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Tuesday, 19 May 2026
समाचार

दिल्ली अदालतों में वकीलों का कार्य बहिष्कार आज

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Komal
संवाददाता
📅 18 May 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 893 views
दिल्ली अदालतों में वकीलों का कार्य बहिष्कार आज
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली की सभी जिला अदालतों में आज वकीलों का बड़ा कार्य बहिष्कार होने वाला है। यह निर्णय ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में लिया गया है। अधिवक्ताओं के इस कदम के पीछे रोहिणी कोर्ट के जिला न्यायाधीश राकेश कुमार के व्यवहार को लेकर गहरी नाराजगी है। वकील संघ का मानना है कि न्यायाधीश के रवैये से न्याय व्यवस्था में बाधा आ रही है और अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ेगा। अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई स्थगित हो जाएगी और आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वकीलों का यह कदम एक बड़ा संदेश देता है कि वे न्यायपालिका में पारदर्शिता और सही व्यवहार की मांग कर रहे हैं।

न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर नाराजगी

रोहिणी कोर्ट के जिला न्यायाधीश राकेश कुमार के आचरण को लेकर अधिवक्ताओं की शिकायतें लंबे समय से चल रही हैं। वकीलों का आरोप है कि न्यायाधीश अदालत में वकीलों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं और अनावश्यक रूप से तनाव का माहौल बनाते हैं। इसके अलावा, उनके कुछ आदेशों को लेकर भी विवाद है, जो कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माने जा रहे हैं।

वकील संघ के प्रवक्ता के अनुसार, इस मुद्दे को कई बार वरिष्ठ न्यायिक प्राधिकारियों के समक्ष उठाया गया है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न्यायाधीश के व्यवहार से न केवल वकीलों को बल्कि कानूनी व्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है। अदालत का माहौल तनावपूर्ण हो गया है, जिससे मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।

अधिवक्ताओं का मानना है कि एक जिला न्यायाधीश का कर्तव्य होता है कि वह अदालत के भीतर एक सम्मानजनक और कानूनी माहौल बनाए रखें। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह नहीं हो रहा है। इसलिए, वकीलों ने एकजुट होकर यह फैसला लिया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे अदालत में काम नहीं करेंगे।

बार एसोसिएशन की कोर्डिनेशन कमेटी का निर्णय

ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली की को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस कमेटी में दिल्ली के सभी जिला अदालतों के वकीलों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कमेटी की बैठक में यह तय किया गया कि अगर जिला न्यायाधीश राकेश कुमार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो दिल्ली की सभी अदालतों में कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

यह निर्णय काफी गंभीर मामले को दर्शाता है। वकील संघ ने साफ संदेश दिया है कि वे न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार हैं। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।

कमेटी के अध्यक्ष ने कहा है कि यह कदम अंतिम विकल्प है। अगर प्रशासनिक स्तर पर समस्या का समाधान हो जाता है, तो वकील अपना आंदोलन वापस ले सकते हैं। लेकिन जब तक न्यायाधीश के व्यवहार में परिवर्तन नहीं आता, तब तक वकील कार्य बहिष्कार जारी रखेंगे। दिल्ली के हर जिले की अदालतें इससे प्रभावित होंगी और लाखों लोग जो न्याय के लिए अदालतों का रुख करते हैं, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

आम जनता पर प्रभाव और भविष्य की रणनीति

वकीलों के इस कार्य बहिष्कार का सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ेगा। दिल्ली की अदालतों में हजारों मामले लंबित हैं। आज का बहिष्कार इन मामलों को और भी लंबा खींच देगा। परिवार के कानूनी मामले, व्यावसायिक विवाद, आपराधिक मामले सभी प्रभावित होंगे।

हालांकि, वकील संघ का तर्क है कि यदि अदालतों में सही माहौल नहीं है, तो न्याय की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। उनका विश्वास है कि यह अल्पकालिक परेशानी लंबे समय में बेहतर न्याय प्रणाली के लिए आवश्यक है।

वकील संघ ने आगे की रणनीति भी तय कर ली है। यदि जिला न्यायाधीश राकेश कुमार अपने व्यवहार में सुधार नहीं करते या उच्च न्यायिक प्राधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो बहिष्कार को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता है। इसके अलावा, अन्य राज्यों के वकील संघों से भी समर्थन मांगा जा सकता है।

दिल्ली के उच्च न्यायालय ने भी इस मामले पर ध्यान दिया है। न्यायिक प्रशासन ने कहा है कि वह स्थिति की समीक्षा करेगा। लेकिन वकीलों को लगता है कि यह पर्याप्त नहीं है। उन्हें ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

यह मामला न केवल दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे देश की न्याय व्यवस्था के लिए एक संदेश है। जब न्यायालय में ही सम्मान और व्यवस्था नहीं होगी, तो कैसे सामान्य जनता न्याय के लिए अदालतों का रुख करेगी। वकीलों का यह आंदोलन न्यायिक सुधार की मांग है और सभी हितधारकों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।