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Wednesday, 20 May 2026
अपराध

कानपुर किडनी रैकेट: एक कॉल से खुला करोड़ों का काला राज

author
Komal
संवाददाता
📅 07 April 2026, 1:12 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
कानपुर किडनी रैकेट: एक कॉल से खुला करोड़ों का काला राज
📷 Aaj Tak

कानपुर किडनी रैकेट: एक फोन कॉल से खुला करोड़ों के धोखाधड़ी का जाल

कानपुर में एक सामान्य फोन कॉल ने देश के सबसे बड़े किडनी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। जो मामला एक व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ था, वह आज करोड़ों रुपए के अवैध ऑर्गन ट्रेड नेटवर्क का रूप ले चुका है। इस घटना ने न केवल पूरे राज्य बल्कि देश भर में चिकित्सा क्षेत्र की नैतिकता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

कानपुर पुलिस के पास आई एक फोन कॉल ने इस पूरे काले धंधे का भांडाफोड़ किया है। फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि शहर के एक निजी अस्पताल में धोखाधड़ी से उसकी किडनी निकाल ली गई है। इस शिकायत के बाद पुलिस की तुरंत कार्रवाई से एक ऐसे अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसमें 60 से अधिक गैरकानूनी किडनी प्रत्यारोपण किए गए हैं।

कानपुर किडनी रैकेट: एक कॉल से खुला करोड़ों का काला राज

पुलिस की तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारियां

शिकायत मिलते ही कानपुर पुलिस की विशेष टीम ने संदिग्ध अस्पताल पर छापेमारी की। प्राथमिक जांच में ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस ने पाया कि यह अस्पताल एक व्यवस्थित ऑर्गन ट्रेड नेटवर्क का केंद्र था, जहां गरीब और असहाय लोगों को झूठे वादों के जाल में फंसाकर उनकी किडनी निकाली जा रही थी।

अब तक की जांच में कई डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और दलाल गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट कई सालों से चल रहा था और इसमें स्थानीय के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी लोग शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य रूप से अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधन के लोग और बिचौलिए शामिल हैं जो गरीब लोगों को अस्पताल तक लाने का काम करते थे।

चार वीडियो से मिले महत्वपूर्ण सुराग

इस मामले में पुलिस को चार महत्वपूर्ण वीडियो मिले हैं जो इस रैकेट की गंभीरता को दर्शाते हैं। ये वीडियो न केवल अवैध प्रत्यारोपण की पुष्टि करते हैं बल्कि इस बात का भी प्रमाण देते हैं कि यह काम कितनी व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन वीडियो में अस्पताल के अंदर की गतिविधियां, मरीजों के साथ किए जा रहे धोखाधड़ी के सबूत और दलालों की बातचीत रिकॉर्ड है। ये वीडियो साक्ष्य इस मामले को और भी मजबूत बनाते हैं और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आधार प्रदान करते हैं।

धोखाधड़ी का तरीका और पीड़ितों की स्थिति

पुलिस की जांच में पता चला है कि इस रैकेट में शामिल लोग एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहे थे। गरीब और जरूरतमंद लोगों को पहले दलाल संपर्क करते थे। उन्हें बताया जाता था कि वे मुफ्त इलाज या छोटी-मोटी सर्जरी के लिए अस्पताल आ सकते हैं।

जब ये लोग अस्पताल पहुंचते थे, तो उन्हें बेहोश करके बिना सहमति के उनकी किडनी निकाल ली जाती थी। मरीज को बाद में बताया जाता था कि उनकी कोई और सर्जरी हुई है। इस तरह से धोखाधड़ी का यह सिलसिला चलता रहा।

| मामले का विवरण | संख्या/जानकारी |

------------------------------------
कुल अवैध ट्रांसप्लांट60+
गिरफ्तार आरोपीविभिन्न (डॉक्टर, दलाल)
मुख्य साक्ष्य4 वीडियो
रैकेट की अवधिकई वर्ष
प्रभावित राज्यउत्तर प्रदेश व अन्य

अवैध ऑर्गन ट्रेड नेटवर्क की व्यापकता

यह मामला केवल कानपुर तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिलते हैं कि यह नेटवर्क काफी व्यापक था और इसकी शाखाएं अन्य शहरों तक भी फैली हुई थीं। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट से करोड़ों रुपए का अवैध कारोबार हुआ है।

इस नेटवर्क में शामिल लोग न केवल किडनी बल्कि अन्य अंगों का भी व्यापार कर रहे थे। वे अमीर मरीजों से ऊंची कीमत लेकर गरीबों के अंग उन तक पहुंचाने का काम करते थे। यह पूरा सिस्टम इतना व्यवस्थित था कि सालों तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

कानूनी कार्रवाई और आगे की राह

इस मामले में पुलिस ने कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत कड़ी सजा के प्रावधान हैं और आरोपियों को इसका सामना करना पड़ सकता है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच टीम का गठन किया है। स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले की जांच में पुलिस की सहायता कर रहा है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि पीड़ितों को उचित मुआवजा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी।

समाज पर प्रभाव और चेतावनी

यह मामला भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। यह दिखाता है कि कैसे कुछ अनैतिक तत्व गरीबों और असहाय लोगों का फायदा उठाकर अपना धंधा चलाते हैं। इस घटना ने समाज में चिकित्सा पेशे के प्रति अविश्वास की भावना भी पैदा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था की जरूरत है। सभी अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की नियमित जांच होनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट की जानी चाहिए।

यह घटना एक चेतावनी है कि हमें अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही गरीब और जरूरतमंद लोगों को इस तरह के धोखे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है। केवल सामूहिक प्रयासों से ही हम इस तरह के अमानवीय कृत्यों को रोक सकते हैं।