रहाणे टूटे: छोटी गलतियों का भारी खामियाजा
आईपीएल के इस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। गुजरात टाइटन्स के खिलाफ नवीनतम मुकाबले में भी टीम को निराशाजनक हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद कोलकाता के कप्तान अजिंक्य रहाणे का मानसिक दबाव और भी बढ़ गया है। लगातार हार झेल रही टीम अब अपनी बेसिक गलतियों को लेकर अधिक चिंतित दिख रही है।
इस मैच में कोलकाता की ओर से कैमरन ग्रीन ने शानदार प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने अकेले ही टीम के लिए 79 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। लेकिन बाकी बल्लेबाजों की विफलता के कारण उनका शानदार प्रयास बेकार साबित हुआ। यही है इस टीम की सबसे बड़ी समस्या कि जब भी कोई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करता है, तो बाकी सदस्य उसका साथ नहीं निभा पाते हैं। यह संतुलन की कमी है जो कोलकाता को बार-बार हार का मुंह दिखा रही है।
कैमरन ग्रीन की पारी देखने लायक थी, लेकिन उनका प्रयास अकेला पड़ गया। कोलकाता की बल्लेबाजी क्रम में और खिलाड़ियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। मैच के प्रारंभ में ही कुछ महत्वपूर्ण विकेट गिर गए। निरंजन रणवीकरम, नितीश राणा और अन्य प्रमुख बल्लेबाजों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। जब शीर्ष क्रम विफल हो जाता है, तो बाकी बल्लेबाजों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। यही दबाव कोलकाता को इस मैच में भी परास्त करने के लिए काफी रहा।
गेंदबाजी में भी आई कमजोरी
कोलकाता की गेंदबाजी भी इस मैच में कुछ खास प्रभावी नहीं दिख सकी। गुजरात टाइटन्स के बल्लेबाजों ने कोलकाता के गेंदबाजों को काफी सताया। टीम के तेज गेंदबाजों और स्पिनरों में से किसी ने भी शानदार प्रदर्शन नहीं किया। मैच के महत्वपूर्ण पलों में कोलकाता की गेंदबाजी टीम विफल साबित हुई। गुजरात को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोकने में टीम नाकाम रही। यह कमजोरी कोलकाता को टूर्नामेंट में पीछे छोड़ रही है।
गेंदबाजी की योजना भी सही नहीं दिख रही। कप्तान रहाणे की रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब गेंदबाजी में कोई सफलता नहीं मिल रही, तो ऐसे में अलग-अलग रणनीति आजमानी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं दिख रहा है। गेंदबाजी की पारी में गुजरात के खिलाड़ियों को आसानी से रन बनाने का मौका दिया गया। इससे खेल का दायरा ही बढ़ गया।
रहाणे की चिंताएं बढ़ रहीं
कप्तान अजिंक्य रहाणे खुद भी इन लगातार हारों से काफी टूटे दिख रहे हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि छोटी-छोटी गलतियां ही टीम को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। यह बात सत्य है क्योंकि टी-20 क्रिकेट में छोटे मार्जिन से जीत और हार होती हैं। एक या दो रन का फर्क ही मैच को बदल सकता है। कोलकाता की टीम में यही समझ विकसित नहीं हो पा रही है।
रहाणे को अपनी टीम के प्रत्येक सदस्य से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। लेकिन जब निराशाजनक परिणाम आते हैं, तो कप्तान का मनोबल भी गिरने लगता है। वे अपनी टीम को प्रेरित करने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन परिणाम वही नहीं आ रहे जो चाहिए। टीम को इसी तरह हारते हुए देखना किसी भी कप्तान के लिए बहुत कठिन होता है।
टीम को करने होंगे बड़े बदलाव
इस बिंदु पर कोलकाता को अपनी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा। टीम की संरचना, खेलने की पद्धति, और खिलाड़ियों के चयन में कुछ परिवर्तन आवश्यक प्रतीत हो रहे हैं। बल्लेबाजी क्रम को पुनर्गठित करने की जरूरत है। गेंदबाजी विभाग में भी नई रणनीति लानी होगी। यदि टीम अपनी गलतियों को जल्दी सुधार नहीं पाई, तो यह सीजन टीम के लिए और भी कठिन हो सकता है।
कोलकाता नाइट राइडर्स की यह टीम काफी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से भरी है। लेकिन प्रतिभा को ही काफी नहीं माना जा सकता। दल के रूप में काम करना, एक-दूसरे का समर्थन करना, और महत्वपूर्ण पलों में शांत रहना ये सभी कौशल जीत के लिए आवश्यक हैं। यही कारण है कि विश्व के सबसे अच्छे क्रिकेट टीमें न केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ियों वरन् अच्छे मानसिक कौशल वाले खिलाड़ियों को भी वरीयता देती हैं।
आगामी मैचों में कोलकाता को एक विजेता मानसिकता के साथ मैदान में उतरना होगा। प्रत्येक गलती से सीखना होगा और आगामी मैच में उसे ठीक करना होगा। कैमरन ग्रीन जैसे खिलाड़ियों को सही समर्थन देना होगा। रहाणे को अपनी कप्तानी के माध्यम से टीम को एकजुट रखना होगा। यदि ये बातें हो जाती हैं, तो कोलकाता की हार की श्रृंखला को रोका जा सकता है। अभी मौसूम बाकी है। अभी बहुत कुछ संभव है। कोलकाता को इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।



