टम, टीएचएडी और अन्य उन्नत तकनीकें शामिल हैं। ये सभी सिस्टम आकाश में आने वाले किसी भी खतरे को पहचानने और उसे नष्ट करने में सक्षम हैं। सोमवार को UAE ने जो 100 प्रतिशत सफलता का दावा किया, वह इन्हीं उन्नत सिस्टमों की वजह से संभव हुआ।

लेकिन जब भी किसी क्षेत्र पर लगातार हमले होते हैं, तो एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है। मंगलवार को फिर से हमला होने से UAE के रक्षा कर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता रखनी पड़ी होगी। ड्रोन और मिसाइलों का संयुक्त हमला बहुत ही मुश्किल होता है क्योंकि इसमें साथ-साथ कई निशाने होते हैं। एयर डिफेंस सिस्टम को इन सभी को एक साथ संभालना पड़ता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और भविष्य की चिंताएं

UAE पर होने वाले इन हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देश और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां इस स्थिति को गंभीरता से ले रही हैं। सभी का मानना है कि ईरान की इस आक्रामक नीति से क्षेत्र में और अस्थिरता आ सकती है।

अगर ईरान के ये हमले जारी रहते हैं, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ जाएगी। इसके अलावा, अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो इसमें अन्य अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

मौजूदा समय में सभी पक्षों को समझदारी और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। किसी भी तरह का सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। UAE सरकार अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहते हुए भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के माध्यम से ईरान से बातचीत का प्रयास कर सकती है। यह समय शांति के लिए सकारात्मक कदमों का है, न कि और अधिक तनाव बढ़ाने का।