किडनी स्कैम: रोहित का खुलासा, व्हाट्सएप कॉल में पकड़ा
कानपुर शहर में एक बड़ा किडनी ट्रांसप्लांट स्कैम का भेद खुल गया है। पुलिस को इस अवैध कारोबार के पीछे का मास्टरमाइंड मिल गया है। इस पूरे नापाक कारनामे को अंजाम देने वाला एक ही शख्स था - रोहित तिवारी। जी हां, पूरे स्कैम को चलाने के लिए किसी बड़े गैंग की जरूरत नहीं पड़ी। रोहित ने अकेले ही इस पूरे खेल को अपने हाथों में संभाले रखा था। लेकिन उसकी एक छोटी सी गलती ने उसे पुलिस के सामने ला दिया।
कानपुर पुलिस को गत सप्ताह कल्याणपुर इलाके से रोहित तिवारी को गिरफ्तार किया गया। जब पुलिस उसके ठिकाने पर पहुंची, तो वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ व्हाट्सएप वीडियो कॉल में मशगूल था। इसी बातचीत के दौरान पुलिस ने उसे पकड़ा। उसके गिरफ्तार होने से पहले तक उसे कोई अंदेशा नहीं था कि उसका यह रिश्ता उसकी गिरफ्तारी का कारण बनेगा।
आपराधिक नेटवर्क और षड्यंत्र
रोहित तिवारी का यह पूरा किडनी ट्रांसप्लांट स्कैम दरअसल एक सुविचारित योजना थी। उसने महीनों तक इस अवैध कारोबार को अंजाम दिया। वह जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाता था। गरीब और मजदूर परिवारों को आर्थिक तकलीफ का फायदा उठाकर वह उनसे किडनी खरीदता था। फिर उसी किडनी को उच्च मूल्य पर किसी अन्य व्यक्ति को बेचता था। इस पूरे नेटवर्क में हजारों रुपये की रकम का लेनदेन होता था।
रोहित की कार्यप्रणाली बहुत ही सुविचारित और चतुर थी। वह सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंद लोगों को खोज निकालता था। फिर उन्हें अच्छे पैसे का लालच दिखाकर किडनी दान के लिए राजी करता था। लेकिन असल में, वह उन लोगों को धोखा दे रहा था। उसने कई दस्तावेज जालसाजी के जरिए भी तैयार किए थे। मेडिकल रिपोर्ट से लेकर सरकारी पत्रों तक सब कुछ वह नकली बनवाता था।
ऐसे करता था खेल का संचालन
रोहित का यह पूरा खेल चलाने का तरीका काफी अलग था। वह किसी बड़े अस्पताल में काम नहीं करता था, बल्कि वह एक निजी क्लिनिक के माध्यम से इस कारोबार को अंजाम दे रहा था। उसके पास कुछ भ्रष्ट डॉक्टरों का एक छोटा सा नेटवर्क था। ये डॉक्टर उसके साथ मिलीभगत करते थे और अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करने में उसकी मदद करते थे।
रोहित ने इस पूरे कारोबार को चलाने के लिए फर्जी आइडेंटिटी और फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया। वह कभी अपने असली नाम से काम नहीं करता था। विभिन्न नकली नामों के तहत वह विभिन्न जगहों पर काम करता था। इससे पुलिस को उसे ट्रैक करना काफी मुश्किल हो गया था। हर बार जब पुलिस उसके करीब जाती, तो वह नाम बदलकर किसी अन्य जगह चला जाता था।
उसके पास एक परिष्कृत संचार व्यवस्था थी। वह मेसेजिंग एप्स और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके अपने कारोबार को चलाता था। लेकिन उसकी व्यक्तिगत जिंदगी में एक कमजोरी थी - उसकी गर्लफ्रेंड। वह अपनी गर्लफ्रेंड से नियमित रूप से व्हाट्सएप पर बात करता था। इसी आदत ने उसे पकड़वा दिया।
पकड़े जाने की कहानी
कानपुर पुलिस को कई महीनों की गुप्त जांच के बाद इस स्कैम के बारे में सुराग मिला। जब पुलिस को पता चला कि यह पूरा कारोबार एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है, तो वह हैरान रह गई। आमतौर पर ऐसे बड़े स्कैमों के पीछे एक पूरा गैंग होता है। लेकिन यहां एक ही आदमी पूरे खेल को संभाल रहा था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रोहित अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नियमित रूप से व्हाट्सएप कॉल करता है। पुलिस ने इसी सूराग को पकड़ा। वह कल्याणपुर इलाके में रोहित के ठिकाने का पता लगाने में कामयाब रहा। जब पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापा मारा, तो रोहित उसी समय अपनी गर्लफ्रेंड के साथ व्हाट्सएप वीडियो कॉल में मस्त था। उसे अपने गिरफ्तारी का कोई अंदेशा नहीं था।
पुलिस ने उसके कमरे से कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद कीं। उसके पास फर्जी डॉक्यूमेंट, नकली आइडेंटिटी प्रूफ, और मेडिकल रिपोर्ट मिले। उसके मोबाइल फोन में भी कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले। रोहित के पास एक पूरी डायरी थी जिसमें उसने अपने शिकार और उनसे किए गए लेनदेन का विस्तृत विवरण दर्ज किया था।
अब जांच में सामने आया है कि रोहित ने कम से कम 15 से 20 किडनी ट्रांसप्लांट कराए हैं। हर ट्रांसप्लांट में उसने लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। जो लोग अपनी किडनी बेचने के लिए राजी हुए थे, उन्हें पूरी राशि नहीं दी गई। पुलिस अब उन सभी लोगों की तलाश कर रही है जो इस स्कैम के शिकार बने हैं।
कानपुर पुलिस का कहना है कि यह केस काफी संवेदनशील है। उसमें चिकित्सा संबंधी नैतिकता का सवाल भी शामिल है। पुलिस ने जांच में उन डॉक्टरों को भी गिरफ्तार किया है जो रोहित के साथ मिलीभगत कर रहे थे। अब यह मामला अदालत में जाएगा और न्याय की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस पूरे प्रकरण से सिद्ध होता है कि अपराधी अपनी व्यक्तिगत गलतियों के कारण ही पकड़े जाते हैं। रोहित का मामला भी इसी बात का सबूत है। उसने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नियमित संपर्क रखकर अपना ठिकाना स्पष्ट कर दिया। अगर वह इस बात में थोड़ा सावधान होता, तो शायद पुलिस को उसे पकड़ने में और भी समय लग जाता। लेकिन अब उसे अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ेगा।



