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Tuesday, 21 July 2026
समाचार

कूनो से आजाद दो चीते, प्रोजेक्ट में 57 तक पहुंची संख्या

author
Komal
संवाददाता
📅 11 May 2026, 11:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
कूनो से आजाद दो चीते, प्रोजेक्ट में 57 तक पहुंची संख्या
📷 aarpaarkhabar.com

प्रोजेक्ट चीता में नया मील का पत्थर

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क में एक ऐतिहासिक क्षण को अंजाम दिया है। उन्होंने बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को खुले जंगल में आजाद किया। यह उपलब्धि प्रोजेक्ट चीता के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या 57 तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने इस प्रयास को मध्यप्रदेश और वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

कूनो नेशनल पार्क भारत में चीतों के पुनर्वास के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान साबित हुआ है। यहां के कर्मचारियों और वन विभाग की मेहनत इन जंगली जानवरों को सुरक्षित रखने में बहुत अहम भूमिका निभा रही है। दोनों मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले उन्हें सभी जरूरी टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच से गुजारा गया था। यह सुनिश्चित किया गया था कि ये चीते पूर्णतः स्वस्थ और मजबूत हों।

प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य भारत में इन दुर्लभ जानवरों की आबादी को बढ़ाना है। सातवें दशक में भारत से चीते विलुप्त हो गए थे। लेकिन अब सरकार और वन विभाग की कोशिशों से ये महान शिकारी फिर से भारतीय जंगलों में वापस आ रहे हैं। यह एक बड़ी सफलता की गाथा है जो हमारे देश की वन्यजीव संरक्षण नीति की मजबूती को दर्शाती है।

मध्यप्रदेश का योगदान और जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश ने प्रोजेक्ट चीता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में कूनो नेशनल पार्क और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में ये चीते पल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश हर दिन इस प्रोजेक्ट में नए कीर्तिमान रच रहा है। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की निरंतर मेहनत इसी का परिणाम है।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों के रहने के लिए आदर्श परिस्थितियां मौजूद हैं। यहां घास के मैदान हैं, शिकार के लिए पर्याप्त जानवर हैं और पानी की व्यवस्था भी अच्छी है। पार्क की सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत मजबूत है ताकि चीतों को किसी तरह का खतरा न हो। स्थानीय लोगों को भी इस प्रोजेक्ट के महत्व के बारे में बताया गया है ताकि वे इन जानवरों की सुरक्षा में मदद करें।

मध्यप्रदेश की सरकार ने चीतों के आवास को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। जंगलों में सुधार, पानी के स्रोतों का विकास और शिकार के लिए जानवरों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। ये सभी कदम चीतों के सफल पुनर्वास के लिए बहुत जरूरी थे। राज्य का यह प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है।

चीतों की संरक्षण यात्रा और भविष्य की योजनाएं

भारत में चीते लाने की यह यात्रा बहुत चुनौतीपूर्ण रही है। सबसे पहले विदेश से चीते मंगवाए गए और फिर उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया। कूनो नेशनल पार्क में शुरुआत में नामीबिया से चीते लाए गए थे। फिर बोत्सवाना से भी चीते लाए गए। अब भारत में ये चीते स्वाभाविक तरीके से पनप रहे हैं।

इस समय भारत में 57 चीते हैं जो एक गर्वान्वित पल है। ये संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। कुछ चीतों ने यहां प्राकृतिक तरीके से भी संतान पैदा की है जो बहुत आशाजनक संकेत है। यह दर्शाता है कि भारतीय जंगल इन जानवरों के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान कर रहे हैं।

भविष्य में सरकार की योजना अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी चीतों को स्थानांतरित करने की है। गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी चीतों के आवास तैयार किए जा रहे हैं। इससे चीतों की आबादी को विभिन्न क्षेत्रों में फैलाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच से दस सालों में भारत में चीतों की संख्या 100 से ज्यादा हो सकती है।

वन्यजीव संरक्षण एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें धैर्य और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है। मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय सरकार दोनों मिलकर इस महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न कर रहे हैं। भारतीय वन्यजीव सेवा के अधिकारी भी इस प्रोजेक्ट में बहुत सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हर दिन चीतों की निगरानी की जाती है और उनके स्वास्थ्य के बारे में रिकॉर्ड रखा जाता है।

ये दो मादा चीतें कूनो के जंगलों में अपना नया घर बनाएंगी। आशा है कि ये यहां सुरक्षित रहेंगी और अपनी संतान भी पैदा करेंगी। इस सफलता के साथ भारत ने साबित कर दिया है कि सही नीति और कड़ी मेहनत से विलुप्त प्रजातियों को फिर से लाया जा सकता है। प्रोजेक्ट चीता भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक गौरवान्वित अध्याय है।