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Thursday, 04 June 2026
राजनीति

ममता बनर्जी: अभिषेक का प्रभाव और TMC की गिरावट

author
Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 7:17 AM ⏱ 1 मिनट 👁 322 views
ममता बनर्जी: अभिषेक का प्रभाव और TMC की गिरावट
📷 aarpaarkhabar.com

बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का नाम एक जुझारू नेता के रूप में जाना जाता है। अपनी मजबूत राजनीतिक रणनीति और जनता के करीब रहने की कला के कारण वह बंगाल की सत्ता तक पहुंचीं। लेकिन आज वही ममता बनर्जी अपनी ही पार्टी ट्रिनमूल कांग्रेस (TMC) को खतरे में डालने का कारण बन गई हैं। और इस पूरी कहानी में केंद्रीय किरदार हैं उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी।

जब ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने TMC को एक मजबूत राजनीतिक दल के रूप में स्थापित किया। लेकिन समय के साथ ही उनके निर्णय विवादास्पद होते गए। अभिषेक को पार्टी में प्रमुख पदों पर नियुक्त करना, उन्हें महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियां देना - यह सब ममता की व्यक्तिगत पसंद का परिणाम था। लेकिन इस निर्णय की कीमत TMC को और बंगाल की जनता को चुकानी पड़ रही है।

भतीजा प्रबंधन की शुरुआत

अभिषेक बनर्जी को TMC में लाने का विचार ममता के दिमाग में कब आया, यह तो सिर्फ ममता जानती हैं। लेकिन जब से अभिषेक को पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है, तब से ही TMC में आंतरिक कलह बढ़ने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जो दशकों से ममता के साथ संघर्ष करते रहे हैं, वे अब हाशिए पर डाल दिए गए हैं। इसके बदले में अभिषेक को सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल किया जाने लगा।

यह एक बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति है जो किसी भी राजनीतिक दल के लिए जहर साबित हो सकती है। जब परिवार के सदस्य को राजनीतिक दल के आंतरिक प्रशासन में वरीयता दी जाने लगती है, तो अन्य कर्मी को लगता है कि उनकी मेहनत और वफादारी का कोई मूल्य नहीं है। ऐसी परिस्थिति में पार्टी के अंदर विद्रोह की संभावना तेज हो जाती है।

भारतीय राजनीति के इतिहास को देखा जाए तो परिवारवादी नीति अपनाने वाली पार्टियों का हाल ख़राब हुआ है। भतीजा प्रबंधन या पोते-पोतियों को वरीयता देने से न केवल पार्टी के अंदर कलह बढ़ती है, बल्कि जनता का विश्वास भी कम होने लगता है। ममता ने शायद यह सबक नहीं सीखा।

अभिषेक की छवि में गिरावट

अभिषेक बनर्जी को देखें तो वह जन्म से ही राजनीतिक परिवार में आए थे। लेकिन एक मजबूत पृष्ठभूमि होना और एक सफल राजनीतिज्ञ बनना बिल्कुल अलग-अलग बातें हैं। अभिषेक को जो भी पद ममता ने दिया है, उसमें उन्होंने अपनी योग्यता साबित करने की बजाय ममता की जोड़-तोड़ पर निर्भर रहना ज्यादा पसंद किया है।

भ्रष्टाचार के आरोप, पार्टी के अंदर उनके अनुचित व्यवहार के किस्से, और अन्य नेताओं के प्रति उनकी औद्धत्य - सब कुछ मिलकर अभिषेक की छवि को खराब कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की जनता समझ गई है कि अभिषेक सिर्फ इसलिए TMC में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह ममता के भतीजे हैं, न कि उनकी अपनी योग्यता के कारण।

यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति है। ममता ने अभिषेक को जो भी पद दिया है, वह उन्हें कमजोर बना दिया है, न कि मजबूत। क्योंकि जनता को हमेशा संदेह रहता है कि क्या अभिषेक अपनी योग्यता से आगे बढ़ रहे हैं या सिर्फ अपनी रिश्तेदारी के कारण।

TMC और बंगाल की भविष्य

ट्रिनमूल कांग्रेस आज एक बहुत ही नाजुक स्थिति में है। एक तरफ तो अन्य राजनीतिक दल बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं, और दूसरी तरफ TMC के अंदर ही आंतरिक कलह चल रही है। ममता की भतीजा प्रबंधन की नीति ने पार्टी को बहुत ही कमजोर कर दिया है।

इस समय अगर ममता TMC को बचाना चाहती हैं, तो उन्हें अपनी गलती को स्वीकार करना होगा। अभिषेक को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से हटाना होगा और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को वापस से महत्व देना होगा। लेकिन यह करना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि ममता के लिए पारिवारिक रिश्ते राजनीतिक सिद्धांतों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।

बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव की आस है। अगर ममता अभी भी नहीं जागीं तो TMC को एक बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। और इस पूरे खेल में असली हारी बंगाल की जनता होगी, जिन्होंने एक बार ममता पर विश्वास किया था। भतीजा प्रबंधन की इस नीति ने ममता को न केवल TMC में, बल्कि जनता के दिलों में भी कमजोर कर दिया है।