नाबालिग दोहरा पासपोर्ट नहीं रख सकते नए नियम
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकता और ओसीआई कार्ड से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के तहत नाबालिग बच्चों के लिए एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट रखना संभव नहीं रह गया है। यह निर्णय देश में दोहरी नागरिकता से जुड़े विभिन्न विवादों और कानूनी जटिलताओं को दूर करने के लिए लिया गया है।
यह नीति परिवर्तन उन सभी परिवारों को प्रभावित करेगा जिनके बच्चे नाबालिग हैं और जिनके माता-पिता भारतीय मूल के विदेशी नागरिक हैं। अब तक ऐसे बच्चों के लिए दोनों देशों के पासपोर्ट रखना संभव था, लेकिन नए नियमों के अनुसार यह सुविधा समाप्त कर दी गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि नाबालिग उम्र के दौरान केवल एक देश का पासपोर्ट ही रख सकते हैं।
नए नियमों का प्रभाव और कार्यान्वयन
इस नीति के अनुसार, यदि किसी नाबालिग के पास भारतीय पासपोर्ट है, तो वह उसी समय किसी अन्य देश का पासपोर्ट धारण नहीं कर सकता। इसका मतलब यह है कि माता-पिता को बचपन में ही निर्णय लेना होगा कि उन्हें अपने बच्चे के लिए किस देश का पासपोर्ट बनवाना है। यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बच्चे की भविष्य की नागरिकता और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रभावित होती हैं।
गृह मंत्रालय ने इस नीति को लागू करते हुए यह भी निर्धारित किया है कि जो नाबालिग बच्चे पहले से ही दोनों देशों के पासपोर्ट रखते हैं, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर एक पासपोर्ट को त्यागना होगा। इस समय सीमा को पूरा करने में विफल रहने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, सरकार ने परिवारों को इस प्रक्रिया में पर्याप्त समय और सहायता प्रदान करने का वचन दिया है।
दोहरी नागरिकता से संबंधित विवाद
भारत में आधिकारिक तौर पर दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत भारतीय नागरिक को किसी अन्य देश की नागरिकता अपनाने पर भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, ओसीआई (अप्रवासी भारतीय नागरिक) योजना के तहत भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को कुछ विशेष सुविधाएं दी जाती हैं।
समस्या तब उत्पन्न हुई जब नाबालिग बच्चों के संदर्भ में यह स्पष्ट नहीं था कि क्या वे दोनों देशों के पासपोर्ट रख सकते हैं। कई परिवारों ने इस अस्पष्टता का लाभ उठाते हुए अपने बच्चों के लिए दोनों पासपोर्ट बनवा लिए। इससे पासपोर्ट सत्यापन में समस्याएं, अभिलेख प्रबंधन में जटिलताएं और कानूनी विवाद उत्पन्न हुए। गृह मंत्रालय ने इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
माता-पिता और परिवारों के लिए दिशानिर्देश
जो माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के लिए पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं, उन्हें नए नियमों का पालन करना होगा। पहले उन्हें स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा कि वे किस देश का पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं। भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय, माता-पिता को यह प्रमाण प्रदान करना होगा कि बच्चे के पास किसी अन्य देश का वैध पासपोर्ट नहीं है।
इसी प्रकार, यदि माता-पिता बच्चे के लिए विदेशी पासपोर्ट बनवाना चाहते हैं, तो उन्हें संबंधित देश के नियमों का पालन करना होगा। लेकिन भारतीय पक्ष से नाबालिग को भारतीय पासपोर्ट से वंचित करने का अधिकार सरकार को है यदि बच्चे के पास अन्य देश का पासपोर्ट हो।
इन नियमों में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे ही बच्चा वयस्क हो जाता है, उसे दोनों नागरिकताओं के बीच चयन करने का अधिकार मिल जाता है। भारतीय कानून के अनुसार, एक व्यक्ति 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद अपनी नागरिकता के बारे में निर्णय ले सकता है। वह भारतीय नागरिकता ग्रहण कर सकता है या किसी अन्य देश की नागरिकता को प्राथमिकता दे सकता है।
कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय का यह निर्णय नागरिकता कानूनों को अधिक स्पष्ट और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह नीति परिवारों को समय पर सही निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी और भविष्य में कानूनी जटिलताओं से बचाएगी।




